facebookmetapixel
RBI MPC Meet: रीपो रेट 5.25% पर बरकरार, FY26 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.4%Gold, Silver Price Today: सोना हुआ सस्ता, चांदी की चमक भी पड़ी फीकी‘वेनेजुएला हमारा पुराना ऊर्जा साझेदार’अमेरिका संग पूर्ण व्यापार समझौता जल्द, भारत-US द्विपक्षीय साझेदारी को मिलेगी नई दिशा: जयशंकरसुपरटेक की 16 अटकी परियोजनाएं NBCC पूरी करेगीभारत से जुड़ने को बेताब दुनिया, कांग्रेस कभी मेरी कब्र नहीं खोद पाएगी; राज्यसभा में बोले PM मोदीपशु परीक्षण के बिना 90% तक घटेगी दवाओं की लागतएडवर्ब जल्द लॉन्च करेगी भारत का पहियों वाला ह्यूमनॉइड रोबॉटकॉग्निजेंट ने कर्मचारियों को दिया 100 फीसदी बोनसभारत को ज्यादा ऊर्जा आपूर्ति की योजना बना रही टोटालएनर्जीज

हर पांचवां MSME विकसित देशों की आर्थिक सुस्ती की चपेट मेंः रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक, रत्न एवं आभूषण, निर्माण और रंग एवं रंगीन द्रव्य जैसे क्षेत्रों में सक्रिय छोटी इकाइयों को पहले से ही अधिक कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ रही है।

Last Updated- June 26, 2023 | 5:58 PM IST
MSMEs

देश के कुल निर्यात में लगभग 40 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले छोटे उद्यमों को अमेरिका एवं यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों में आसन्न आर्थिक सुस्ती से प्रतिकूल हालात का सामना करना पड़ सकता है। एक रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, देश के पांच में से एक MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम क्षेत्र) को चालू वित्त वर्ष में महामारी से पहले की तुलना में अधिक कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ेगी। अमेरिकी एवं यूरोपीय बाजारों की भारत के कुल निर्यात में एक-तिहाई हिस्सेदारी है। ऐसे में इन दोनों बाजारों में आर्थिक सुस्ती की स्थिति देखते हुए घरेलू MSME इकायों पर बोझ पड़ने की आशंका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रत्न एवं आभूषण, निर्माण और रंग एवं रंगीन द्रव्य जैसे क्षेत्रों में सक्रिय छोटी इकाइयों को पहले से ही अधिक कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ रही है। इस अध्ययन में 69 क्षेत्रों और 147 संकुलों में सक्रिय MSME को शामिल किया गया है जिनका कुल राजस्व 63 लाख करोड़ रुपये है जो कि पिछले वित्त वर्ष में देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का करीब एक-चौथाई है।

क्रिसिल के निदेशक पुशान शर्मा ने कहा कि निर्यात पर केंद्रित MSME इकाइयों, खासकर सूरत एवं अहमदाबाद में स्थित इकाइयों को कोविड महामारी से पहले की तुलना में इस वित्त वर्ष में अधिक कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ेगी।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद संकुल वाली इकाइयों को 20-25 दिनों के लिए कार्यशील पूंजी बढ़ानी पड़ सकती है जबकि हीरा प्रसंस्करण के लिए मशहूर सूरत संकुल के लिए यह जरूरत 35 दिनों तक जा सकती है।

First Published - June 26, 2023 | 5:58 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट