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क्रिप्टो खरीदारों के लिए पैन होगा जरूरी

Last Updated- December 11, 2022 | 5:03 PM IST

आयकर विभाग शेयर बाजार के लेनदेन के लिए डीमैट खाते वाले नियमों के अनुरूप क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों के वास्ते स्थायी खाता संख्या (पैन) अनिवार्य कर सकता है। इस चर्चा की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

फिलहाल क्रिप्टो परिसंप​त्ति और उससे संबंधित लाभ का खुलासा करना स्वैच्छिक है। अगर कर अ​धिकारी पैन की अनिवार्यता की दिशा में कदम उठाते हैं, तो क्रिप्टो एक्सचेंजों को आयकर विभाग के समक्ष वित्तीय लेनदेन का विवरण (एसएफटी) पेश करना होगा।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा ‘विभाग चाहता है कि क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार से होने वाली आमदनी आयकर जमा करने के उद्देश्य से करदाताओं के वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) में नजर आए।’ अ​धिकारी ने कहा कि इसलिए कर विभाग क्रिप्टो एक्सचेंजों को अपने उपयोगकर्ताओं द्वारा किए गए सभी लेनदेन की सूचना देने के लिए कह सकता है। अधिकारी का मानना है कि पैन को अनिवार्य करने से क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों को अपने ग्राहकों को जानने (केवाईसी) की आवश्यकता पूरी करने में मदद मिलेगी और इस वजह ऐसे लेनदेन की बेहतर निगरानी तथा कर चोरी या धन शोधन की किसी भी को​शिश का पता लगाने में मदद मिलेगी।

आकलन वर्ष 2022-23 के लिए आईटीआर दा​खिल करने में क्रिप्टो लेनदेन के विवरण का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के अनुसार अगले आकलन वर्ष से आईटीआर दा​खिल करते समय इस तरह की जानकारी का खुलासा करना होगा।

एकेएम ग्लोबल के प्रबंध साझेदार और अंतरराष्ट्रीय कर प्रमुख अमित माहेश्वरी ने कहा ‘एसएफटी रिटर्न का विचार करदाताओं द्वारा किए गए अ​धिक मूल्य वाले लेनदेन पर निगरानी रखने के लिए आया है। वर्तमान में केवल निर्दिष्ट वर्गों के लोगों के लिए एसएफटी दाखिल करने की जरूरत होती है और क्रिप्टो एक्सचेंज उनमें नहीं आते हैं। अगर इन एक्सचेंजों को एसएफटी रिटर्न दाखिल करना होगा, तो निवेशकों के पैन की जानकारी जरूरी होगी। इससे कर आधार का विस्तार होगा करेगा और क्रिप्टोकरेंसी व्यवस्था में पारदर्शिता को भी बढ़ावा मिलेगा। लेकिन इससे उन पर अनुपालन बोझ बढ़ जाएगा।’

वर्तमान में कर विभाग के अ​धिकारी आभासी डिजिटल परिसंप​त्ति (वीडीए) पर ‘स्रोत पर कर कटौती’ (टीडीएस) के संबंध में नए कानून पर निर्भर रहते हैं। इसमें क्रिप्टो लेनदेन रिकॉर्ड करने के लिए विक्रेता (भारतीय निवासी) को भुगतान की गई राशि की एक प्रतिशत कटौती अनिवार्य है। 1 जुलाई से प्रभावी नई व्यवस्था के अंतर्गत आयकर रिटर्न में लेनदेन का खुलासा करना होगा और दस्तावेजों की व्यवस्था करनी होगी।

First Published - August 5, 2022 | 10:36 AM IST

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