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बढ़ा निर्यात सीएडी पर दबाव का संकेत

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Last Updated- December 11, 2022 | 8:58 PM IST

शुद्ध निर्यात अनुपात तीन साल के सर्वोच्च स्तर – वित्त वर्ष 22 की दिसंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.9 प्रतिशत तक पहुंचने के साथ देश का चालू खाते का घाटा (सीएडी) तीसरी तिमाही में बढऩे वाला है। सोमवार को जारी जीडीपी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम और जिंसों की कीमतों से निकट भविष्य में चालू खाते का घाटा और बढ़ सकता है।
शुद्ध निर्यात को चालू खाते के घाटे के प्रतिनिधि के तौर पर माना जाता है। जहां एक ओर सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों में शुद्ध निर्यात वस्तु और सेवाओं दोनों के ही आयात और निर्यात के बीच के अंतर को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए चालू खाते के घाटे के आंकड़े भी निजी हस्तांतरण प्राप्तियों में कारक है, जो शुद्ध निर्यात के साथ-साथ मुख्य रूप से विदेशों में कार्यरत भारतीयों द्वारा भेजी गई रकम का प्रतिनिधित्व करता है। वित्त वर्ष 22 की जून तिमाही में जीडीपी के 0.9 प्रतिशत के चालू खाते के अधिशेष की तुलना में सितंबर तिमाही में देश का चालू खाते का घाटा जीडीपी का 1.3 प्रतिशत रहा। तीसरी तिमाही के आंकड़े मार्च के अंत तक आने हैं।
अनुसंधान फर्म क्वांटईको के अर्थशास्त्री विवेक कुमार ने कहा कि जीडीपी के आंकड़ों की जानकारी और अगोचर आंकड़ों के संबंध में उनके अनुमानों के आधार पर उन्हें लगता है कि देश का सीएडी वित्त वर्ष 22 की तीसरी तिमाही में जीडीपी के 2.9 प्रतिशत तक बढ़ेगा, जो दूसरी तिमाही में 1.3 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 22 में कुल मिलाकर चालू खाते का समापन सकल घरेलू उत्पाद के 1.6 प्रतिशत घाटे के स्तर पर होने  का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 21 में 0.9 प्रतिशत अधिशेष था।
कुमार ने कहा कि अगर भू-राजनीतिक समाधान निकलने में समय लगता है, तो आगे चलकर वैश्विक जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की वजह से, विशेष रूप से मौजूदा रूस-यूक्रेन संकट के कारण देश के सीएडी पर दबाव बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि इस परिदृश्य में भारत का सीएडी तेल की कीमतों के मौजूदा स्तर पर वित्त वर्ष 23 में संभावित रूप से जीडीपी के 2.6 प्रतिशत स्तर की ओर बढ़ सकता है।

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First Published - March 1, 2022 | 11:04 PM IST

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