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सिक्योर्ड लोन में बूम से बैंकिंग हायरिंग में बड़ा बदलाव: सेल्स भर्ती में आई तेजी, कलेक्शन रोल हुआ पीछे

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इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि कारोबार में आए बूस्ट और कई रेगुलेटरी बदलावों की वजह से बिजनेस करना आसान हुआ है, जिससे ये ट्रेंड चला है

Last Updated- January 06, 2026 | 6:58 PM IST
Bank
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश के बैंकिंग सेक्टर में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। घर, गाड़ी और सोने के लोन जैसे सिक्योर्ड सेगमेंट में कारोबार बढ़ने की वजह से बैंकों ने सेल्स स्टाफ की भर्ती तेज कर दी है। वहीं, रिकवरी वाले जॉब्स की तुलना में ये बढ़ोतरी ज्यादा है। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि कारोबार में आए बूस्ट और कई रेगुलेटरी बदलावों की वजह से बिजनेस करना आसान हुआ है, जिससे ये ट्रेंड चला है।

पिछले छह महीनों में सेल्स स्टाफ की हायरिंग में 10-15 फीसदी का इजाफा हुआ है। टीमलीज सर्विसेज के डेटा के मुताबिक, रेगुलेटरी बदलाव और बैंकिंग लागत में आए समायोजन की वजह से ये ग्रोथ आई है। पहले जहां हायरिंग काफी सावधानी से हो रही थी, अब उस माहौल से बाहर निकलकर बैंक आगे बढ़ रहे हैं।

Also Read: रीपो रेट में कटौती के बाद कर्ज की रफ्तार तेज, जमा से आगे बढ़ा ऋण; बैंकों के लिए फंड जुटाना बना चुनौती

मिड-साइज बैंक और NBFC सबसे आगे

टीमलीज सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बालासुब्रमण्यन ए कहते हैं कि मिड-साइज प्राइवेट बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFC) सबसे ज्यादा उत्साह दिखा रही हैं। ये कंपनियां टियर-2 और टियर-3 शहरों में मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए जोर लगा रही हैं। बड़े प्राइवेट बैंक जहां टेक्नोलॉजी से प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और लागत कम करने पर फोकस कर रहे हैं, वहीं मिड-साइज प्लेयर्स अपनी फ्रंटलाइन टीम को मजबूत कर नए लोन प्रोडक्ट्स और लोकल ऑपरेशंस को स्केल कर रहे हैं।

RBI की छह सदस्यों वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने दिसंबर में पॉलिसी रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स कम किया। पूरे 2025 में कुल मिलाकर रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती हुई। बैंक वाले मानते हैं कि फंड की लागत कम होने का फायदा अब दिखना शुरू हो रहा है, जो कारोबार की ग्रोथ को और बल देगा। अच्छी ग्रोथ के आंकड़ों के साथ मिलकर ये अगला साल काफी मजबूत बनाने वाला है।

एक प्राइवेट सेक्टर बैंक के अधिकारी ने बताया कि अब बैंकिंग की हायरिंग स्ट्रेटजी में फोकस बिजनेस ग्रोथ पर ज्यादा है, कलेक्शन पर कम। फंड कॉस्ट कम होने का असर थोड़ी देरी से आता है, लेकिन ये फायदा 2026 तक चलेगा और तीसरी तिमाही से दिखना शुरू हो गया है। पूरे फायदे के लिए अभी दो-तीन तिमाही और बाकी हैं।

BNP परिबास ने अपने क्लाइंट्स को भेजी नोट में कहा कि क्रेडिट ग्रोथ का दोबारा उछाल आएगा, जो बैंकिंग की कमाई में तेजी लाएगा। बड़े बैंकों के मार्जिन में हल्की बढ़ोतरी या कम से कम स्थिरता रहेगी, जो वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही से शुरू हो सकती है। अच्छी क्रेडिट ग्रोथ से कमाई में मोमेंटम आएगा, जो बैंक स्टॉक्स के लिए बड़ा री-रेटिंग फैक्टर बनेगा।

CRIF हाई मार्क के चेयरमैन सचिन सेठ, जो CRIF इंडिया और साउथ एशिया के रीजनल मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं, अपनी हालिया रिपोर्ट में कहते हैं कि अनसिक्योर्ड सेगमेंट में सख्ती के बावजूद इंडस्ट्री ने फुर्ती दिखाई है। सिक्योर्ड प्रोडक्ट्स को मजबूत किया गया और सोल प्रोप्राइटर व ग्रामीण उधारकर्ताओं को सपोर्ट दिया गया।

एक अन्य प्राइवेट बैंक के अधिकारी ने गुमनामी की शर्त पर बताया कि अब हायरिंग का बड़ा हिस्सा सिक्योर्ड लोन, ब्रांच एक्सपैंशन और सेल्स रोल्स पर है। रिकवरी और कलेक्शन पर कम फोकस है। ये बदलाव स्थिरता, एसेट क्वालिटी और सस्टेनेबल ग्रोथ की तरफ बड़ा शिफ्ट दिखाता है। ज्यादातर लोन सिक्योर्ड प्रोडक्ट्स की ओर मुड़े हैं, जहां एग्रेसिव कलेक्शन की जरूरत कम पड़ती है और बिजनेस डेवलपमेंट पर जोर ज्यादा रहता है।

जानकार बताते हैं कि कुछ अनसिक्योर्ड छोटे लोन में एक-डेढ़ साल बाद रिकवरी मुश्किल हो जाती है, इसलिए बैंक इन्हें एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को बेच देते हैं। इसी वजह से एग्रेसिव कलेक्शन से दूर रहते हैं।

हालांकि, क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड सेगमेंट में रिकवरी रोल्स की डिमांड अभी भी बनी हुई है। एक बैंक अधिकारी ने कहा कि कलेक्शन की संख्या थोड़ी कम हुई है, साथ ही कंसॉलिडेशन भी चल रहा है। अनसिक्योर्ड पोर्टफोलियो में इतने ज्यादा कलेक्शन एजेंट्स की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ हाई-रिस्क अनसिक्योर्ड एरिया में बैंक जानबूझकर पीछे हट रहे हैं, जिससे कलेक्शन एजेंसियों की जरूरत घट रही है।

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First Published - January 6, 2026 | 6:58 PM IST

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