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एफडी खुलवाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

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Last Updated- December 11, 2022 | 4:37 PM IST

 रीपो रेट में लगातार जारी बढ़ोतरी के बीच इस बात की संभावना बढ गई है कि बैंक आने वाले दिनों में जमा दरों को और बढा सकते हैं। पिछले एक दो महीने में बैंकों ने जमा दरों में बढोतरी की भी है जिसकी वजह से लोगों का रुझान फिर से फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की तरफ बढा है। वैसे भी बैंक एफडी निवेश के के सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक है। ऐसे में अगर आप भी एफडी कराने जा रहे हैं तो उससे पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
 
बैंकों का चयन
विभिन्न बैंकों के ब्याज दरों की तुलना करें। अगर कोई बैंक समान अवधि की एफडी पर ज्यादा ब्याज दे रहा हो तो उसे वरीयता दें। लेकिन यहां भी एक बात का ध्यान रखें। बड़े सरकारी व निजी बैंकों की तुलना में नए, स्मॉल फाइनैंस और विदेशी बैंक ज्यादा ब्याज देते हैं। फिर भी बेहतर होगा कि किसी बड़े सरकारी व निजी बैंक में ही एफडी करें, ये ज्यादा सुरक्षित हैं। नए, स्माल फाइनेंस और विदेशी बैंकों में भी 5 लाख रुपये तक की एफडी की जा सकती है क्योंकि अब किसी एक बैंक में जमा अधिकतम 5 लाख रुपये की राशि पर बीमा कवर (डिपॉजिट इंश्योरेंस ऐंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन एक्ट 1961 की धारा 16 (1) के तहत ) मिलता है। 4 फरवरी 2020 से पहले एक लाख रुपये तक की जमा राशि पर ही इंश्योरेंस कवर मिलता था।
 
क्युमुलेटिव या नॉन क्युमुलेटिव
एफडी दो तरह से की जाती है- क्युमुलेटिव या नॉन क्यूमुलेटिव। नॉन क्युमुलेटिव एफडी में हर महीने, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर ब्याज पाने का विकल्प होता है। जबकि क्युमुलेटिव एफडी में ब्याज मैच्योरिटी के बाद प्रिंसिपल अमाउंट के साथ मिलता है। अगर आप हर महीने, तिमाही या छमाही ब्याज लेते हैं तो ब्याज की कंपाउंडिंग नहीं होगी जबकि मैच्योरिटी के बाद प्रिंसिपल अमाउंट के साथ ब्याज लेने पर ब्याज की कंपाउंडिंग का फायदा होगा और आपको ज्यादा रिटर्न मिलेगा। इसे एक उदाहरण के जरिए समझा जा सकता है। मान लीजिए एक लाख रुपये एक साल के लिए एफडी किया गया है। इस पर 7 फीसदी ब्याज मिलता है। क्युमुलेटिव (तिमाही कंपाउंडिंग) आधार पर ब्याज मिलने पर साल भर बाद कुल राशि 1,0,7185.90 रुपये मिलेगी, जबकि नॉन क्युमुलेटिव आधार पर ब्याज मिलने पर राशि 1,0,7000 रुपये होगी।
 
टीडीएस
अगर आपकी सालाना आय पर टैक्स देनदारी नहीं बनती है, तो एफडी करने के तुरंत बाद फॉर्म 15जी या 15एच भरकर बैंक को दें। 60 साल से कम उम्र के लोगों को फॉर्म 15जी जबकि 60 साल से ज्यादा उम्र वालों को 15एच भरना होता है। बैंक में यह फॉर्म जमा करने पर आपका बैंक एफडी पर टीडीएस नहीं काटेगा। लेकिन अगर आप ये फॉर्म नहीं देंगे तो आपको 40 हजार (सीनियर सिटीजन के मामले में 50 हजार) रुपए से ज्यादा के ब्याज पर टीडीएस देना होगा। अगर अकाउंट के साथ पैन दिया हुआ है तब तो ब्याज पर 10 फीसदी टीडीएस देना होता है, लेकिन पैन नहीं देने पर 20 फीसदी टीडीएस का प्रावधान है।
अगर आपकी आय टैक्स के दायरे में है तो जाहिर है आप एफडी करने के बाद फॉर्म 15जी या 15एच भरकर तो बैंक में दे नहीं सकते। यानी ऐसी स्थिति में 40 हजार रुपये से ज्यादा के ब्याज पर टीडीएस देना होगा। लेकिन यहां भी आप टीडीएस बचा सकते हैं। अगर आपको ब्याज 40 हजार रुपये से ज्यादा मिलने की उम्मीद है तो एक ही बैंक में एफडी नहीं करें, बल्कि उसी राशि को हिस्सों में बांटकर अलग-अलग बैंकों में इस तरह से एफडी करवाएं कि एक ही बैंक में करवाई गई एफडी पर 40 हजार रुपये से ज्यादा ब्याज न मिलें। ध्यान रखें, एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में ऐसा करने पर टीडीएस नहीं बचा पाएंगे।
 
टैक्स
एफडी से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स में कोई छूट नहीं है। मसलन ब्याज आपकी सालाना आय में जुड़ जाएगा और इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स तय होगा। हालांकि, 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए 50 हजार रुपए तक के ब्याज पर टैक्स में छूट है। लेकिन अगर आप एफडी पर 80 सी के तहत इनकम टैक्स में छूट चाहते हैं तो आपको कम से कम 5 साल की अवधि के लिए एफडी करवानी होगी। पांच साल के लिए एफडी करवाने पर आप एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की राशि पर 80 सी के तहत मिलने वाले टैक्स में छूट के हकदार होंगे। सामान्य एफडी की तरह ही 5 साल की एफडी पर भी मिलने वाले ब्याज पर टैक्स में कोई छूट नहीं है ।
 
सलाह
अगर आपको एफडी की मैच्योरिटी से पहले यानी बीच में पैसे की जरूरत पड़ती है तो एफडी तोड़ने से बेहतर है कि आप एफडी पर लोन ले लें। ज्यादातर बैंक एफडी का 90 फीसदी तक लोन देते हैं, जिस पर सामान्यतया एफडी पर उस समय मिलने वाले ब्याज से 2 से 3 फीसदी ही ज्यादा वसूलते हैं। वैसे भी अगर आप एफडी मैच्योरिटी से पहले तोड़ते हैं तो आपको 0.5 से 1 फीसदी की  पेनल्टी भी देनी होती है। लोन चुकाने की अधिकतम समय सीमा एफडी की मैच्योरिटी पीरियड तक होती है।
 

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First Published - August 16, 2022 | 11:22 AM IST

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