facebookmetapixel
Health Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय अधिकतर लोग क्या गलती करते हैं?दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हुई? स्टडी में दावा: राजधानी के 65% प्रदूषण के लिए NCR व दूसरे राज्य जिम्मेदारExplainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?Credit Card Tips: बिल टाइम पर चुकाया, फिर भी गिरा CIBIL? ये है चुपचाप स्कोर घटाने वाला नंबर!आस्था का महासैलाब: पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शुरू हुआ माघ मेला, 19 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी2026 में हिल सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था, एक झटका बदल देगा सब कुछ…रॉबर्ट कियोसाकी ने फिर चेतायाKotak Mahindra Bank का निवेशकों को जबरदस्त तोहफा: 1:5 में होगा स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट फिक्सकनाडा ने एयर इंडिया को दी कड़ी चेतावनी, नियम तोड़ने पर उड़ान दस्तावेज रद्द हो सकते हैंट्रंप का दावा: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी गिरफ्त में; हवाई हमलों की भी पुष्टि कीHome Loan: होम लोन लेने से पहले ये गलतियां न करें, वरना एप्लीकेशन हो सकती है रिजेक्ट

भारत में सख्त भूमि नियमों से मैन्युफैक्चरिंग मुश्किल: मुख्य आर्थिक सलाहकार

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने एमएसएमई के लिए भूमि उपयोग, कार्यशील पूंजी, और ऋण पहुंच की चुनौतियों को रेखांकित किया।

Last Updated- January 20, 2025 | 10:21 PM IST
MSME

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि भारत ने भूमि के उपयोग से संबंधित नियम जैसे कई कठोर नियम बनाकर लघु और मझोले उद्यमों के लिए विनिर्माण क्षेत्र को और जटिल बना दिया है। इंडिया एग्जिम बैंक के एक कार्यक्रम में नागेश्वरन ने कहा कि यह मसला 31 जनवरी को जारी की जाने वाली आर्थिक समीक्षा में शामिल होगा।

उन्होंने कहा, ‘भूमि कई तरह के नियमों के दायरे में है और उद्यम इसका पूरा इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं है। कानून का पालन करने वाली कोई भी एमएसएमई फर्म ग्राउंड फ्लोर पर जमीन का 20 से 30 प्रतिशत इस्तेमाल करने में भी सक्षम नहीं होती है। हमने विनिर्माण को और जटिल बना दिया है।’

उन्होंने कहा कि विनिर्माण इकाइयां स्टिल्ट पर बनाई जाती हैं क्योंकि पार्किंग मानकों आदि के कारण ग्राउंड प्लोर का उपयोग प्रतिबंधित रहता है, जिसका मतलब यह हुआ कि जमीन का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘जी-20 देशों में भारत में प्रति व्यक्ति भूमि उपलब्धता सबसे कम है और यहां इस संसाधन की कमी है।’

वित्त अधिनियम की 43 (बी) के माध्यम से किए गए बदलाव के कारण एमएसएमई के सामने आ रही चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सीईए ने कहा कि राजनीतिक अर्थव्यवस्था और व्यवहार संबंधी स्थिरता पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एमएसएमई को समय पर भुगतान करने के लिए कहा है, क्योंकि उनके लिए कार्यशील पूंजी महत्त्वपूर्ण है, लेकिन बड़ी कंपनियां यह नियम वापस लेने की मांग कर रही हैं।

43(बी) प्रावधान के अनुसार एमएसएमई को किए जाने वाले भुगतान में तभी कटौती की जा सकती है, जब फर्म को भुगतान कर दिया जाएगा तथा यदि एमएसएमई के साथ कोई अनुबंध नहीं है तो भुगतान 15 दिनों के भीतर किया जाएगा।

एमएसएमई को ऋण की पहुंच में सुधार के बारे में नागेश्वरन ने कहा कि अगर बैंक गिरवीं रखकर कर्ज देने के बजाय कमाई के आधार पर फैसले करते हैं तो एमएसएमई तक ऋण की पहुंच की व्यापक संभावना है।

First Published - January 20, 2025 | 10:21 PM IST

संबंधित पोस्ट