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एशिया के मजबूत उभरते बाजारों में से एक है भारत

Last Updated- December 12, 2022 | 3:58 AM IST

बीएस बातचीत
आलियांज इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट की सिंगापुर स्थित मुख्य कार्याधिकारी एवं मुख्य सूचना अधिकारी रितु अरोड़ा ने पुनीत वाधवा के साथ एक साक्षात्कार में बताया कि भारत के लिए तेजी-केंद्रित कारक आर्थिक वृद्घि में मजबूत वृद्घि से जुड़ा हो सकता है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
सूचकांक नई ऊंचाइयों पर हैं। ऐसे में निवेशक भारत को निवेश बाजार के तौर पर किस नजरिये से देख रहे हैं?
निवेशक लारत को लगातार मजबूत वृद्घि वाले देश के तौर पर देख रहे हैं और इसलिए उसके शेयर सूचकांकों पर ताजा स्वास्थ्य संकट का सीमित प्रभाव पड़ा है। हम मान रहे हैं कि कोविड प्रभाव अगली कुछ तिमाहियों तक रहेगा, जबकि अर्थव्यवस्था दीर्घावधि के दौरान काफी हद तक इस प्रभाव से बची रहेगी। भारत के लिए तेजी-केंद्रित बदलाव आर्थिक वृद्घि में मजबूत सुधार पर केंद्रित हो सकता है और इसे उपभोक्ता मांग और ऋण मांग में तेजी से मदद मिली सकती है। भारत अनुकूल जनसांख्यिकी, दीर्घावधि वृद्घि परिदृश्य, और अच्छी गुणवत्ता की कंपनियों जैसे कुछ खास कारकों की वजह से एफआईआई/एफपीआई के लिए एक मजबूत निवेश स्थान बना रह सकता है।

भारत के अलावा, कौन से अन्य एशियाई बाजार निवेश के लिहाज से अनुकूल हैं?
भारत एशियाई उभरते बाजारों (ईएम) में मजबूत बारों में से बना हुआ है। एशिया में प्रमुख ईएम क्षेत्र में हम चीन को पसंद कर रहे हैं। इसका कोविड-19 नियंत्रण के संदर्भ में शानदार रिकॉर्ड रहा है, अर्थव्यवस्था काफी मजबूत बनी हुई है और नीति निर्माण भी सामान्य बना हुआ है। चूंकि चीन ने अपने वित्तीय बाजार जल्द खोल दिए, इसलिए उन बाजारों के लिए प्रवाह काफी मजबूत बना रहेगा। वियतनाम भी एशिया में मजबूत बाजारों में से एक है। हम चीन-केंद्रित आपूर्ति शृंखलाओं के साथ बड़ा व्यवसाय चीन + 1 या चीन + 2 मॉडलों की ओर आकर्षित होते देख रहे हैं। एशिया में हम, वियतनाम को आपूर्ति शृंखलाओं के इस विविधीकरण के मुख्य लाभार्थी के तौर पर देख रहे हैं।

आप बाजार मूल्यांकन पर चिंतित नहीं हैं?
भारतीय इक्विटी बाजार मूल्यांकन के नजरिये से महंगे दिख रहे हैं, और इसलिए हमारा मानना है कि हेडलाइन के आधार पर बाजारों के लिए लंबे समय तक नई ऊंचाइयों पर बने रहना मुश्किल हो सकता है। लेकिन निश्चित तौर पर क्षेत्र-केंद्रित संभावनाएं हैं और इनमें हम अवसर देख रहे हैं। वित्त, आईटी, जिंस, पूंजीगत वस्तु, और लॉजिस्टिक के नेतृत्व में कारोबार में सुधार पर नजर रखे जाने की जरूरत है।
भारतीय संदर्भ में निवेश लायक क्षेत्र?
वित्त, आईटी, जिंस, लॉजिस्टिक, और पूंजीगत वस्तु अच्छे निवेश अवसर हो सकते हैं। इन क्षेत्रों के अलावा, रिकवरी में सुधार के साथ उद्योग/निर्माण क्षेत्र की लोकप्रियता भी बढऩी शुरू हो जाएगी। कोविड-19 से पहले ही प्रभावित हो चुके क्षेत्रों में, आपको बॉटम-अप निवेश नजरिया अपनाना होगा। आपको कोविड-19 से पैदा हुईं चुनौतियों के संदर्भ में बैलेंस शीट की मजबूत पर ध्यान देना होगा।

क्या आप मानते हैं कि भारत में नीति-निर्माता अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वित्त वर्ष 2022 में और राहत उपाय करेंगे?
यह अपरिहार्य है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने के लिए ज्यादा वित्तीय उपायों की जरूरत होगी। लेकिन इस संबंध में सीमा होगी कि भारतीय सरकार कितनी मदद प्रदान कर सकती है। हालात को ध्यान में रखते हुए समाधान तैयार करने की जरूरत होगी। भारत को फिर से बचत को प्रोत्साहन देने की जरूरत होगी, क्योंकि अर्थव्यवस्था में बचत दर काफी गिर गई है। इनविट, रीट्स आदि के जरिये घरेलू बचत और निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत होगी।

क्या बाजार किसी तरह के प्रभाव को दूर करने में सक्षम होंगे?
कोविड-19 के आर्थिक प्रभाव कम करने के लिए अनुकूल वित्तीय नीति अपेक्षित है और इस पर विभिन्न स्वरूपों में सभी सरकारों द्वारा जोर दिया जा रहा है। हालांकि यह मौद्रिक नीति क्षेत्र है जिसमें उभरते बाजारों को बढ़ती मुद्रास्पुीति उम्मीदों के बीच चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि मुद्रास्फीति वाकई अनियंत्रित रहती है तो केंद्रीय बैंकों के लिए नीति निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण रह सकता है। ये केंद्रीय बैंक असंभव विकल्पों, दरें बढ़ाने के लिए बाध्य होंगे। इस वजह से सुधार की राह अनिश्चित रह सकती है।

क्या आपका मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व उम्मीद के मुकाबले जल्द तरलता राहत में नरमी लाना शुरू करेगा?
अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रोत्साहित करने के लिए पर्याप्त वैश्विक तरलता है। जैसे जैसे कोविड-19 संकट गहराता गया, अमेरिकी फेडरल ने दरें घटाने और बॉन्डों की खरीदारी जैसे उपाय पेश किए।
 

First Published - June 6, 2021 | 8:32 PM IST

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