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मंदी के जंग से कुंद हुए औजार

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Last Updated- December 08, 2022 | 9:48 AM IST

वैश्विक मंदी की वजह से ऑटो उद्योग तो तबाह हो ही रहा है, पंजाब में हाथ के औजारों (हैंड टूल) का व्यापार करने वालों पर भी गाज गिर रही है।


पंजाब के करीब 400 छोटे हस्त औजार उद्योगों में करीब 60,000 लोगों को रोजगार मिला हुआ। यही नहीं, यहां बनने वाले औजारों में से तकरीबन 80-85 फीसदी निर्यात किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से मांग घटने की वजह से कारोबारी परेशान हैं।

पिछले साल तक यह उद्योग 20 फीसदी की दर से विकास कर रहा था, लेकिन इस साल कच्चे माल, खासकर इस्पात की कीमतों में इजाफा होने से कारोबार का विकास नकारात्मक हो गया है। सच तो यह है कि पिछले दो वित्त वर्ष से हस्त औजारों के निर्यात में लगातार गिरावट आ रही है।

वर्ष 2006-07 में  करीब 828 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था, जबकि 2005-06 में 909.32 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था। यही नहीं, 2005-06 में इसके निर्यात में 16.80 फीसदी का विकास दर्ज किया गया था,

जबकि 2006-07 में विकास दर 8.97 फीसदी रही। वर्ष 2007-08 की बात करें, तो निर्यात घटकर 776.97 करोड़ रुपये रह गया।

जालंधर के विक्टर टूल्स (प्रा.) लिमिटेड 1954 से ही हस्त औजारों के निर्माण में लगी हुई है। मंदी का असर कंपनी पर पड़ा तो है, लेकिन प्रबंधन इससे उबरने के तमाम उपाय भी कर रही है। कंपनी की एक इकाई जालंधर में है, जो करीब 35,000 वर्गफीट में फैली हुई है।

यहां अत्याधुनिक मशीनों से औजारों का निर्माण किया जाता है। पिछले साल कंपनी की विकास दर 18 से 20 फीसदी रही थी। लेकिन इस साल विकास दर को बनाए रखने में कंपनी को परेशानी आ सकती है।

विक्टर टूल्स के निदेशक अश्विनी कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि मंदी की वजह से कंपनी का कारोबार प्रभावित हो रहा है, वहीं मुनाफे में भी कमी आ रही है।

उन्होंने बताया कि कंपनी अमेरिका, जर्मनी और अन्य देशों में औजारों का निर्यात करती है। लेकिन मंदी की वजह से यहां मांग घट गई है।

ऐसे में कंपनी यूरोपीय बाजारों में कारोबार जमाने की कोशिश में लगी है। इसके साथ ही नई तकनीक के जरिए कंपनी उत्पादन लागत में कटौती कर रही है, ताकि औजारों की कीमतों में कमी आ सके।

साथ ही कंपनी नए उत्पादों की लॉन्चिंग की तैयारी भी कर रही है। उन्होंने बताया कि कंपनी ग्राहकों को उत्तम गुणवत्ता के औजार मुहैया कराती है, ताकि ग्राहकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। मंदी के दौर में ग्राहकों को अपने साथ जोड़ने में कंपनी कम लागत पर औजार मुहैया कराने की कोशिश में जुटी है।

मांग में कमी की वजह से कंपनी को अपने उत्पादन में भी कटौती करनी पड़ी है। इसकी वजह से कंपनी ने अपने कर्मचारियों की संख्या में भी 18 फीसदी की कटौती की है।

अमेरिकी मंदी की वजह से निर्यात में भारी गिरावट
उत्पादन में कटौती, कर्मचारियों की भी हुई छंटनी
कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से लागत में इजाफा

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First Published - December 17, 2008 | 11:52 PM IST

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