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भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा, FDI हुआ 49 अरब डॉलर

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वैश्विक स्तर पर Foreign Direct Investment में गिरावट के बीच भारत FDI प्राप्त करने वाले देशों की सूची में आठवें पायदान पर रहा

Last Updated- July 06, 2023 | 12:05 AM IST
FDI inflow
Illustration: Binay Sinha

भारत में वर्ष 2022 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 10 फीसदी बढ़कर 49 अरब डॉलर हो गया। इसकी बदौलत भारत विश्व में नई परियोजनाओं की घोषणा करने वाला तीसरा देश बन गया। भारत अंतरराष्ट्रीय परियोजना वित्त सौदों में दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया। यह जानकारी व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (अंकटाड) की रिपोर्ट ने दी।

अंकटाड ने नवीनतम विश्व निवेश रिपोर्ट के हवाले से कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट के रुझान के बीच भारत एफडीआई प्राप्त करने वाले देशों की सूची में आठवें पायदान पर रहा।

रिपोर्ट के अनुसार भारत के बहुराष्ट्रीय उद्यमों (MNE) का 2022 में बाहरी निवेश 16 फीसदी गिरकर 15 अरब डॉलर हो गया। हालांकि इसमें बताया गया, ‘भारत की एमएनई ने नई परियोजनाओं की घोषणा तीन गुनी से अधिक 42 अरब डॉलर पर पहुंच गई। इसमें से दो नई परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में थीं। इस क्रम में एसमी समूह ने मिस्र में सालाना 2.2 अरब हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए 13 अरब डॉलर का प्लांट लगाने की घोषणा की। इसी तरह रिन्यू पॉवर ने स्वेज नहर आर्थिक क्षेत्र में 8 अरब डॉलर से हरित हाइड्रोजन प्लांट लगाने की घोषणा की।’

अंकटाड ने बताया कि 2020 में तेजी से गिरावट आई और फिर 2021 में स्थितियां जबरदस्त ढंग से बेहतर हुईं। वर्ष 2022 में वैश्विक एफडीआई 12 फीसदी की गिरावट के साथ 1.3 लाख करोड़ डॉलर हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘वैश्विक स्तर पर कई संकटों के कारण गिरावट आई थी। इनमें यूक्रेन में युद्ध, खाद्य व ऊर्जा का अधिक मूल्य, ऋण का दबाव आदि थे। सिकुड़ती आर्थिक स्थितियों, बढ़ते ब्याज दरों और पूंजी बाजार में अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए धन जुटाने और सीमा पार विलय और अधिग्रहण पर विशेष रूप से असर पड़ा।’

वैश्विक FDI में विकाशील देशों की हिस्सेदारी 70 फीसदी से अधिक थी। यह 4 फीसदी बढ़कर 916 अरब डॉलर हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, ‘विकासशील देशों में एफडीआई बढ़ने में असमान हिस्सेदारी थी। ज्यादातर हिस्सेदारी बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर केंद्रित रही थी।’

विकासशील देशों में नई परियोजनाओं के निवेश की घोषणाओं में 37 फीसदी वृद्धि हुई और अंतरराष्ट्रीय परियोजना वित्त सौदों में 5 फीसदी की वृद्धि हुई । ‘यह उद्योग और आधारभूत ढांचे में निवेश के मायने में सकारात्मक संकेत है।’

अंकटाड ने बताया कि भारत में सबसे बड़ी घोषित नई परियोजनाओं में से एक फॉक्सकॉन और वेदांता रिसोर्सेज की 19 अरब डॉलर की लागत से देश में पहली चिप फैक्टरी की स्थापना है। इसी तरह फ्रांस की टोटल एनर्जिस और अदाणी समूह का हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए पांच अरब डालर का संयुक्त उपक्रम है। पॉस्को और अदाणी समूह ने गुजरात में 5 अरब डॉलर की लागत से स्टील मिल का निर्माण करेंगे जिससे परियोजना वित्त सौदे में 64 फीसदी की वृद्धि हुई।

2023 में वैश्विक व्यापार और सीमा पार निवेश के लिए चुनौतियां कायम रहीं। साल 2022 में आर्थिक निवेश के लिए चुनौतियां कुछ कम हुई हैं लेकिन वे खत्म नहीं हुई हैं।

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First Published - July 6, 2023 | 12:05 AM IST

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