facebookmetapixel
Advertisement
उत्तर-पश्चिम भारत की तरफ तेजी से बढ़ा मानसून, अगले 4 दिनों में इन राज्यों को पूरी तरह भिगोने की तैयारीE20 फ्यूल से गाड़ी का इंजन खराब होगा और माइलेज कम मिलेगा? इस मुद्दे पर ऑटो दिग्गजों ने रखा अपना पक्षकिसानों को बड़ी राहत! सरकार ने प्याज की सरकारी खरीद कीमत 13.3% बढ़ाई, अब मिलेगा यह नया भावक्या कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस के बाद भी आपको हॉस्पिटल को देना पड़ा पैसा? एक्सपर्ट से जानिए इसकी असली वजहDividend Stocks: अगले हफ्ते एक्सिस बैंक, टाटा, JSW समेत 45 कंपनियां बाटेंगी बंपर मुनाफा, नोट करें रिकॉर्ड डेटटेलीग्राम पर सरकार का सख्त, फिल्मों-वेब सीरीज की पायरेसी रोकने के लिए दिया 15 दिन का अल्टीमेटममुफ्त शेयरों की बरसात! अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां दे रही हैं बोनस शेयर, नोट कर लें रिकॉर्ड डेटशेयर बाजार में धमाका: अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां दे रही हैं 1 के बदले 10 शेयर, नोट कर लें तारीख!यूपी सरकार ने FY27 के लिए तय किया ₹71,278 करोड़ का भारी-भरकम आबकारी लक्ष्य, पहले तीन महीने में रिकॉर्ड कमाईअब उत्तर प्रदेश से सीधे विदेश जाएगा आम, हॉट वेपर ट्रीटमेंट की व्यवस्था राज्य में ही करने जा रही योगी सरकार

विलय अधिग्रहण की गाड़ी नहीं भर पाई पहले जैसी रफ्तार

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 5:14 PM IST

जगुआर और लैंड रोवर के अधिग्रहण पर टाटा की पीठ तो ठोंकी ही जा रही है, भारतीय कॉर्पोरेट ताकत के गुण भी गाए जा रहे हैं। तकरीबन 9,200 करोड़ रुपये के इस सौदे की चर्चा भी लाजिमी है।


लेकिन अगर ऐसे एक-दो सौदों को छोड़ दें, तो विदेशों में विलय-अधिग्रहण की भारतीय गाड़ी इस बार रफ्तार नहीं भर पाई है।इस साल अभी तक भारतीय कंपनियों ने कुल 19,600 करोड़ रुपये के विलय और अधिग्रहण सौदे किए हैं। इसमें तकरीबन आधा हिस्सा तो जगुआर-लैंड रोवर सौदे का ही है। पिछले साल के शुरुआती ढाई महीने की बात करें, तो यह आंकड़ा बेहद कम है। पिछले साल इसी अवधि में भारतीय कंपनियों ने तकरीबन  31,200 करोड़ रुपये के सौदे कर लिए थे।


थॉमसन फाइनैंशियल के आंकड़ों के मुताबिक दोतरफा सौदों में तो हालत और भी खराब रही है। विदेशों में भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण सौदे और विदेशी कंपनियों के हाथों यहां की कंपनियों के अधिग्रहण में लगभग 34,360 करोड़ रुपये के सौदे हुए हैं। पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले यह आंकड़ा तकरीबन 70.2 फीसदी कम है। पिछली बार यह आंकड़ा 117,200 करोड़ रुपये के करीब था।


इसके पीछे शेयर बाजार की उठापटक भी बड़ी वजह रही है। अमेरिकी सब प्राइम संकट ने भी अहम भूमिका निभाई है। इसी वजह से कई भारतीय कंपनियों की पूंजी कम हो गई और उनके सौदों पर भी फर्क पड़ा। कई विदेशी कंपनियां भी इसी वजह से भारत में अधिग्रहण या विलय करने से हिचकिचा गईं।


जगुआर और टाटा मोटर्स का सौदा बेशक इस साल का सबसे बड़ा अधिग्रहण सौदा रहा। देशी कंपनियों के सौदों की बात करें, तो यह चौथे नंबर पर आता है। टाटा समूह की दूसरी कंपनी टाटा केमिकल्स लिमिटेड इस मामले में 2008 में दूसरे नंबर पर रही है। यह कंपनी अमेरिकी सोडा एश निर्माता कंपनी जनरल केमिकल इंडस्ट्रियल में स्टेक खरीद रही है। इस सौदे में तकरीबन 4,000 करोड़ रुपये खर्च?किए जा रहे हैं।


भारतीय कंपनियों ने विदेशी कंपनियों े  साथ इस साल जो 4 अन्य प्रमुख सौदे किए हैं, उनमें नॉर्वे की जेबी उगलैंड शिपिंग एएस का अधिग्रहण शामिल है। उसका अधिग्रहण शिवा वेंचर्स ने 1,209 करोड़ रुपये में किया है। इंडियाबुल्स रियल एस्टेट, सोना कोयो और इंडिया वैल्यू फंड का भी नाम इस फेहरिस्त में शामिल है। लेकिन उनको छोड़ दिया जाए, तो भारतीय कंपनियां विलय-अधिग्रहण से परहेज कर रही हैं।

Advertisement
First Published - March 28, 2008 | 1:10 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement