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रिवर्स मॉर्गेज स्कीम के लेनदार काफी कम

Last Updated- September 09, 2008 | 11:19 PM IST

देशभर में विभिन्न बैंकों द्वारा शुरू की गई रिवर्स मॉर्गेज स्कीम के तहत मिलने वाले कर्ज के प्रति अभी तक लोगों की प्रतिक्रिया बेहद ठंडी रही है।


देशभर में महज 2000 वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी संपत्ति गिरवी रखकर कर्ज हासिल किया है।  वर्तमान में देश के 18 बैंकों एवं दो हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां यह स्कीम चला रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अकेले सबसे ज्यादा 1,900 कर्जे प्रस्तावित किए हैं।

इस स्कीम को विकसित करने वाले नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) का मानना है कि यह जागरूकता में कमी और बैंकों में इसकी भागीदारी कम होने के कारण हो रहा है। देश में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की 7 करोड़ 60 लाख से ज्यादा की आबादी होने के बावजूद योजना के प्रति उत्साह काफी कम है।

अब इस योजना के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए एनजीओ एवं कॉरपोरेट फाउंडेशनों के साथ करार किया गया है। एनएचबी के सीएमडी एस. श्रीधर का कहना है कि बैंक भी बीमा कंपनियों से वैसे पैकेजों को शुरू करने के लिए कह रहा है जिनका कवरेज इस स्कीम के तहत 20 साल से ज्यादा हो।

श्रीधर यह भी कहते हैं कि इस स्कीम में किसी को इस बात के लिए मजबूर नही किया जाता कि वह अपने घर के साथ ही आए। वह संपत्ति को बेच कर भी मुनाफा कमा सकते हैं। जो जोड़े इस विकल्प का चुनाव करते हैं वे चाहें तो अपने घर की पूरी रकम किस्तों में ले सकते हैं या फिर कुल 15 लाख रुपये की सारी रकम एकमुश्त ले सकते हैं।

हालांकि एकमुश्त रकम उसे मेडिकल आधार पर मिल सकती है। इस बीच वह कपल मरने तक घर में रहता रह सकता है। उन्हें 50,000 रुपये प्रति महीने से ज्यादा की किस्त मिल सकती है और जहां तक संपत्ति के मूल्यांकन की बात है तो यह काम लाभान्वितों द्वारा किया जाता है।

उन्होंने बताया कि महिलाओं के लिए उम्रसीमा 55 जबकि पुरूषों के लिए यह सीमा 60 साल तय की गई है। हालांकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के जीएम शरद शर्मा ने कहा कि संपत्तियों की कीमतों में गिरावट जोखिमस्वरूप थी जिसके प्रति बैंकों के पास कोई कवर नही था।

मालूम हो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अब तक कुल 350 करोड़ रुपये के कर्ज प्रस्तावित किए हैं जबकि इनमें से 185 करोड़ रुपये के कर्ज बांटे जा चुके हैं। अन्य बैंक इस स्कीम के तहत 10 से 10.5 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं।

इस बाबत जागरुकता फैलाने के लिए एनएचबी से करार करने वाले हॉर्मोनी फॉर सिल्वर फाउंडेशन के निदेशक धर्मेंद्र भंडारी के मुताबिक बावजूद इसके कि यह स्कीम उम्रदराजों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है, लोगों ने इसके प्रति वैसी गर्मजोशी नही दिखाई है।

First Published - September 9, 2008 | 11:19 PM IST

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