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व्यवस्था में आई नकदी, कॉल दरें हुईं नरम

Last Updated- December 10, 2022 | 2:11 AM IST

बैंंकिंग सिस्टम में नकदी की वापसी होने लगी है, जिसके कारण इंटरबैंक कॉल दरें नीचे आ रही हैं। सोमवार को जारी आंकड़े बताते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 3 जनवरी तक 6.64 लाख करोड़ रुपये समाहित किए हैं। यह संकेत देता है कि 15 दिसंबर के बाद नकदी की कमी की मुख्य वजह अग्रिम कर के तौर हुई निकासी थी न कि नकदी सोखने के लिए केंद्रीय बैंक की तरफ से की गई कोई अतिरिक्त कोशिश।
संग्रह किए गए अग्रिम कर अब सरकार खर्च कर रही है, जो नकदी की स्थिति को सुधार रहा है।
केयर रेटिंग्स के मुताबिक, पिछले 19 महीने से बैंंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी थी। इसका मुख्य कारण यह था कि बैंक जमाएं, बैंक क्रेडिट के मुकाबले ज्यादा हो गई थी। मार्च 2020 के मुकाबले अतिरिक्त बैंक जमाओं में 18 दिसंबर 2020 तक 6.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और बैंक क्रेडिट में इस दौरान 1.7 फीसदी की बढ़त देखने को मिली।
इसके अतिरिक्त आरबीआई ने नकदी झोंकने के लिए कई कदम उठाए मसलन ओपन मार्केट ऑपरेशन के जरिए खरीद। साथ ही लंबी अवधि का रीपो ऑपरेशन और लक्षित एलटीआरओ अतिरिक्त नकदी में इजाफा कर रहा है। इस वित्त वर्ष में अब तक आरबीआई ने 3.57 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद ओएमओ के जरिए की है और ओएमओ के जरिये राज्य सरकार के 30,000 करोड़ के बॉन्ड खरीदे हैं। व्यवस्था में नकदी बहाल होने के बाद भारांकित औसत कॉल मनी की दरें भी नीचे आई हैं। 31 दिसंबर को कॉल दरें 3.31 फीसदी तक चढ़ गई थी, लेकिन 1 जनवरी को यह घटकर 3.10 फीसदी पर आ गई।
कॉल दरों में एक बार फिर तेजी आने लगी है। सोमवार को भारांकित औसत दर 3.44 फीसदी रही। महत्वपूर्ण है कि कॉल मनी की दरें लगातार आरबीआई की रिवर्स रीपो दरें 3.35 फीसदी से नीचे बनी हुई है। यह पिछले दो महीने से देखने को मिल रहा है। आगामी हफ्तों में नकदी की स्थिति बेहतर बनी रहने की संभावना है और कॉल मनी की दरें नरम बनी रह सकती हैं।

First Published - January 4, 2021 | 11:22 PM IST

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