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ईसीएम गतिविधियों से निवेश बैंकरों की कमाई बढ़ी

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Last Updated- December 10, 2022 | 2:12 AM IST

इक्विटी पूंजी बाजार (ईसीएम) सेगमेंट में परिचालन कर रहे निवेश बैंकरों के लिए 2020 एक दशक में सर्वश्रेष्ठ वर्षों में से एक रहा। रेफिनिटिव के अनुसार, भारत में ईसीएम अंडरराइटिंग शुल्क ने 29.17 करोड़ डॉलर की रकम हासिल की, जो 2019 के मुकाबले 70 प्रतिशत और एक दशक में सर्वाधिक है। ईसीएम गतिविधियों में कई तरह की इक्विटी पूंजी उगाही शामिल है। इसमें आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ), राइट इश्यू, क्यूआईपी और बड़े सौदे शामिल हैं।
दूसरी तरफ, विलय एवं अधिग्रहण (एमऐंडए) परामर्श शुल्क पूर्ववर्ती वर्ष से 5.1 प्रतिशत घट गया और यह 30.32 करोड़ डॉलर पर रहा जो वर्ष 2017 से सबसे कम है। डेट पूंजी बाजारों (डीसीएम) की अंडरराइटिंग फीस एक साल पहले के मुकाबले 17.6 प्रतिशत घट गई और प्रमुख उधारी शुल्क भी पूर्ववर्ती वर्ष से 13.5 प्रतिशत घट गया।
आईसीआईसीआई बैंक 12 प्रतिशत बाजार भागीदारी के साथ वर्ष 2020 में भारत के निवेश बैंकिंग शुल्क की सूची में शीर्ष पर रहा और उसने 12.32 करोड़ डॉलर का शुल्क हासिल किया। इसके बाद मॉर्गन स्टैनली ने 10.6 प्रतिशत बाजार भागीदारी और 10.96 करोड़ डॉलर का शुल्क हासिल किया। भारतीय स्टेट बैंक 9.9 प्रतिशत बाजार भागीदारी और 10.11 करोड़ डॉलर शुल्क के साथ तीसरे पायदान पर रहा है।भारत की ईसीएम गतिविधियां वर्ष 2020 में सर्वाधिक ऊंचाई पर पहुंच गई थीं और कंपनियों ने 37.6 अरब डॉलर की रकम जुटाई, जो एक साल पहले जुटाई गई पूंजी के मुकाबले 69.6 प्रतिशत ज्यादा रही और 2007 में दर्ज 31.2 अरब डॉलर का रिकॉर्ड टूट गया। 2020 में सबसे बड़ा इक्विटी निर्गम रिलायंस इंडस्ट्रीज की 7 अरब डॉलर की राइट इश्यू पेशकश थी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का राइट इश्यू मौजूदा समय में भारत की सबसे बड़ी ईसीएम पेशकश है और इसने जून 2007 में आईसीआईसीआई बैंक की 4.6 अरब डॉलर की पेशकश के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। कुल कोष उगाही पेशकशों का आकार 32.9 अरब डॉलर रहा जो पिछले साल से 67.6 प्रतिशत तक ज्यादा है, और भारत की कुल ईसीएम प्राप्तियों में इसका 67.6 प्रतिशत योगदान रहा। भारतीय कंपनियों ने 2020 में आईपीओ के जरिये 3.6 अरब डॉलर जुटाए, जो पूर्ववर्ती वर्ष के मुकाबले 45.1 प्रतिशत की वृद्घि है। 2020 की चौथी तिमाही में, कम से कम 16 भारतीय कंपनियों ने अपने आईपीओ उतारे और 1.5 अरब डॉलर जुटाए। वित्त क्षेत्र से ईसीएम निर्गमों का कोष उगाही के संदर्भ में भारत की ईसीएम गतिविधियों में बड़ा योगदान रहा। ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र 18.9 प्रतिशत की भागीदारी के साथ दूसरे पायदान पर रहा, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की 7 अरब डॉलर की पेशकश का अहम योगदान रहा। वहीं दूरसंचार क्षेत्र 11.3 प्रतिशत बाजार भागीदारी के साथ तीसरे नंबर पर रहा।
रेफिनिटिव में वरिष्ठ विश्लेषक इलेन टैन ने कहा कि कोविड-19 ने खासकर उन क्षेत्रों में कई अवसर पेश किए हैं, जिन पर महामारी के दौरान ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा, ‘यह स्थिति 2021 में बरकरार रहेगी, क्योंकि कंपनियों ने कोविड-19 महामारी के बाद के समय में संभावित सुधार का लाभ उठाने पर जोर दिया है।’

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First Published - January 6, 2021 | 8:45 PM IST

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