facebookmetapixel
Advertisement
Dhoot Transmission IPO: 10 अगस्त से लगा सकेंगे पैसा, जानें क्या है कंपनी की पूरी तैयारीAegeus Technologies IPO: आज खुला ₹23.71 करोड़ का इश्यू , क्या मिलेगा लिस्टिंग गेन? निवेश से पहले जान लें हर जरूरी बातबाल झड़ने से विटिलिगो तक, Sun Pharma के लिए खुल रहे अरबों डॉलर के बाजारRBI MPC Meeting: क्या फिर नहीं बदलेगी ब्याज दर? महंगाई के बीच रीपो रेट पर टिकी बाजार की नजरGold Silver Price Today: हॉर्मुज स्ट्रेट दुबारा खुलने की संभावना से सोना ₹644 तेज, चांदी ₹1,397 चढ़ीट्रंप के टैरिफ के खिलाफ 25 राज्य अदालत पहुंचे, सेक्शन 301 पर क्यों बढ़ा विवाद?Pricol क्यों कर रही है डीमर्जर? कंपनी ने बताया आगे का बड़ा प्लान8% से कम ब्याज पर लोन नहीं! बड़े बिल्डरों को मना कर रही LIC Housing Finance, जानिए क्यों बदली रणनीतिBajaj Finserv Direct के ब्रेक-ईवन का समय तय, कंपनी ने दी नई समयसीमाStock Market Update: सेंसेक्स 100 अंक टूटा, निफ्टी 24,550 के नीचे; Grasim और HDFC Life सबसे बड़े लूजर

AIF के लिए नियम आसान करेगा SEBI, एग्जिट और लिक्विडेशन पर नया प्रस्ताव

Advertisement

नियामक ने प्रस्ताव दिया है कि AIF योजनाओं को तय अवधि खत्म होने के बाद भी कुछ रकम अपने पास रखने की अनुमति दी जा सकती है

Last Updated- February 05, 2026 | 7:07 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) योजनाओं को बंद करने और रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने से जुड़े नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत कुछ तय शर्तों के साथ फंड को अपनी तय अवधि खत्म होने के बाद भी परिसमापन से मिली रकम का एक हिस्सा रखने की अनुमति देने की बात कही गई है। सेबी ने एक कंसल्टेशन पेपर में कहा कि इन प्रस्तावों का मकसद AIF के लिए एग्जिट प्रोसेस को आसान बनाना और ऑपरेशन बंद करने वाले फंड्स के लिए नियमों में स्पष्टता और स्थिरता लाना है।

मौजूदा नियम क्या कहते हैं?

मौजूदा नियमों के तहत, AIF योजनाओं को अपनी अवधि खत्म होने के एक साल के भीतर संपत्तियों का परिसमापन कर निवेशकों में पूरी रकम बांटनी होती है और सभी देनदारियां निपटानी होती हैं। हालांकि सेबी ने कहा कि कई AIF इस अवधि के बाद भी कुछ रकम अपने पास रखे रहते हैं। इसकी वजह लंबित या संभावित कानूनी मामले, टैक्स से जुड़ी मांगें या बाकी ऑपरेशनल खर्च होते हैं। इसी कारण वे अपने रजिस्ट्रेशन सरेंडर नहीं कर पाते।

Also Read: SIF में 360 ONE MF की एंट्री, DynaSIF Equity Long-Short Fund लॉन्च; किसके लिए सही निवेश?

कानूनी मामलों में AIF को राहत का प्रस्ताव

नियामक ने प्रस्ताव दिया है कि AIF योजनाओं को तय अवधि खत्म होने के बाद भी कुछ रकम अपने पास रखने की अनुमति दी जा सकती है। अगर वह रकम चल रहे कानूनी मामलों या टैक्स मांगों की वजह से रोकी गई हो। इसके लिए फंड को यह साबित करना होगा कि उसे टैक्स विभाग, नियामकों या कानून लागू करने वाली एजेंसियों से औपचारिक नोटिस मिला है।

जहां रकम संभावित देनदारियों के लिए रोकी जाती है, वहां सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि ऐसा तभी किया जा सकेगा जब मूल्य के आधार पर कम से कम 75 फीसदी निवेशकों की सहमति हो।

नियामक ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि बचे हुए ऑपरेशनल खर्च, जैसे कानूनी या पेशेवर फीस चुकाने के लिए फंड को सीमित रकम अपने पास रखने की अनुमति दी जाए। इसके लिए बिल या पुराने खर्च के रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज दिखाने होंगे। यह अनुमति अधिकतम तीन साल की अवधि तक ही होगी।

‘इनऑपरेटिव AIF’ के लिए नियम होंगे आसान

अनुपालन का बोझ कम करने के लिए सेबी ने ऐसे फंड्स को “इनऑपरेटिव AIF” के रूप में बांटने का ढांचा प्रस्तावित किया है। इस व्यवस्था के तहत नियामकीय नियमों को काफी हद तक सरल किया जाएगा।

इनऑपरेटिव AIF को तिमाही रिपोर्टिंग, PPM ऑडिट रिपोर्ट और अनुपालन परीक्षण रिपोर्ट से छूट मिलेगी। हालांकि, उन्हें सेबी और निवेशकों को साल में एक बार स्टेट रिपोर्ट देनी होगी। ऐसे फंड नए स्कीम लॉन्च नहीं कर सकेंगे और मैनेजमेंट फीस भी नहीं ले पाएंगे।

सेबी ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि इनऑपरेटिव दर्जा उन AIF पर भी लागू किया जाए जो अपने पास कोई रकम नहीं रखते, लेकिन अनुकूल कानूनी फैसले की उम्मीद में केवल अस्तित्व में बने हुए हैं।

Advertisement
First Published - February 5, 2026 | 7:07 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement