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Amarnath Yatra: शिवलिंग के जल्दी पिघलने से अमरनाथ यात्रा पर असर, कई यात्राएं रद्द

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अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो गई है और शुक्रवार शाम तक 1.45 लाख से अधिक तीर्थयात्री अनंतनाग जिले की पहलगाम तहसील में 3,880 मीटर ऊंचे गुफा मंदिर के दर्शन कर चुके हैं।

Last Updated- July 12, 2025 | 8:26 AM IST
Amarnath Yatra

बहुप्रती​क्षित सालाना अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो गई है और शुक्रवार शाम तक 1.45 लाख से अधिक तीर्थयात्री जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले की पहलगाम तहसील में 3,880 मीटर ऊंचे गुफा मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा के लिए 4 लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। लेकिन घाटी में जून का महीना 50 साल में सबसे गर्म रहा, जिसकी वजह से तेजी से पिघल रहे ​शिवलिंग के दर्शन के लिए ​यात्रियों में होड़ लगी है। आने वाले हफ्तों में पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट की आशंका से टूर ऑपरेटरों और होटल मालिकों की चिंता बढ़ गई है।

टूर ऑपरेटरों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस साल यात्रा शुरू होने के चार दिन बाद 7 जुलाई तक शिवलिंग काफी पिघल गया था। घाटी में बीते शनिवार को दिन का तापमान सात दशक में सबसे अधिक दर्ज किया गया था। श्रीनगर में अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री था जो 1953 के बाद सबसे अधिक है। आधिकारिक तौर पर 38 दिनों की अमरनाथ यात्रा 9 अगस्त को समाप्त होने वाली है।

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22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और सरकार द्वारा अमरनाथ यात्रा के सभी मार्गों को ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित करने की वजह से अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद कर दी है। इससे पहले से ही 2024 की तुलना में कम पंजीकरण हुआ है। पिछले साल 5.10 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने हिम ​शिवलिंग के दर्शन किए थे। यात्रा के मार्ग पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती की गई है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 581 कंपनियां तैनात की गई हैं और एंटी-ड्रोन तथा एयर डिफेंस सिस्टम से भी पूरे रास्ते की सुरक्षा चाक-चौबंद की गई है।

इस साल तीर्थयात्री अनंतनाग जिले में पहलगाम और गांदरबल जिले में बालटाल के दो मार्गों से पैदल, टट्टुओं या पालकी से मंदिर तक पहुंच रहे हैं। गुरुवार की सुबह बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में 6,400 से अधिक तीर्थयात्रियों का दसवां जत्था मंदिर के दो आधार शिविरों के लिए रवाना हुआ। खड़ी चढ़ाई के कारण 14 किलोमीटर के बालटाल मार्ग से कम तीर्थयात्री जा रहे हैं। ज्यादातर तीर्थयात्रियों ने 48 किलोमीटर के पारंपरिक पहलगाम मार्ग को प्राथमिकता दी है।

टूर ऑपरेटर वंडर वर्ल्ड यात्रा के बिक्री विभाग के जतिन नागर ने कहा, ‘हमारी कुल बुकिंग का लगभग 60 फीसदी हेलीकॉप्टर यात्रा के लिए था मगर हवाई सेवा बंद होने के बाद सभी बुकिंग रद्द हो गईं। अब हमारे पास केवल 20 बुकिंग हैं।’ नागर ने बताया कि इस साल पहलगाम आतंकवादी हमले को देखते हुए यात्रा में रुचि कम थी। उन्होंने कहा, ‘हमें लोगों को यात्रा पर आने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए अपने टूर पैकेज की कीमत 6 से 7 फीसदी तक घटानी पड़ी मगर हेलीकॉप्टर सेवाओं का बंद होना एक बड़ा झटका था।’

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टूर ऑपरेटरों की आशंका के विपरीत हाल में शुरू की गई कटरा-श्रीनगर वंदेभारत ट्रेन में टिकट की प्रतीक्षा सूची काफी ज्यादा है। यात्रा प्लेटफॉर्म ईजमाइट्रिप के अनुसार होटलों की बुकिंग भी अच्छी बनी हुई है।

ईजमाइट्रिप के सह-संस्थापक औरसीईओ रिकांत पिट्टी ने कहा, ‘4 लाख से अधिक पंजीकरण पहले ही हो चुके हैं और लगभग 5 लाख अपेक्षित पर्यटकों की संख्या से भक्तों की आस्था और उत्साह मजबूत बना हुआ है। यात्रा की अवधि कम होने के बावजूद बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। जून की शुरुआत में होटलों के कमरों की बुकिंग 19-20 फीसदी बढ़कर यात्रा शुरू होने पर लगभग 40 फीसदी तक पहुंच गई है।’ हालांकि नो फ्लाई जोन घो​षित किए जाने के बाद श्राइन यात्रा को हेलीकॉप्टर के लिए 150 बुकिंग रद्द करनी पड़ी। श्राइन यात्रा के प्रबंध निदेशक रौनक चौहान ने कहा, ‘हमारे पास टट्टू से जाने के लिए कोई यात्री नहीं था क्योंकि इसके लिए अलग पंजीकरण की आवश्यकता होती है।’

पैदल, टट्टू या पालकी पर यात्रियों को ले जाने टूर ऑपरेटरों की बुकिंग भी घटी है क्योंकि ​​​शिवलिंग करीब-करीब पिघल चुका है। 2018 में शिवलिंग बनने के 29 दिन बाद 27 जुलाई तक पिघल गया था जबकि 2020 में इसका दो-तिहाई हिस्सा 38 दिनों में पिघल गया और 2022 में यह केवल 28 दिनों तक ही रहा। 2023 में, तापमान सामान्य से कम होने के कारण शिवलिंग 47 दिनों तक बना रहा 2024 में यह सिर्फ एक सप्ताह में गायब हो गया लेकिन इससे तीर्थयात्रियों को गुफा मंदिर में जाने से नहीं रोका जा सका।

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अमरनाथ यात्रा के लिए किराये पर टट्टू उपलब्ध कराने वाली पोनीपालकी के प्रबंधक रियाज अहमद ने कहा, ‘इस साल हम 200 लोगों को टट्टुओं से यात्रा पर ले गए हैं लेकिन पिछले साल की तुलना में इनकी संख्या घटी है।’ कंपनी के पास लगभग 40 टट्टू हैं और पीक सीजन के दौरान ये लगभग 150 टट्टुओं की सेवाएं लेते थे। उन्होंने कहा कि इस सीजन में इसकी आवश्यकता नहीं पड़ी। यहां तक कि आसपास के गांवों के टट्टूवाले भी इस साल नहीं आए।

टट्टुओं के अलावा कंपनी ने 120 तीर्थयात्रियों को पालकी में और लगभग 850 को पैदल यात्रा कराई। उन्होंने कहा, ‘यह तीर्थयात्रा आधिकारिक तारीख से थोड़ा पहले समाप्त होने के लिए जानी जाती है और इस साल भी, हमें उम्मीद है कि यह 9 अगस्त की आधिकारिक तारीख से पहले बंद हो जाएगी।’

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First Published - July 11, 2025 | 10:35 PM IST

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