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RBI फिर करेगा रीपो रेट में कटौती? महंगाई में गिरावट से राहत, अप्रैल में हो सकता है फैसला

खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी 2025 में घटकर 3.61 फीसदी रही जो सात महीने में सबसे कम है। जनवरी में यह 4.31 फीसदी थी।

Last Updated- March 30, 2025 | 10:19 PM IST
Reserve Bank of India

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 6 सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति अगली बैठक में लगातार दूसरी बार रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती कर सकती है। समिति की बैठक 7 से 9 अप्रैल को होगी। बिज़नेस स्टैंडर्ड के सर्वेक्षण में शामिल सभी 10 प्रतिभागियों ने यह राय जाहिर की है। आरबीआई 9 अप्रैल को बैठक के नतीजों की घोषणा करेगा। खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी 2025 में घटकर 3.61 फीसदी रही जो सात महीने में सबसे कम है। जनवरी में यह 4.31 फीसदी थी। खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव कम हुआ, जिससे नीतिगत दर घटने की उम्मीद बढ़ गई है।

बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च में भारत और आसियान के इकनॉमिक रिसर्च प्रमुख राहुल बाजोरिया ने कहा, ‘वृद्धि और मुद्रास्फीति की स्थिति को देखते हुए मौद्रिक नीति में और नरमी की राह स्पष्ट प्रतीत होती है।’

दिलचस्प है कि खुदरा मुद्रास्फीति के कई महीनों तक 4 फीसदी से ऊपर जाने की आशंका नहीं है, जिससे वृद्धि को गति देने के लिए दरों में और अधिक कटौती की उम्मीद बढ़ गई है।

भारतीय स्टेट बैंक समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष के अनुसार खुदरा मुद्रास्फीति के कई महीनों संभवतः चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही तक 4 फीसदी से नीचे रहने की संभावना है।

बाजोरिया ने कहा, ‘मुख्य मुद्रास्फीति के अगले कुछ महीनों में 4 फीसदी से नीचे रहने की संभावना है और विनिमय दर पर दबाव भी कम हो रहा है।’

मौद्रिक नीति समिति ने लगातार 11 बैठकों तक रीपो दर को अपरिवर्तित रखने के बाद फरवरी की समीक्षा बैठक में इसमें 25 आधार अंक की कटौती की थी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘केंद्रीय बैंक के नजरिये से मुद्रास्फीति लगातार 4 फीसदी के लक्ष्य की दिशा में है और इसके बढ़ने का कोई तत्काल दबाव नहीं है। इससे ब्याज दर को कम करके अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की गुंजाइश है।’ सर्वेक्षण में शामिल कुछ प्रतिभागियों ने कहा कि आरबीआई का रुख बदलकर समायोजन वाला हो सकता है मगर ज्यादातर का मानना है कि वैश्विक वित्तीय बाजार में उथल पुथल को देखते हुए तटस्थ रुख सही है।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘अस्थिर वैश्विक वित्तीय हालात को देखते हुए तटस्थ रुख उचित बना हुआ है। हमें उम्मीद है कि 2025 में ब्याज दरों में ज्यादा कटौती नहीं होगी इसलिए तटस्थ रुख बनाए रखना उचित होगा।’ मौद्रिक नीति समिति ने अक्टूबर में अपना रुख बदलकर तटस्थ कर लिया था।

First Published - March 30, 2025 | 10:19 PM IST

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