facebookmetapixel
Advertisement
परिवार से जुड़ी संस्थाओं के 61.78% वोट से सुभाष चंद्रा की दिवाला योजना मंजूर: असहमत कर्जदाताइस हफ्ते लॉन्च होंगे 3 नए म्युचुअल फंड, ₹100 से रियल एस्टेट और सेक्टर लीडर्स कंपनियों में निवेश का मौकाभारत-उज्बेकिस्तान ने बढ़ाई दोस्ती, 2030 तक 5 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य; यूरेनियम सप्लाई पर भी सहमतिIPO मार्केट में मचेगी हलचल! इस हफ्ते 7 नए इश्यू, ₹1,264 करोड़ से ज्यादा जुटाएंगी मेनबोर्ड कंपनियांGold-Silver Outlook: सितंबर में सोने-चांदी में बढ़ेगा उतार-चढ़ाव, इन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजरएचडीएफसी बैंक: कैजाद भरूचा बन सकते हैं अगले सीईओ, बाहरी उम्मीदवार की भी तलाशसोने की कीमतों में उछाल: अभी निवेश करें, मुनाफा वसूलें या पोर्टफोलियो रीबैलेंस करें?SIP निवेश का बदला ट्रेंड: 5 साल में मिड कैप बना नंबर-1, लार्ज कैप चौथे स्थान पर खिसका; क्या बदलें पोर्टफोलियो?GDP डेटा, कच्चे तेल की कीमत से लेकर फेड पॉलिसी तक, ये फैक्टर्स तय करेंगे इस हफ्ते शेयर बाजार की चालFPI की खरीदारी से भारतीय बाजार को मिला सहारा, अगस्त में विदेशी निवेशकों ने लगाए कुल ₹30,919 करोड़

आईबीबीआई ने रखा आपस में जुड़ी इकाइयों के लिए समन्वित दिवालिया समाधान का प्रस्ताव

Advertisement

साल 2019 में भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई में बैंकों के एक समूह ने एनसीएलटी के मुंबई पीठ से वीडियोकॉन समूह की 15 कंपनियों को काफी हद तक संयुक्त करने की अनुमति मांगी थी।

Last Updated- February 05, 2025 | 10:21 PM IST
IBBI

भारतीय ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया बोर्ड (आईबीबीआई) ने एक चर्चा पत्र में आईबीसी नियमनों में संशोधनों के लिए कहा है। इनमें दिवालियापन के तहत समूची कंपनी और उसके विशिष्ट कारोबारों या परिसंपत्तियों दोनों ही स्थितियों के लिए एक साथ समाधान योजनाओं को आमंत्रित करने की अनुमति देना शामिल है।

नियामक ने कहा, ‘इस प्रस्ताव से यह जररूत खत्म हो जाएगी कि समाधान पेशेवर किसी परिसंपत्ति से जुड़ी योजनाओं की मांग केवल तभी कर सकते हैं, जब समूचे कॉरपोरेट देनदार के लिए समाधान योजनाओं को आमंत्रित करने के प्रयास विफल हो गए हों।’

आईबीबीआई ने कहा है कि मौजूदा आईबीसी प्रक्रिया हरेक इकाई को स्वतंत्र इकाई के रूप में मानती है और आधुनिक कारोबारी तंत्र में आम तौर पर मौजूद परस्पर निर्भरता के जटिल जाल को नजरअंदाज कर देती है। उसने कहा कि रियल एस्टेट, बिजली उत्पादन आदि जैसे क्षेत्रों में परस्पर जुड़े संचालन और वित्त के साथ जटिल कॉरपोरेट संरचनाओं के बढ़ते प्रचलन ने दिवालिया समाधान के लिए और बारीकी से विभिन्न पहलुओं की जररूत जताई है।

किंग स्टब ऐंड कासिवा, एडवोकेट्स ऐंड अटॉर्नीज में पार्टनर सुकृत कपूर ने कहा, ‘आपस में जुड़ी इकाइयों के सीआईआरपी के समन्वय के लिए विनियमित तंत्र की शुरूआत समूह दिवालियापन ढांचे की ओर बहुप्रतीक्षित लेकिन देर से उठाया गया कदम है। इस संशोधन के, अगर आगे बढ़ता है, बाद समूह की ऐसी इकाइयों के लिए एकल समाधान पेशेवर ही होगा और भारतीय संकटग्रस्त परिसंपत्ति बाजार में परिसंपत्तियों के संयुक्त अधिग्रहण को सक्षम करेगा।’

वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड और श्रेय इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस लिमिटेड जैसे हाल के दिवालिया मामलों ने आपस में जुड़ी इकाइयों के मामले में अधिक परिष्कृत दृष्टिकोण की आवश्यकता बताई है। आईबीबीआई ने कहा कि मौजूदा ढांचा कॉरपोरेट समूहों के भीतर तालमेल और पारस्परिक निर्भरता का लाभ उठाने का महत्त्वपूर्ण अवसर है।

साल 2019 में भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई में बैंकों के एक समूह ने एनसीएलटी के मुंबई पीठ से वीडियोकॉन समूह की 15 कंपनियों को काफी हद तक संयुक्त करने की अनुमति मांगी थी। एनसीएलटी ने माना कि हालांकि ऐसा कोई एकल पैमाना नहीं है जिसके आधार पर संयुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी या नहीं दी जा सकती है, लेकिन कुछ ऐसे नियंत्रण और मापदंड हैं जिन्हें लागू किया जा सकता है।

Advertisement
First Published - February 5, 2025 | 10:11 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement