वर्ष 2025 में चांदी की तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है और घरेलू बाजार में इसकी कीमत लगभग 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई है। इस बहुमूल्य धातु ने इस साल अब तक 123 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
एडलवाइज म्युचुअल फंड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष निरंजन अवस्थी का कहना है, ‘वैश्विक स्तर पर कम यील्ड, बढ़ती मंदी की आशंका और सुरक्षित निवेश मांग ने सभी बहुमूल्य धातुओं में तेजी ला दी। लेकिन चांदी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया क्योंकि यह बड़ी आर्थिक अनिश्चितताओं से बचाव का अहम कारक होने के साथ ही उच्च वृद्धि वाले उद्योगों के लिए अहम धातु है।’ इतनी मजबूत तेजी के बाद, निवेशकों के सामने अब अहम सवाल यह है कि क्या चांदी 2026 में भी उन्हें बेहतर रिटर्न देना जारी रख सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी के औद्योगिक इस्तेमाल में बढ़ोतरी और निवेश की निरंतर मांग के कारण इस धातु को लेकर अनुकूल नजरिया बना हुआ है। अवस्थी का कहना है, ‘तेजी जारी रह सकती है क्योंकि चांदी तीन अहम बड़े रुझानों के केंद्र में है जिनमें सौर फोटोवॉल्टिक 15-20 प्रतिशत सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) पर बढ़ रहा है, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) 10-15 प्रतिशत सीएजीआर पर और वैश्विक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) बुनियादी ढांचा तेजी से बढ़ रहा है।’
आपूर्ति पक्ष की बाधाएं, इसके पक्ष में स्थिति और मजबूत करती हैं। खनन उत्पादन धीमा रहा है और रीसाइक्लिंग में बढ़ोतरी सीमित है। कोटक म्युचुअल फंड के फंड मैनेजर (ईटीएफ) सतीश डोंडापति का कहना है, ‘पिछले तीन से चार वर्षों से चांदी की आपूर्ति में कमी का रुझान बना हुआ है और इसके सीमित रहने की उम्मीद है। इसके अलावा, कुछ नई चांदी की खदानें खोजी जा रही हैं जबकि मौजूदा अयस्कों की गुणवत्ता घट रही है।’
सोने की तरह, चांदी आमदनी सृजन नहीं करती है जिससे धातु की कीमत में वृद्धि ही रिटर्न का एकमात्र स्रोत है। वैश्विक स्तर पर कम ब्याज दर का माहौल भी बहुमूल्य धातुओं के समर्थन में कारगर होता है। डोंडापति का कहना है, ‘ब्याज दरों में अधिक आक्रामक कटौती की उम्मीदें भी चांदी की कीमतों को बढ़ा सकती हैं क्योंकि कम दरें आमतौर पर बहुमूल्य धातुओं का समर्थन करती हैं। ऐतिहासिक रूप से चांदी की कीमतें, सोने की कीमतों के लगभग 1.8 प्रतिशत पर कारोबार करती हैं, लेकिन फिलहाल ये 1.44 प्रतिशत के करीब हैं। इससे पता चलता है कि चांदी में और ऊपर जाने की गुंजाइश है।’
वर्ष 2025 में मजबूत प्रदर्शन के बाद जिंस बाजार में आने वाले बदलाव, चांदी की तेजी को चुनौती दे सकते हैं। अवस्थी का कहना है, ‘अगर डॉलर फिर से मजबूत होता है और वास्तविक दरें बढ़ती हैं तब चांदी की तेजी ठंडी पड़ सकती है।’
भू-राजनीतिक तनाव में कमी से अनिश्चितता वाली स्थिति के लिए सुरक्षित निवेश के रूप में बहुमूल्य धातुओं की मांग कम हो सकती है। डोंडापति का कहना है, ‘भू-राजनीतिक तनाव में कमी से सुरक्षित निवेश वाले मद की खरीदारी कम हो जाएगी जो वास्तव में अनिश्चितता के दौर में चांदी का समर्थन करती है।’ इसलिए, निवेशकों को 2025 में देखे गए असाधारण रिटर्न को दोबारा दोहराए जाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
चांदी अपनी दोहरी प्रकृति के कारण सोने की तुलना में अधिक अस्थिर होती है। निपॉन इंडिया म्युचुअल फंड के प्रमुख (जिंस) एवं फंड मैनेजर विक्रम धवन का कहना है, ‘चांदी की कीमतें अस्थिर रह सकती हैं, खासतौर पर निकट भविष्य में। दीर्घकालिक निवेशकों को इसमें एकमुश्त आवंटन के बजाय किश्तों या चरणबद्ध तरीके से निवेश पर विचार करना चाहिए।’
नए निवेशकों को बीते हुए कल के रिटर्न के हिसाब से उम्मीद करने से बचना चाहिए। डोंडापति का कहना है, ‘निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे मौजूदा स्तरों पर चांदी में बड़े पैमाने पर एकमुश्त आवंटन करते समय सावधानी बरतें। इसके बजाय, सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) या म्युचुअल फंड में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) या सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) के माध्यम से चरणबद्ध निवेश का नजरिया अपनाने की सिफारिश की जाती है। कुल मिलाकर, बहुमूल्य धातुओं में निवेश पोर्टफोलियो के लगभग 15-20 प्रतिशत तक सीमित होना चाहिए।’
अवस्थी का कहना है, ‘भारी तेजी के बाद, नए निवेशकों को चांदी में धीरे-धीरे निवेश की शुरुआत करनी चाहिए और सतर्क रहना चाहिए। चांदी लंबे समय तक चलने वाला संरचनात्मक निवेश है लेकिन अधिक अस्थिरता वाली धातु होने के कारण इसमें सही समय पर निवेश करना महत्वपूर्ण है।’
जिन्होंने चांदी में अत्यधिक आवंटन किया है वे आंशिक मुनाफा-बुकिंग पर विचार कर सकते हैं। अवस्थी का कहना है, ‘मौजूदा निवेशकों को अपना निवेश बनाए रखना चाहिए क्योंकि उद्योगों में लंबे समय तक तेजी बनी रहेगी। लेकिन तेज उछाल पर निवेश में दोबारा संतुलन बनाना बुद्धिमानी हो सकती है।’
कम या मध्यम स्तर का जोखिम लेने की क्षमता वाले निवेशकों को सिल्वर ईटीएफ या म्युचुअल फंड से बचना बेहतर हो सकता है। इसके बजाय, उन्हें मल्टी-एसेट आवंटन वाले म्युचुअल फंड के माध्यम से अपने जोखिम में विविधता लानी चाहिए।
धवन का कहना है, ‘मल्टी-एसेट आवंटन म्युचुअल फंड, एक ही फंड के तहत सोना, चांदी और अन्य परिसंपत्ति वर्गों में निवेश के लिए एक विविध और पेशेवर रूप से प्रबंधित तरीके की पेशकश करते हैं। इस तरह के फंड आम तौर पर संतुलित निवेश और जोखिम प्रबंधन चाहने वाले निवेशकों के लिए मुफीद होते हैं।’ वह आगे कहते हैं कि अधिक आक्रामक निवेशक विशेष सिल्वर ईटीएफ या फंड ऑफ फंड जोड़ने पर विचार कर सकते हैं, बशर्ते यह उनकी व्यापक पोर्टफोलियो रणनीति और जोखिम प्रोफाइल के भीतर मुफीद हो।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)