facebookmetapixel
Advertisement
सोने पर 15% ड्यूटी से क्या घटेगा भारत का ट्रेड डेफिसिट? जानिए क्यों इतना आसान नहीं है यह गणिततेल संकट के बीच सरकार का बड़ा दावा! 4 साल से नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दामMSCI Index में बड़ा फेरबदल! Adani Energy और MCX की एंट्री, RVNL बाहरAirtel Q4 Results: मुनाफे में 33.5% की भारी गिरावट, ₹7,325 करोड़ पर आया नेट प्रॉफिटDA Hike: सरकार का बड़ा तोहफा! रेलवे कर्मचारियों और पेंशनर्स का DA बढ़ा, सैलरी में होगा सीधा असरस्मार्ट लाइटिंग से चमकेगा भारत! 2031 तक 24 अरब डॉलर पार करेगा स्मार्ट होम मार्केटकैबिनेट का बड़ा फैसला, नागपुर एयरपोर्ट बनेगा वर्ल्ड क्लास हब; यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएंKharif MSP 2026: खरीफ फसलों की MSP में इजाफा, धान का समर्थन मूल्य ₹72 बढ़ाFMCG कंपनियों में निवेश का मौका, DSP म्युचुअल फंड के नए ETF की पूरी डीटेलUS-Iran War: चीन यात्रा से पहले ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- ‘डील करो वरना तबाही तय’

NBFC के लिए बेहतर परिदृश्य

Advertisement

वाणिज्यिक बैंकों की तुलना में उनके फंड की लागत अधिक होती है तथा ऋण देने के उनके तरीके कुल मिलाकर जोखिम भरे होते हैं

Last Updated- December 30, 2022 | 10:44 PM IST
Lending from banks to NBFCs slowed down, service and vehicle loans also affected बैंकों से एनबीएफसी को ऋण हुआ सुस्त, सेवा और वाहन ऋण पर भी असर
BS

बढ़ती ब्याज दरें और कम तरलता से हालांकि वित्तीय क्षेत्र के लिए नकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन बढ़ती आर्थिक गतिविधि ऋणदाताओं के लिए अधिक कारोबारी वाली साबित हो सकती है। कैलेंडर वर्ष 2022 ­के दौरान बैंकिंग प्रणाली में तरलता आठ लाख करोड़ रुपये के अधिशेष से 33,000 करोड़ रुपये के घाटे में चली गई है। नवंबर के अंत तक बैंक क्रेडिट में सालाना आधार पर 17.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। नीतिगत दरों में 225 आधार अंक (बीपीएस) तक का इजाफा हुआ है।

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों या NBFC पर क्या असर पड़ा है? वाणिज्यिक बैंकों की तुलना में उनके फंड की लागत अधिक होती है तथा ऋण देने के उनके तरीके कुल मिलाकर जोखिम भरे होते हैं।

अलबत्ता एनबीएफसी के बैंक क्रेडिट में मजबूत रुझान नजर आ रहा है और एनबीएफसी की तरलता की परिस्थिति सहज बनी हुई है। अक्टूबर तक एनबीएफसी का बैंक ऋण अब तक 16 प्रतिशत (मासिक आधार पर 7 प्रतिशत) तक अधिक रहा है। इसके अलावा शीर्ष स्तर वाली एनबीएफसी हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये तक के बॉन्ड जारी करने में सक्षम रही हैं।

यह भी पढ़ें: साल 2023 में देसी फर्में सार्वजनिक निर्गम से जुटाएंगी रकम : बैंकर

इसलिए अगर ऋण मांग बढ़ती है, तो एनबीएफसी के पास नकदी की कमी होने की आशंका नहीं है। एनबीएफसी के एए और एएए बॉन्ड के लिए जी-सेक दरों के ऊपर का दायरा लगभग 50 से 60 बीपीएस पर काफी कम है। इस तरह राजस्व वृद्धि एनआईएम (शुद्ध ब्याज मार्जिन) दबाव से अधिक होना चाहिए। वाहन वित्त और गिरवी रखकर ऋण देने वाले दो ऐसे प्रमुख बाजार हैं, जिनका एनबीएफसी के कुल ऋण में क्रमशः लगभग 28 प्रतिशत और 40 प्रतिशत योगदान रहता है।

वाणिज्यिक वाहन की गिरवी वाले एक प्रमुख बाजार में प्रतिस्थापन खरीद; खनन, बुनियादी ढांचे और ई-कॉमर्स की गतिविधियों में वृद्धि, कारोबार बढ़ने और माल ढुलाई दरों के स्थिर होने के कारण मजबूत वृद्धि देखी गई है। जहां ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, वहीं वे स्थिर होने के संकेत भी दे रही हैं। वाणिज्यिक वाहनों के चक्र में और तेजी आने से मांग में और इजाफा होना चाहिए।

Advertisement
First Published - December 30, 2022 | 10:44 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement