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खुदरा महंगाई 7 फीसदी के पास

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Last Updated- December 11, 2022 | 7:58 PM IST

खुदरा मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति मार्च में 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जबकि फरवरी में उद्योगों के उत्पादन में नरमी का रुख बना हुआ है, जिससे केंद्रीय बैंक को नीतिगत मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 6.95 फीसदी पर पहुंच गई, जो फरवरी में 6.07 फीसदी थी। यह लगातार तीसरा महीना है जब खुदरा मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सहज स्तर 6 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। दूसरी ओर फरवरी में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) पिछले साल फरवरी की तुलना में 1.7 फीसदी बढ़ा है, जिससे संकेत मिलता है कि आर्थिक सुधार में अभी ज्यादा मजूबती नहीं आई है।
खाद्य तेलों (18.79 फीसदी), सब्जियों (11.64 फीसदी), मांस-मछली (9.63 फीसदी), जूते-चप्पल और कपड़े (9.4 फीसदी) और ईंधन एवं बिजली (7.52 फीसदी) के दामों में बढ़ोतरी से खुदरा मुद्रास्फीति में इजाफा हुआ है। मुख्य मुद्रास्फीति (खाद्य एवं ईंधन के दामों में उतार-चढ़ाव को छोड़कर) मार्च में 10 महीने के उच्च स्तर 6.29 फीसदी पर रही जो फरवरी में 5.95 फीसदी थी।
इंडिया रेटिंग्स में प्रधान अर्थशास्त्री सुनील के सिन्हा ने कहा कि ईंधन के दामों में मार्च अंत से धीरे-धीरे इजाफा किया गया है, इसलिए मार्च की मुद्रास्फीति पर इसका असर सीमित रहा, लेकिन आगे चलकर जिंसों के ऊंचे दामों और कमजोर रुपये के कारण मुद्रास्फीति चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उच्च स्तर पर बनी रह सकती है।
यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद भारत और पूरी दुनिया में खाद्य वस्तुओं एवं जिंसों की कीमतें बढ़ गई हैं। आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक को अपनी उदार मौद्रिक नीति की समीक्षा के लिए विवश होना पड़ा है। हाल में संपन्न मौद्रिक नीति समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया मगर यह संकेत दिया कि वह अब आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के बजाय महंगाई पर अधिक ध्यान देगा। आरबीआई ने आर्थिक वृद्धि का अनुमान भी कम कर दिया है जबकि मुद्रास्फ ीति अनुमान बढ़ा दिया है।
आईआईपी के लिए छह श्रेणियों में से चार – प्राथमिक वस्तुएं, पूंजीगत वस्तुएं, मध्यम वस्तुएं और ढांचागत वस्तुएं- में फरवरी में सकारात्मक तेजी आई थी। हालांकि कंज्यमर ड्यूरेबल में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल में भी एक महीने के अंतर के बाद गिरावट दर्ज की गई। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जिंसों की कीमतों मेंं वृद्धि, रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन में कोविड-19 वायरस की वजह से लगातार लॉकडाउन वाहन सहित उन क्षेत्रों के लिए शुभ संकेत नहीं है, जो रूस, यूक्रेन या चीन से आने वाले कच्चे माल पर निर्भर हैं। केयर रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र मेंं मांग की स्थिति सुधरनी चाहिए मगर विनिर्माण क्षेत्र कच्चे माल की कमी की वजह से चुनौतियों का सामना करेगा।

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First Published - April 12, 2022 | 10:53 PM IST

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