facebookmetapixel
Advertisement
Gold silver price today: अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों से सोना चढ़ा, चांदी भी ₹2033 उछलीCoding Agents का बढ़ता जलवा, क्या अब इंजीनियरों की जरूरत होगी खत्म? Datadog CTO ने बताया AI का असली असरमॉनसून कमजोर पड़ा तो कौन चुकाएगा कर्ज? NBFC के लिए बढ़ा बड़ा जोखिमसरकारी बैंक जुटाएंगे 30 अरब डॉलर! SBI अकेले करेगा 10 अरब डॉलर का इंतजामMSME को अब पैसे के लिए नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार? नया कानून बदलेगा नियमसहकारी समितियों के लिए बदलेंगे नियम! NCDC को मिल सकती हैं नई ताकतेंचीन-पाकिस्तान सीमा के पास Solar-Wind प्रोजेक्ट पर रोक! सरकार ने बनाए नए नियमदवाओं की MRP पर लग सकती है नई लगाम, सरकार जांच रही ट्रेड मार्जिन का फॉर्मूलाIndia Investment: वैश्विक तनाव के बीच भारत में ₹26.75 लाख करोड़ निवेश का ऐलान, 56% पैसा IT और AI सेक्टर मेंSignature Global का बड़ा दांव! Delhi-NCR से बाहर 150 एकड़ तक की जमीन पर नजर, ₹15,000 करोड़ के लॉन्च का प्लान

शेयर चुनने का गणितीय मॉडल

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 4:59 PM IST

क्वांटिटेटिव फंड, जिसके तहत स्टॉक की खरीदारी के लिए जटिल गणितीय तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, का प्रचलन भारत में तेजी से बढ़ता जा रहा है।


 रिलायंस म्युचुअल फंड वह तीसरा फंड हाउस है जिसने इसे अपनाया है।रिलायंस म्युचुअल फंड ने अपने सेंसेक्सनिफ्टी फंड का विलय कर इसे क्वांट फंड में परिवर्तित कर दिया है जिसका नाम रिलायंस क्वांट प्लस फंड है। इस फंड के अंतर्गत एस ऐंड पी सीएनएक्स निफ्टी सूचकांकों के 11-15 स्टॉक वाले प्रत्यक्ष रुप से प्रबंधित पोर्टफोलियो में कम से कम 90 प्रतिशत का निवेश किया जाएगा।


आम तौर पर एक क्वांट फंड के तहत गणितीय मॉडल के आधार पर निवेश किया जाता है जो शेयर-मूल्य की गतिविधियों के जटिल पैटर्न को समझने में फंड प्रबंधकों की मदद करता है। फंड प्रबंधक इसके आधार पर स्टॉक का चुनाव करते हैं।


रिलायंस म्युचुअल फंड ने अपना ही एक मॉडल विकसित किया है जिसके अनुसार यह स्टॉक का चुनाव करेगा। रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विक्रांत गुगलानी कहते हैं, ‘हमारा खुद का एक मॉडल है जो विभिन्न कारकों जैसे मूल्यांकन, आय की धारणा, मूल्य, चाल और शेयरधारकों के मूल्य पर नजर रखता है।


इसके अतिरिक्त हम पोर्टफोलियो में सेक्टर को निफ्टी के सेक्टर वेट (अपवादों के मामले में  यह बीस प्रतिशत अधिक या कम) के समान ही रखना चाहेंगे।’उन्होंने कहा ‘पोर्टफोलियो में निवेश आवश्यक रुप से बराबरी में नहीं किया जाएगा। यह फंड अप्रत्यक्ष रुप से प्रबंधित फंड की तुलना में प्रत्यक्ष रुप से प्रबंधित फंड अधिक होगा और प्रत्येक सप्ताह इसका पुनर्संतुलन किया जाएगा।’


पिछले वर्ष लोटस इंडिया म्युचुअल फंड ने अल्फा जेनरेटेड फ्रॉम इंडस्ट्री लीडर्स (एजाइल) फंड लांच किया था जिसके तहत 11 स्टॉक का चुनाव फंउ हाउस के अपने गणितीय मॉउल के आधार पर किया जाता है। कुल कोष का नौ प्रतिशत का निवेश प्रत्येक स्टॉक में किया जाता है और शेष एक प्रतिशत का निवेश ऋण और मुद्रा बाजार के उपकरणों में किया जाता है।


फंडों को ट्रैक करने वाली कंपनी वैल्यू रिसर्च के मुताबिक नवंबर 2007 में लांच होने के बाद से इस फंड ने 29.9 प्रतिशत का ऋणात्मक प्रतिफल दिया है और लांच होने के वर्ष से अब तक इसने 32.01 प्रतिशत का ऋणात्मक प्रतिफल दिया है जबकि इक्विटी फंडों द्वारा दिया गया औसत ऋणात्मक प्रतिफल 31.88 प्रतिशत का रहा।


लोटस इंडिया म्युचुअल फंड के व्यवसाय विकास और स्ट्रेटजिक इनिशिएटिव के प्रमुख राजीव शास्त्री ने कहा, ‘क्वांट की नीति आम तौर पर तभी काम करेगी जब निवेशक कम से कम एक वर्ष की समयावधि के लिए निवेश करें।’ इस फंड हाउस ने हाल ही में इस फंड का एक टैक्स प्लानिंग वर्जन पेश किया है।


उन्होंने कहा, ‘यह मॉडल वैसे स्टॉक के मामले सर्वश्रेष्ठ काम करता है जहां तरलता अधिक होती है। हम मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक की दुनिया को नजदीक से ट्रैक कर रहे हैं ताकि कुछ और ऐसे उत्पाद लांच कर सकें लेकिन इसके लिए कुछ समय रुकना पड़ेगा क्योंकि वर्तमान में बाजार में तरलता की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।’



हाल ही में बेचमार्क म्युचुअल फंड ने बेंचमार्क इंडिया वैल्यू ऐंड मोमेन्टम क्वांट फंड के लिए सेबी के साथ एक पेशकश दस्तावेज दाखिल किया है। इस फंड के तहत सिटीग्रुप फर्स्ट इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट द्वारा उपलब्ध कराए गए क्वांटिटेटिव स्टॉक सेलेक्शन मॉडल के आधार पर प्रतिभूतियों में निवेश किया जाएगा।


सिटीग्रुप के स्वामित्व वाला यह मॉडल वैसे इक्विटी प्रतिभूतियों की पहचान करता है जिन्हें अवमूल्यित समझा जाता है और जिनमें अर्जन शक्ति अधिक होती है।यह मॉडल एक सांख्यिकिक मूल्यांकन प्रक्रिया का इस्तेमाल करता है जो यह देखता है कि एक समान आकार, वृध्दि और पूंजी के मूल्य संबंधी गुण-धर्मों वाला स्टॉक का बाजार में किस प्रकार मूल्यांकन किया जाता है। इसके साथ-साथ यह मॉडल मूल्य और आय के आकड़ो का मूल्यांकन कर स्टॉक की चाल आंकता है। विचार किए गए स्टॉक्स को यह मॉडल एक मूल्य और चाल ‘स्कोर’ प्रदान करता है।


क्वांटिटेटिव मॉडल नकारात्मक खबरों के प्रवाह पर ध्यान नहीं देता है लेकिन यह नकारात्मक खबर से बाजार पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रतिक्रिया दिखाता है।क्वांटिटेटिव तकनीक 1970 की शुरूआत में उभर कर आया और इसने वर्ष 1971 में इंडेक्स फंड को जन्म दिया जब वेल्स फारगो ने एक म्युचुअल फंड लांच किया था जो न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के 1,500 शेयरों को ट्रैक किया था।


जैसे-जैसे कंप्यूटरों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ती जा रही है और शेयर बाजार के क्षेत्र में भौतिकविद और गणितज्ञों की संख्या बढ़ती जा रही है, मुद्रा प्रबंधक ज्यादा बेहतर सेवाएं देने लगे हैं साथ ही संस्थागत निवेशकों ने क्वांटिटेटिव प्रबंधन के लाभों के कारण इसे अपनाना शुरू कर दिया है। 

Advertisement
First Published - March 24, 2008 | 11:06 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement