facebookmetapixel
Advertisement
Bank Strike on 12 Feb: बैंक ग्राहकों के लिए बड़ा अलर्ट! SBI समेत देशभर के बैंक कल रहेंगे बंद; ये सेवाएं रहेंगी प्रभावितजॉब जॉइनिंग में अब नहीं होगी देरी! Aadhaar App से मिनटों में बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, जानें डीटेल्सऑफिस का किराया आसमान पर! REITs के लिए खुला कमाई का सुपर साइकिलभारत से ट्रेड डील की फैक्ट शीट में US ने किया संसोधन; दालें हटाई गईं, $500 अरब खरीद क्लॉज भी बदलामौजूदा स्तर से 33% चढ़ेगा हॉस्पिटल कंपनी का शेयर! ब्रोकरेज ने कहा- वैल्यूएशन है अच्छा; न चूकें मौकाGold Silver Price Today: सोने चांदी की कीमतों में उछाल, खरीदारी से पहले चेक करें आज के दामMSCI में फेरबदल: IRCTC इंडेक्स से बाहर, L&T Finance समेत इन स्टॉक्स में बढ़ सकता है विदेशी निवेशQ3 नतीजों के बाद 50% से ज्यादा चढ़ सकता है रेस्टोरेंट कंपनी का शेयर, ब्रोकरेज बोले – लगाओ दांवसेना के हथियारों पर अब भारत का पूरा नियंत्रण, नई रक्षा नीति से बदलेगा डिफेंस सिस्टमनिफ्टी के उतार-चढ़ाव के बीच NTPC और CPSE ETF में बना मौका, ब्रोकरेज ने बताए टारगेट

DESH Bill: देश विधेयक की तैयारी कर रही सरकार

Advertisement
Last Updated- December 25, 2022 | 10:34 PM IST
slow growth year

डेवलपमेंट एंटरप्राइज ऐंड सर्विसेज हब (DESH) विधेयक में कंपनियों को निवेश,अत्या​धुनिक प्रौद्योगिकी, रोजगार सृजन और निर्यात में से किसी भी एक का वादा करने की जरूरत हो सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि इससे अंततः अर्थव्यवस्था और वृद्धि को रफ्तार मिलेगी। इस विधेयक का उद्देश्य मौजूदा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) कानून को बदलना है। विधेयक पर काम चल रहा है और वाणिज्य विभाग इसे अंतिम रूप देने की तैयारी में है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि सरकार कंपनियों को उनकी पसंद के अनुसार इनमें से किसी भी एक कसौटी पर खरा उतरने की छूट देगी। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि इन कंपनियों के लिए निर्यात ही इकलौती जिम्मेदारी न हो। इस प्रकार प्रस्तावित कानून विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के भी अनुकूल बन जाएगा।

देश विधेयक में केवल व्यापक श्रेणियों का उल्लेख होगा लेकिन हरेक श्रेणी के लिए प्रतिबद्धता एवं अन्य महत्त्वपूर्ण विवरण वाणिज्य विभाग द्वारा तैयार किए जाएंगे। संसद में इस विधेयक के पारित होने के बाद इसे नियमों के एक भाग के रूप में लागू किया जाएगा। एक वरिष्ठ सरकारी अ​धिकारी ने बताया, ‘अपनी इकाइयां स्थापित करने जा रही कंपनियों को निश्चित मात्रा में निवेश, नि​श्चित संख्या में रोजगार सृजन, निश्चित मूल्य में निर्यात या अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का वादा या संकल्प करना होगा। सरकार उन्हें इनमें से कोई एक चुनने की छूट जरूर देगी। इससे सुनि​श्चित होगा कि उन्हें इस कानून के तहत कर लाभ मिले और अंतत: अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो।’

उद्योगों के साथ हो रहा हैं विचार-विमर्श

इससे वित्त मंत्रालय की वह चिंता भी दूर होगी कि इकाइयां किसी निर्यात दायित्व या एनएफई मानदंड के अभाव में सीमा शुल्क भुगतान टालने के लिए खुद को एसईजेड घोषित न कर दें। अ​धिकारी ने कहा कि यह विधेयक तैयार करने से पहले वित्त मंत्रालय के साथ भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘इस संबंध में उद्योग के साथ विचार-विमर्श भी किया जा रहा है।’

मौजूदा कानून के तहत एसईजेड में मौजूद इकाइयों के लिए शुद्ध विदेशी मुद्रा आय (NFE) हासिल करना यानी आयात के मुकालबे निर्यात का मूल्य अधिक रखना अनिवार्य है। इन इकाइयों का एनएफई सकारात्मक होने के कारण सरकार से सब्सिडी और कर में छूट मिलती है। करीब तीन साल पहले इसके कारण विश्व व्यापार संगठन में विवाद पैदा हो गया था।

वा​णिज्य विभाग ने विधेयक का पहला मसौदा जून में ही तैयार कर लिया था लेकिन राजस्व विभाग ने प्रस्तावित राजकोषीय प्रोत्साहन पर एतराज जताया। उसने यह भी कहा कि विकास केंद्रों को देसी बाजार के साथ जोड़ने के मामले में विधेयक जरूरत से ज्यादा दरियादिली दिखा रहा है। इसके कारण घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) इकाइयां भी ये लाभ हासिल करने की मंशा जता सकती हैं और देश विधेयक के तहत कर रियायत से होने वाले कार्यशील पूंजी लाभ के कारण इन केंद्रों में स्थानांतरित हो सकती हैं। राजस्व विभाग ने आशंका जताई है कि ऐसे में वस्तुओं को निर्यात करने के बजाय देसी बाजार में बेचा जा सकता है।

Advertisement
First Published - December 25, 2022 | 7:51 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement