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Data Protection Bill: रियायतों के साथ आया डेटा सुरक्षा विधेयक

8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों या दिव्यांगों की व्य​क्तिगत जानकारी के लिए उनके माता-पिता या कानूनी संरक्षक से सहमति लेनी होगी।

Last Updated- August 03, 2023 | 10:23 PM IST
डेटा संरक्षण कानून के उल्लंघन के लिए जोखिम सीमा पर स्पष्टता की आवश्यकता , Data protection law needs clarity on risk threshold for breaches:

सरकार ने व्यक्तिगत जानकारी का कानूनी तरीके से संग्रह और इस्तेमाल करने तथा उसे सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल व्य​क्तिगत डेटा सुरक्षा विधेयक, 2023 आज पेश कर दिया। लोकसभा में पेश विधेयक में डेटा लीक होने पर 250 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

व्य​क्तिगत जानकारी का इस्तेमाल करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को उपयोगकर्ताओं को इसकी जानकारी देनी होगी और बिना शर्त सहमति लेनी होगी। उपयोगकर्ता यानी यूजर किसी भी समय अपनी रजामंदी वापस ले सकते हैं, जिसके बाद प्लेटफॉर्म को जानकारी का इस्तेमाल बंद करना होगा और उसे अपने डेटाबेस से हटाना भी होगा।

व्यक्तिगत जानकारी सरकार की काली सूची में दिए गए स्थानों को छोड़कर किसी भी देश में भेजी जा सकती है। उद्योग जगत ने नए विधेयक पर कुल मिलाकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इस विधेयक पर चार साल से ज्यादा काम हुआ है, चर्चा के कई दौर हुए हैं और कई संशोधन भी किए गए हैं। इसलिए विधेयक की रूपरेखा पहले मसौदे के मुकाबले काफी अलग है।

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उद्योग जगत बड़ी राहत देते हुए विधेयक में सीमा पार डेटा भेजने की इजाजत दे दी गई है। साथ ही डेटा के बिना इजाजत इस्तेमाल की बात स्वयं ही स्वीकार करने की बात भी कही गई है, जिस पर 2019 के मसौद में मौजूद जुर्माने हटा दिए गए हैं। चिकित्सा संबंधी आपात स्थिति, आपदा, अदालत के आदेश और सरकारी एजेंसियों के कुछ खास मकसदों के लिए जानकारी का इस्तेमाल करने के लिए सहमति जरूरी नहीं होगी।

विधेयक के अनुसार हरेक प्लेटफॉर्म को डेटा के इस्तेमाल का उद्देश्य और यूजर्स के अधिकार समझाने वाला नोटिस देना होगा। नोटिस सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा। अगर प्लेटफॉर्म ने यूजर्स की व्य​क्तिगत जानकारी पहले ही इकट्ठी कर ली है तो उसे यूजर्स को एक नोटिस भेजकर बताना होगा कि वे इजाजत वापस भी ले सकते हैं।

यह विधेयक अज्ञात, गैर-व्यक्तिगत और ऑफलाइन व्यक्तिगत डेटा पर लागू नहीं होता है। जानकारी को संवेदनशील और महत्त्वपूर्ण की श्रेणी में भी नहीं रखा है। मुकदमेबाजी कम करने के उद्देश्य से इस विधेयक में वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) का प्रावधान किया गया है। यदि इसे मंजूरी के बाद लागू कर दिया गया तो भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए यह अहम कानून साबित होगा।

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दुनिया की तमाम बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ा दांव लगा रही हैं। सरकार एक डेटा सुरक्षा बोर्ड भी स्थापित करेगी। यह स्वतंत्र निकाय होगा, जो व्यक्तिगत डेटा उल्लंघन संबंधी मामलों की जांच करेगा और जुर्माना लगाएगा। अगर कोई प्लेटफॉर्म डेटा उल्लंघन पर रोक लगाने के लिए उचित सुरक्षा उपाय करने में विफल रहता है तो बोर्ड उस पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है। बच्चों की जानकारी से संबंधित अतिरिक्त दायित्वों का पालन करने में विफल रहने पर 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

First Published - August 3, 2023 | 10:23 PM IST

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