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हरित हाइड्रोजन: उद्योगों का दांव

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Last Updated- December 11, 2022 | 4:06 PM IST

 भारत की दिग्गज व नवीकरणीय ऊर्जा की कंपनियों ने ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण के लिए भारी निवेश करना शुरू कर दिया है। ज्यादातर औद्योगिक घराने कार्बन के उत्सर्जन को घटाने की पहल के तहत निवेश कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती दौर में अग्रणी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की अपनी कंपनी में ही इस्तेमाल के लिए ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने की योजना है लेकिन यह खुदरा बिक्री के लिए नहीं होगी। हरित ईंधन को बढ़ावा देने के लिए साल 2020 में 75,000 करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की गई थी। इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘दिग्गज कंपनियों की विभिन्न शाखाओं में हरित हाइड्रोजन की अत्यधिक मांग है। इसलिए प्राथमिकता इस मांग को पूरा करना है। काफी बड़े पैमाने पर उत्पादन की योजना है जिससे लागत में कमी आ जाएगी। निर्माण लागत को कम करने के लिए कंपनी की नजर वैश्विक तकनीक के उपयोग पर है।’
अक्टूबर, 2021 में आरआईएल ने हाइड्रोजन ‘इलेक्ट्रोलाइजर्स’ के निर्माण व विकास के लिए डेनमार्क की कंपनी स्टिस्डल ए/एस से समझौता किया। यंत्र ‘इलेक्ट्रोलाइजर्स’ पानी में बिजली प्रवाहित कर रासायनिक प्रक्रिया ‘इलेक्ट्रोलिसिस’ करता है और इससे पानी में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के अणु अलग-अलग हो जाते हैं।
इसी तरह सरकार संचालित इंडिया ऑयल कॉरपोरेशन ने अपनी रिफाइनरियों में मौजूदा जीवाश्म-ईंधन-आधारित हाइड्रोजन के कम से कम दसवें हिस्से को कार्बन-मुक्त हरित हाइड्रोजन से बदलने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि शुरुआती दौर में ज्यादातर कंपनियां आंतरिक इस्तेमाल के लिए उपयोग करने पर विचार कर रही हैं। साल 2016 में नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार शुरू करने वाले हिंदुजा समूह ने हरित हाइड्रोजन का उत्पादन बढ़ाने पर विचार किया है। हिंदुजा रिन्यूएबल्स के सीईओ सुमित पांडेय ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि उनकी कंपनी में यातायात, खाद, स्टील और ईंधन समिश्रण के क्षेत्रों में इस ईंधन की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, ‘वे  विभिन्न क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला में कारोबार को बढ़ाना चाहते हैं। इसमें यातायात प्रमुख क्षेत्र होगा। शुरुआती चरणों में हम तकनीक के मामले में साझेदारी करने के लिए विदेशी कंपनियों से भी बातचीत कर रहे हैं। इससे कारोबार में बाजार की उपस्थिति और मजबूत होगी।’ 
हिंदुजा समूह की वाहन निर्माता अशोक लीलैंड की अपने कारोबार में कई ईंधनों का इस्तेमाल करने की योजना है। मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एन. सरवनन ने हाल में इस अखबार को बताया, ‘हम कई वैकल्पिक ईंधनों पर काम कर रहे हैं जैसे संपीडि़त प्राकृतिक गैस (कम्प्रेस्ड नैचुरल गैस) /तरलीकृत प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और हाइड्रोजन आदि। आने वाले दो – तीन सालों में प्रमुख साझेदारों के साथ वाणिज्यिक वाहनों में वैकल्पिक ईंधन का पूरा कारोबार होने की उम्मीद है। ‘
हिंदुजा रिन्यूएबल्स के पास 360 मेगावॉट सौर ऊर्जा क्षमता है और इस कंपनी की हरित ऊर्जा व हाइड्रोजन उत्पादन में तारतम्य बनाने की योजना है।
हिंदुजा रिन्यूएबल्स के सीईओ पांडेय ने कहा, ‘अभी योजनाएं शुरुआती चरणों में हैं। समूह की कंपनियों जैसे अशोक लीलैंड, हिंदुजा एग्रो, गल्फ ऑयल को स्टील उत्पादन और पेट्रोल सम्मिश्रण के लिए सिलसिलेवार आपूर्ति बढ़ रही है।’ लेकिन उद्योग जगत के दिग्गज भी तेजी से बढ़ते इस बाजार में धन कमाना चाहते हैं।
अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने हरित ऊर्जा पर विशेष तौर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अलग-अलग पेट्रोकेमिकल्स कंपनी और नई ऊर्जा कंपनी की शुरुआत की है। अदाणी पेट्रोकेमिकल्स की योजना कई तरह के हरित ईंधन मुहैया कराना है ताकि इनका इस्तेमाल अपनी आपूर्ति श्रृंखला व नवीकरणीय ऊर्जा की इकाइयों में उत्पादन व यातायात के क्षेत्र में हो सके। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार कंपनी की चार स्तरीय योजना में हरित हाइड्रोजन, हरित मेथनॉल, हरित अमोनिया और हरित खाद निर्माण शुरू करने की योजना है। कंपनी की योजना है कि हर ईंधन के लिए अलग तरह के खरीदारों का समूह हो। सूत्रों के मुताबिक कंपनी हरित हाइड्रोजन व खाद की सरकारी निविदाओं में भी हिस्सा लेगी।
अदाणी ने फ्रांस की प्रमुख टोटाल एनर्जीज से साझेदारी की है ताकि ‘विश्व का सबसे बड़ा हाइड्रोजन इकोसिस्टम’ बनाया जा सके। कंपनी के हालिया बयान में बताया गया कि इस रणनीति साझेदारी में टोटाल एनर्जीज अदाणी एंटरप्राइजेस लिमिटेड (एईएल) से अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एएनआईएल) में 25 प्रतिशत का अधिग्रहण करेगी। एएनआईएल आने वाले 10 सालों में हरित हाइड्रोजन और संबंधित ईकोसिस्टम में करीब 50 अरब डॉलर का निवेश करेगी। अन्य प्रमुख निर्माताओं में एलऐंडटी ने गुजरात के हजीरा स्थित ए एम नायक हेवी इंजीनियरिंग कांप्लेक्स में 20 अगस्त को हरित हाइड्रोजन के संयंत्र का उद्घाटन किया। शुरुआती चरण में हाइड्रोजन का इस्तेमाल कंपनी में ही होगा और हाइड्रोजन को प्रसंस्करण इकाई की मदद से प्राकृतिक गैस में सम्मिश्रण किया जाएगा।
गुरुग्राम की कंपनी एसीएमई समूह ने तमिलनाडु, कर्नाटक और ओमान की अपनी इकाइयों में हरित हाइड्रोजन व अमोनिया के लिए 15 खरब रुपये निवेश करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नवीकरणीय ऊर्जा की यह कंपनी विदेशी इक्विटी साझेदारी ढूंढ़ रही है। साथ ही कंपनी हरित हाइड्रोजन व अमोनिया खरीदने वाले विदेशी खरीदार को भी तलाश रही है। एसीएमई समूह के मुख्य परिचालन अधिकारी संदीप कश्यप ने कहा, ‘हम आने वाले सात सालों में इन तीन परियोजनाओं में 15 खरब रुपये निवेश करने की योजना बना रहे हैं। हमें उम्मीद है कि साल 2024 में तमिलनाडु की इकाई  का पहला चरण कार्य करना शुरू कर देगा।’ नवीकरणीय ऊर्जा की एक अन्य प्रमुख दिग्गज रिन्यू पॉवर ने हाल में मिस्र में हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए आठ अरब डॉलर के निवेश का मिस्र की सरकार से समझौता किया है।
इस क्षेत्र के तेजी से बढ़ने की संभावना है और बाजार तय होने के बाद ही मूल्य प्रतिस्पर्धी होंगे। हिंदुजा रिन्यूएबल्स के सीईओ पांडेय ने कहा, ‘कारोबार बढ़ाने के लिए सरकार की मदद की जरूरत है। सम्मिश्रण के लक्ष्य निर्धारित करने, वित्त पोषण की संभावना में अंतर और तेजी से मांग बढ़ने पर इसके दाम कम हो सकते हैं। ‘ देश में हरित हाइड्रोजन की कीमत तकरीबन 55 रुपये किलोग्राम है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय हरित हाइड्रोजन के लिए विनिर्माण निविदाएं मंगाने के लिए मानक बोली दस्तावेज (एसबीडी) का मसौदा तैयार कर रहा है। मंत्रालय को सालाना 400 करोड़ टन का उत्पादन होने की उम्मीद है और वह इसे आगे बढ़ाने के लिए रसायन मंत्रालय से विचार-विमर्श कर रहा है।
सरकार ने इस साल फरवरी में हरित हाइड्रोजन नीति घोषित की थी। इन नीति का हिस्सा मानक बोली का दस्तावेज है। इसमें कई उद्योगों के लिए हरित हाइड्रोजन की खरीदारी करने को अनिवार्य किया गया है और उन्हें प्रोत्साहन के तौर पर इसकी आसानी से उपलब्धता व ट्रांसमिशन शुल्कों में छूट की रियायतें दी जाएंगी। मंत्रालय हरित हाइड्रोजन की खरीद के लिए ‘डिमांड एग्रीगेटर टेंडर’ की पेशकश करना चाहता है। भारत का 
उद्योग जगत ने अच्छी नीति बनने की आस में अपनी तैयारी शुरू कर दी है।

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First Published - August 31, 2022 | 10:59 PM IST

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