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वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, भारत का विदेशी ऋण-सेवा अनुपात 5.3% के संतोषजनक स्तर पर पहुंचा

दीर्घकालिक ऋण कुल विदेशी ऋण का 79.4 प्रतिशत है, जबकि अल्पकालिक ऋण कुल विदेशी ऋण का 20.6 प्रतिशत है।

Last Updated- September 11, 2023 | 12:08 AM IST
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भारत का विदेशी ऋण मार्च, 2023 के अंत तक 624.7 अरब अमेरिकी डॉलर था, और इसका ऋण-सेवा अनुपात 5.3 प्रतिशत है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह संतोषजनक स्तर पर है और देश के लिहाज से यह मामूली है।

GDP में विदेशी ऋण का अनुपात करीब 1.1 घटा

इस महीने की शुरुआत में जारी ‘भारत का विदेशी ऋण: एक स्थिति रिपोर्ट 2022-23’ की प्रस्तावना में सीतारमण ने कहा कि मार्च, 2023 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में विदेशी ऋण का अनुपात एक साल पहले के 20 प्रतिशत से घटकर 18.9 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक ऋण कुल विदेशी ऋण का 79.4 प्रतिशत है, जबकि अल्पकालिक ऋण कुल विदेशी ऋण का 20.6 प्रतिशत है।

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ऋण सेवा अनुपात में हुई मामूली वृद्धि

अल्पकालिक ऋण का इस्तेमाल मुख्य रूप से आयात के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। वित्त मंत्री ने कहा कि पूरे देश के लिहाज से भारत की विदेशी ऋण स्थिति अधिकांश निम्न और मध्यम-आय वाले देशों (एलएमआईसी) की तुलना में बेहतर है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022-23 के दौरान ऋण सेवा अनुपात इससे पिछले वर्ष के 5.2 प्रतिशत से मामूली रूप से बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ऋण सेवा भुगतान 2021-22 में 41.6 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2022-23 में 49.2 अरब डॉलर हो गया है।

First Published - September 10, 2023 | 6:49 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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