facebookmetapixel
फ्लाइट में पावर बैंक पर सख्ती: DGCA के आदेश के बाद एयरलाइंस ने बदला नियम, यात्रियों के लिए अलर्टZomato हर महीने 5,000 गिग वर्कर्स को नौकरी से निकालता है, 2 लाख लोग खुद छोड़ते हैं काम: गोयलनया इनकम टैक्स कानून कब से लागू होगा? CBDT ने बताई तारीख, अधिकारियों से तैयार रहने को कहाUS Venezuela Attack: वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई: वैश्विक तेल आपूर्ति पर क्या असर?GST में बदलाव के बाद भी SUV की यूज्ड कार मार्केट पर दबदबा बरकरार, युवा खरीदारों की पहली पसंदक्या बीमा कंपनियां ग्राहकों को गलत पॉलिसी बेच रही हैं? IRDAI ने कहा: मिस-सेलिंग पर लगाम की जरूरतजिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला से मादुरो को उठा लिया, क्या उसी तरह चीन ताइवान के साथ कर सकता है?कहीं आपकी जेब में तो नहीं नकली नोट? RBI ने बताया पहचानने का आसान तरीकाकई बड़े शहरों में नहीं बिक रहे घर! मेट्रो सिटी में अनसोल्ड घरों का लगा अंबार, 2025 में आंकड़ा 5.7 लाख के पारMCap: शेयर बाजार की तेजी में टॉप 7 कंपनियों का मुनाफा, ₹1.23 लाख करोड़ बढ़ा मार्केट कैप

सब तक वित्तीय सुविधा में AI निभाएगी बड़ी भूमिकाः नीलेकणी

AI और भारतीय भाषाएं अरबों लोगों को वित्तीय सेवाओं तक पहुंचाएंगी

Last Updated- November 19, 2024 | 10:13 PM IST
Infosys Nandan Nilekani

आईटी सेवा कंपनी इन्फोसिस के गैर कार्यकारी चेयरमैन नंदन नीलकेणी ने सब तक वित्तीय सुविधा पहुंचाने में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की परिवर्तनकारी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने जोर दिया कि कैसे एआई आधारित भाषा मॉडल अरबों लोगों की वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं।

नीलेकणी ने कहा, ‘आईआईटी मद्रास में एआई फॉर भारत के लिए कुछ काम किए जा रहे हैं जिनमें भारतीय भाषाओं के लिए ओपन डेटा तैयार करना भी शामिल है। इसका एनपीसीआई उपयोग कर रहा है। उदाहरण के लिए वे हिंदी और अंग्रेजी में वॉयस एक्टिवेटेड कमांड (जो आवाज से सक्रिय हो) तैयार कर रहे हैं।’

उन्होंने समझाया कि अब भारत में कोई भी व्यक्ति कोई जानकारी हासिल करने अथवा अपने काम को पूरा करने के लिए अपनी पसंदीदा भाषा में संवाद कर सकता है। इससे अरबों लोगों की वित्तीय सेवाओं तक पहुंच संभव होगी। नीलकेणी मुंबई में आयोजित सहमति संवाद 2024 में फायरसाइड चैट में बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटलीकरण को इस तरह से तैयार किया गया है कि वे वित्तीय समावेशन की ओर ले जाएं। इसकी शुरुआत आधार बनाने से हुई। उसके बाद इसका उपयोग जनधन-आधार मोबाइल (जैम) के तहत बैंक खाते खोलने के लिए किया गया, फिर यूपीआई आया, आधार आधारित भुगतान प्रणाली की शुरुआत की गई, फिर भीम की पेशकश की गई और फिर अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम बना।

First Published - November 19, 2024 | 10:13 PM IST

संबंधित पोस्ट