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विप्रो ने दूसरी नौकरी वाले 300 निकाले

Last Updated- December 11, 2022 | 3:18 PM IST

विप्रो के चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने आज बताया कि उनकी कंपनी ने ऐसे 300 कर्मचारी बर्खास्त कर दिए हैं, जो विप्रो के साथ दूसरी कंपनियों के लिए भी काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘मूनलाइटिंग’ के बारे में उनकी राय पहले जैसी ही है और यह कंपनी के प्रति निष्ठा का सरासर उल्लंघन है। जब कोई कर्मचारी अपनी नियमित नौकरी के साथ ही चोरी-छिपे दूसरी जगह भी काम करता है तो उसे ‘मूनलाइटिंग’ कहा जाता है। 
अखिल भारतीय प्रबंधन संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रेमजी ने कहा, ‘वास्तविकता यह है कि आज ऐसे लोग हैं जो विप्रो के साथ-साथ हमारी किसी न किसी प्रतिद्वंद्वी कंपनी के लिए भी काम कर रहे हैं। हमने पिछले कुछ महीनों में ऐसा करने वाले 300 कर्मचारियों का पता लगाया है। कंपनी में ऐसे कर्मचारियों के लिए कोई जगह नहीं है, जो विप्रो के साथ काम करते हुए प्रतिद्वंद्वी कंपनियों में भी काम कर रहे हैं।’ बाद में इस बारे में पूछे जाने पर प्रेमजी ने बताया कि उन कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। 

हालांकि प्रेमजी ने कहा कि पारदर्शिता बरतते हुए व्यक्ति सप्ताहांत में किसी परियोजना पर काम करने के बारे में स्पष्ट और खुली बातचीत कर सकता है। लेकिन कंपनी में ऐसे कर्मचारियों के लिए कोई जगह नहीं है, जो विप्रो के साथ काम करते हुए प्रतिद्वंद्वी कंपनियों में भी काम कर रहे हैं। इस बारे में जानकारी के लिए विप्रो को ईमेल भेजा गया लेकिन उसका जवाब नहीं आया।
हाल ही में इन्फोसिस के सह-संस्थापक और पूर्व मुख्य कार्या​धिकारी क्रिस गोपालकृष्णन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘अगर आप अपने काम को 100 फीसदी देना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध होना होगा। अगर आप भरोसा जीतना चाहते हैं तो एक संस्थान के साथ काम करना चाहिए। आप एक साथ 2-3 कंपनियों के लिए कैसे काम कर सकते हैं।’ हालांकि उन्होंने कहा कि एक संस्थान में काम करते हुए आप किसी परोपकारी या गैर-सरकारी संगठन में किसी नेक पहल के लिए काम सकते हैं।

मूनलाइटिंग पर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में चिंता जताई जा रही है क्योंकि काफी कर्मचारी घर से भी काम कर रहे हैं।  ​स्विगी ने कुछ समय पहले इस व्यवस्था की अनुमति दे दी थी।  इन्फोसिस ने हाल ही में अपने कर्मचारियों को भेजे संदेश में कहा है कि दो जगहों पर काम करने या ‘मूनलाइटिंग’ की अनुमति नहीं है। अनुबंध के किसी भी उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी तथा नौकरी से निकाला भी जा सकता है। आईबीएम के प्रबंध निदेशक (भारत और दक्षिण एशिया) संदीप पटेल ने पिछले सप्ताह कहा था कि कर्मचारी अपने बाकी समय में जो चाहें करें मगर मूनलाइटिंग नैतिक रूप से सही नहीं है।

First Published - September 21, 2022 | 9:40 PM IST

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