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प्रथम चूक गारंटी को रिजर्व बैंक की मंजूरी

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कई कंपनियों के अनुसार ऋण पोर्टफोलियो के पांच फीसदी को चूक में शामिल करना पर्याप्त नहीं हो सकता है

Last Updated- June 11, 2023 | 10:01 PM IST
FLDG guidelines: Industry seeks increase in default cover

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल उधारी में प्रथम हानि चूक गारंटी (FLDG) व्यवस्था के उपयोग की अनुमति देने के लिए बीते सप्ताह के अंत में दिशानिर्देश जारी किए थे। इसका उद्योग ने स्वागत करते हुए मिली जुली प्रतिक्रिया दी। कई कंपनियों के अनुसार ऋण पोर्टफोलियो के पांच फीसदी को चूक में शामिल करना पर्याप्त नहीं हो सकता है जबकि कंपनियां पहले से बैंकिंग साझेदारों को एफएलडीजी का करीब 100 फीसदी मुहैया करवा रही हैं।

लघु कारोबारियों के ऑनलाइन फाइनैंसिंग प्लेटफार्म बिज2क्रेडिट के मुख्य कार्याधिकारी व सह-संस्थापक रोहित अरोड़ा ने कहा, ‘यह सबसे पहले अच्छा कदम है। इसमें सीमा 5 फीसदी की है, जो कम है। मेरे विचार से एफएलडीजी को अधिक रखें। मैं उनसे (RBI) सहमत हूं कि यह 100 फीसदी नहीं हो सकती है। आदर्श स्थिति के रूप में 50 फीसदी होनी चाहिए। इससे फाइनैंस की तकनीकी (फिनटेक) कंपनियों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को क्रेडिट तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।’

फिनटेक कंपनियां, बैंक या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां एफएलडीजी मॉडल के तहत समझौता करती हैं। इसके अंतर्गत पूर्व प्रदाता को ऋण पोर्टफोलियों में निश्चित प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति की गारंटी प्रदान की जाती थी। यह कुछ मामलों उच्च सीमा 100 प्रतिशत तक जाती थी। इस मॉडल को लेकर बैंक अधिक उत्सुक थे क्योंकि फिनटेक जोखिम के एक हिस्से को साझा कर रही थीं। लेकिन इस मॉडल को लेकर आरबीआई सहज नहीं था। इसका कारण यह था कि केंद्रीय बैंक के तहत नियमन के तहत आने वाली इकाइयां फिनटेक नहीं थीं। अरोड़ा के मुताबिक, ‘यह स्पष्ट रूप से बहुत अच्छा नहीं था। इसमें उधारी देने वाला ही सभी कुछ तय कर रहा था।’

नए नियामक के आधार पर लोन पोर्टफोलियो पर चूक का दायरा पांच फीसदी तक रहेगा और इसे 120 दिनों की अधिकतम अतिदेय अवधि तक लागू किया जाएगा। इसके अलावा फिनटेक को ऋणदाता के पक्ष में नकद जमा, सावधि जमा या बैंक गारंटी के रूप में गारंटी जमा करनी होगी। नए दिशानिर्देशों के तहत आरबीआई के नियमन के दायरे में आने वाली इकाई ही ऋण सेवा प्रदाता या नियमन के दायरे में आने वाली इकाइयों से एफएडीजी समझौता करने की हकदार है।

नियमन के दायरे में आने वाले वित्तीय सेवा प्रदाताओं और फिनटेक कंपनियों के औद्योगिक निकाय फिनटेक कंवर्जेंस काउंसिल (एफसीसी) ने आरबीआई के इस कदम का स्वागत किया। एससीसी ने कहा कि एफएलडीजी का प्रमुख आयाम यह है कि इसने ऋण देने के पारिस्थितिकीतंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया है।

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First Published - June 11, 2023 | 10:01 PM IST

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