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कोरोना: माता-पिता के लिए भी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदें

Last Updated- December 15, 2022 | 3:06 AM IST

कोविड-19 ने इस लिहाज से आंखें खोल दी हैं कि व्यक्ति के स्वास्थ्य को लेकर कितना अधिक जोखिम है। अब बहुत से लोग यह महसूस कर रहे हैं कि उनके पास चिकित्सा आपात स्थितियों के लिए पर्याप्त बीमा नहीं है, इसलिए अब बहुत से लोग स्वास्थ्य योजनाएं खरीदने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं।  स्टार हेल्थ ऐंड अलाइड इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एस पी प्रकाश ने कहा, ‘इस सीजन में अपनी उम्र के 30 के दशक से लेकर 65 साल से अधिक उम्र तक के लोग पॉलिसी खरीद रहे हैं। आम तौर पर इन दो श्रेणियों में बीमा खरीदना लोकप्रिय नहीं है।’ जिन लोगों की नौकरियां चली गई हैं या उन्हें नौकरी जाने का डर है, वे न केवल खुद के लिए बल्कि अपने माता-पिता के लिए भी कोविड और अन्य बीमारियों का कवर खरीदना चाहते हैं।
सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और फिनविन फाइनैंशियल प्लानर्स के संस्थापक मेलविन जोसेफ ने कहा, ‘जो लोग अपनी उम्र के 20 और 30 के दशक में हैं, वे यह मानते हैं कि वे 60 साल के होने के तक काम करेंगे। परिजन बूढ़े हैं, इसलिए केवल अगले 10-15 साल जिएंगे और कॉरपोरेट कवर पर्याप्त से अधिक है। वे बड़ी भूल कर रहे हैं।’ नौकरियां जाने और आगे नौकरियां जाने की आशंकाओं के कारण स्वास्थ्य बीमा खरीदना तात्कालिक जरूरत बन गया है।

बीमा या कोष
बुजुर्ग लोगों की तुलना में गैर-वरिष्ठ नागरिकों के लिए बीमा पॉलिसी खरीदना काफी आसान है। विशेषज्ञ निश्चित रूप से अपने माता-पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदने का सुझाव देते हैं। अगर उन्हें स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी नहीं मिल सकती है, तभी आपको कोष पर निर्भर होना चाहिए। जोसेफ कहते हैं, ‘ऐसे मामले में आपको किसी लिक्विड फंड में पैसा अलग से रखने की जरूरत है। परिवार का हरेक अन्य व्यक्ति जो स्वास्थ्य बीमा ले सकता है, उसे वह लेना चाहिए। इसलिए चिकित्सा कोष केवल उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए ही रखना चाहिए, जिन्हें बीमा नहीं मिल सकता है।’
बाजार में ऐसी बहुत सी व्यापक बीमा योजनाएं हैं, जिन्हें वरिष्ठ नागरिकों के लिए खरीदा जा सकता है। कुछ बीमा कंपनियां वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष पॉलिसी मुहैया कराती हैं। ये आपकी नियमित पॉलिसी से अलग होती हैं। ये पॉलिसी 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को मुहैया कराई जाती हैं, इसलिए वरिष्ठ नागरिक पॉलिसी नियमित पॉलिसी की तुलना में काफी अधिक महंगी होती है। इसकी वजह यह है कि बीमा कंपनी उम्र के जोखिम को ध्यान में रखते हुए ज्यादा प्रीमियम वसूलती है। कुछ खास पॉलिसी को खरीदने के लिए स्वास्थ्य जांच भी जरूरी नहीं हैं। इनमें अड़चन यह है कि इन विशेष पॉलिसी में सह-भुगतान अधिक हो सकता है और कुछ में हर बीमारी के लिए बीमित राशि की अधिकतम सीमा तय होती है। इसलिए नियमित कवर लेने की संभावना तलाशें। फिनविन फाइनैंशियल प्लानर्स के जोसेफ कहते हैं, ‘अगर वे स्वस्थ हैं तो सामान्य पॉलिसी खरीदें। लेकिन अगर उन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या है तो उन्हें केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष पॉलिसी के बारे में सोचना पड़ेगा।’ माता और पिता के लिए अलग-अलग पॉलिसी खरीदना बेहतर है।’
आपको यह देखने के लिए कुछ नियमित और कुछ खास पॉलिसी की जांच-पड़ताल करनी होगी कि कौनसी आपकी जरूरत पूरी करती है। किसी व्यक्ति के लिए उपयुक्त पॉलिसी के दूसरे व्यक्ति के लिए उपयुक्त न होने के भी आसार होते हैं। एक रणनीति परिभाषित लाभ गंभीर बीमारी पॉलिसी खरीदने के बारे में विचार करना है। इनमें सूचीबद्ध बीमारी पाए जाने पर एकमुश्त राशि दी जाती है। यह किसी सह-भुगतान अनुपात या बीमारी के हिसाब से अधिकतम बीमित राशि की सीमा का पूरक बनेगी।
सीधे शब्दों में कहें तो सह-भुगतान राशि दावा योग्य अस्पताल बिल का वह प्रतिशत है, जिसका भुगतान आपको करना होगा। सह-भुगतान जितना अधिक होगा, आपको अपनी जेब से उतनी अधिक धनराशि खर्च करनी होगी। पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के मुख्य कार्याधिकारी नवल गोयल ने कहा, ‘आम तौर पर वरिष्ठ नागरिक पॉलिसी में सह-भुगतान का प्रावधान होता है क्योंकि एक निश्चित उम्र के बाद दावे के ज्यादा आसार होते हैं। साथ ही, सह-भुगतान वाली पॉलिसी में आम तौर पर प्रीमियम कम होता है।’ वरिष्ठ नागरिक पॉलिसी में सह-भुगतान का प्रतिशत 10 से 30 फीसदी होता है। अगर आप प्रीमियम कम रखना चाहते हैं तो ऐसी पॉलिसी चुनें, जिनमें सह-भुगतान की राशि तर्कसंगत है।
यह बीमा कंपनी द्वारा कुल दावों में से ग्राहकों को दावों के भुगतान की संख्या का अनुपात है। आपको उन बीमा कंपनियों से स्वास्थ्य बीमा खरीदना चाहिए, जिनका दावों के निपटान का अनुपात 90 फीसदी से अधिक है। आप यह सूचना बीमा कंपनियों की वेबसाइटों से हासिल कर सकते हैं।
यह जांच का अहम मापदंड है। अगर आपके परिजन फिलहाल किसी बीमारी से पीडि़त हैं तो पॉलिसी में उसे पूरी तरह बाहर रखा जा सकता है या एक वेटिंग पीरियड के बाद कवर किया जा सकता है। आम तौर पर वेटिंग पीरियड दो से चार साल के बीच होता है। पॉलिसी में कुछ ऐसी बीमारियों के नाम दिए होते हैं, जो दो साल के वेटिंग पीरियड के बाद ही कवर होती हैं। उदाहरण के लिए हर्निया, मोतियाबिंद, साइनसाइटिस जैसी समस्याओं को कवर किया जा सकता है। प्रकाश कहते हैं, ‘ऐसी पॉलिसी तलाशें, जिसमें वेटिंग पीरियड कम हो। कम से कम वेटिंग पीरियड बेहतर है।’ हालांकि बहुत सी बीमा कंपनियों ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए वेटिंग पीरियड घटाकर एक साल तक कर दिया है।
हरेक बीमा कंपनी कुछ शारीरिक समस्याओं को बीमा कवर में शामिल नहीं करती हैं। इन्हें समझने के लिए पॉलिसी के बारीक ब्योरों को ठीक से पढ़ें। गोयल कहते हैं, ‘ऐसी पॉलिसी लेने के बारे में विचार करें, जिनमें आपको कैशलेस सुविधा मिलती है और जिसके नेटवर्क में शामिल कोई अस्पताल आपके घर के पास हो।’

कोविड कवर
ऐसा स्वास्थ्य बीमा न लें, जिसमें केवल कोविड ही कवर है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के प्रमुख (अंडरराइटिंग और दावे) संजय दत्ता ने कहा, ‘ऐसा बीमा लें, जिसमें अन्य बीमारियां भी कवर हों। केवल उसी स्थिति में इस समय कोविड कवर खरीदें, जब आप सर्व-समावेशी स्वास्थ्य पॉलिसी खरीदने में सक्षम नहीं हैं। कई बार वरिष्ठ लोग पहले से मौजूद बीमारी के कारण बीमा नहीं खरीद पाते हैं। ऐसे मामले में कोविड कवर की अनदेखी न करें, जिसे खरीदना आसान है।’

सुपर टॉप-अप
अगर आपके माता-पिता कार्यालय बीमा में कवर हैं और आप अन्य पॉलिसी नहीं खरीद सकते हैं तो क्या आप टॉप-अप या सुपर टॉप-अप के बारे में विचार कर सकते हैं? कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए टॉप-अप और सुपर टॉप-अप अच्छा विचार है, मगर अन्य इससे सहमत नहीं हैं। रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस में निदेशक एवं प्रमुख (खुदरा कारोबार) अजय शाह कहते हैं, ‘आम तौर पर टॉप-अप और सुपर टॉप-अप अच्छे होते हैं, लेकिन उस फैसले का आधार खरीद सकने में सक्षमता नहीं होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति अब स्वास्थ्य बीमा खरीद सकता है, लेकिन नहीं खरीदता है। ऐसे में अगर भविष्य में कोई स्वास्थ्य समस्या पैदा होती है तो बड़ी मुसीबत आएगी। ऐसे में सबसे पहले बेस कवर खरीदें।’
प्रकाश कहते हैं, ‘हम आवेदन स्वीकार करने से पहले जांच नहीं करते हैं। आपको स्व-घोषणापत्र प्रस्ताव फॉर्म भरना होता है। अगर आप अपनी शारीरिक समस्याओं को छिपाते हैं तो बाद में दावे के समय आपका अनुभव अच्छा नहीं रहेगा।’ हमेशा अपनी बीमा कंपनी से पुरानी या मौजूदा शारीरिक दिक्कतों को छिपाने से बचें।

 

First Published - August 23, 2020 | 11:15 PM IST

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