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ईंधन सस्ता होने से घटेगी खुदरा महंगाई

Last Updated- December 11, 2022 | 11:45 PM IST

केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल पर 5 रुपये और डीजल पर 10 रुपये लीटर उत्पाद शुल्क घटाने से खुदरा मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 0.30 प्रतिशत अंक कम हो सकती है। बहरहाल यह नवंबर के महंगाई दर के आंकड़ों में पूरी तरह नजर नहीं आएगा, जो दिसंबर में जारी होना है। इसे प्रभावी रूप से लागू होने में वक्त लगेगा।
बहरहाल 4 नवंबर के आंकड़ों के मुताबिक देश के 4 बड़े महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में पेट्रोल की कीमतों में 5.26 से 5.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 11.16 से 13.48 रुपये प्रति लीटर की कमी आई है। इसके बावजूद इन 4 महानगरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये लीटर से ऊपर बनी हुई है, जबकि डीजल 100 रुपये से नीचे आ गया है। शुल्क में कटौती के पहले सिर्फ दिल्ली में डीजल 100 रुपये लीटर से कम था।
उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, उत्तराखंड, असम, मणिपुर और त्रिपुरा सहित कुछ राज्यों ने भी इन दो ईंधनों पर लगने वाले मूल्यवर्धित कर में कटौती की है। इससे सीपीआई महंगाई दर में और कमी आने की संभावना है।
वहीं दूसरी तरफ आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष के शेष 5 महीनों में इस फैसले से केंद्र के खजाने पर 60,000 करोड़ रुपये का बोझ पडऩे की संभावना है। बहरहाल कीमत कम होने से ईंधन की मांग बढ़ेगी और इससे सरकार के कोष पर पडऩे वाले बोझ का आंकड़ा कुछ बदल सकता है।
केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि केंद्र के कदमों का सीधा असर खुदरा महंगाई पर 0.18 से 0.20 प्रतिशत अंक तक पड़ सकता है। बहरहाल उन्होंने कहा कि द्वितीयक असर सीधे असर के करीब 50 प्रतिशत के करीब होगा। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर हम उम्मीद करते हैं कि खुदरा महंगाई दर 0.3 प्रतिशत अंक के करीब कम हो सकती है।
इंडिया रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा कि उत्पाद शुल्क में कटौती का सीधे असर से खुदरा महंगाई दर में 0.15 प्रतिशत अंक की कमी आएगी। उन्होंने कहा, ‘दूसरे दौर का असर इस पर निर्भर करेगा कि ईंधन की लागत में आई कमी का कितना लाभ उत्पादक अपने ग्राहकों को देते हैं। दूसरे दौर का असर संभवत: अगले महीने से या जब ट्रक चलवाने वाले अपनी माल ढुलाई की दरों में जब बदलाव करेंगे, तबसे दिखना शुरू हो पाएगा।’
बार्कलेज में भारत के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने कहा कि कुल मिलाकर उत्पाद शुल्क में कमी किए जाने का सीधा असर नवंबर की खुदरा महंगाई दर पर 0.12 प्रतिशत अंक रहेगा और इसकी वजह से 0.12 प्रतिशत का अप्रत्यक्ष असर अगले  3 महीने में दिखेगा और इससे महंगाई दर में कुल 0.24 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
क्वांटइको रिसर्च में अर्थशास्त्री युविका सिंघल ने कहा कि केंद्र के कदमों का खुदरा महंगाई पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष असर 0.13-0.13 प्रतिशत अंक रहेगा। उन्होंने कहा, ‘संयुक्त असर 0.25 से 0.30 प्रतिशत अंक रह सकता है।’
सितंबर महीने में खुदरा महंगाई दर घटकर 5 महीने के निचले स्तर 4.35 प्रतिशत पर आ गई, जो इसके पहले महीने में 5.59 प्रतिशत थी। खुदरा महंगाई दर में पेट्रोल का अधिभार 2.19 प्रतिशत और डीजल का 0.15 प्रतिशत है।
पेट्रोल की कीमत में बढ़ोतरी की दर बढ़ी हुई बनी है। सितंबर में यह थोड़ा कम होकर 22.26 प्रतिशत रही, जो इसके पहले महीने में 24.01 प्रतिशत थी। डीजल की महंगाई दर बढ़कर 22.44 प्रतिशत हो गई, जो इसके पहले महीने में 22.06 प्रतिशत थी। इस साल फरवरी से ही इन दो ईंधनों की महंगाई दर 20 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है।
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि केंद्र के कदमों का असर नवंबर के सीपीआई आंकड़ों में नजर आएगा, जो अब 3.5 से 4 प्रतिशत के बीच रह सकती है। इसकी वजह से भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति को अगली समीक्षा में नीतिगत दरों में बदलाव का मौका मिल सकेगा।
उन्होंने कहा, ‘इसका दूसरे चरण का असर अगले 3 महीने में नजर आ सकता है, लेकिन यह स्थिर रहने की संभावना है क्योंकि संभावित मांग के कारण यह संभावना कम है कि इसकी कीमतों का लाभ ग्राहकों को मिले।’
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा कि यह कदम वृद्धि महंगाई दर के हिसाब से सकारात्मक है और इससे ईंधन की महंगाई रोकने व वृद्धि को समर्थन देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘नवंबर के सीपीआई के आंकड़ों में इसका असर नजर आएगा, जो 12 दिसंबर को जारी होगा। दूसरे चरण का असर अगले कुछ महीनों में दिखेगा।’ उन्होंने कहा कि इससे सरकार का राजस्व घटेगा, ऐसे में इसका राजकोषीय घाटे पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

First Published - November 5, 2021 | 11:44 PM IST

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