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टोनी का हिस्सा खरीदेंगे टाटा

Last Updated- December 15, 2022 | 4:04 AM IST

टाटा समूह अपने संयुक्त उपक्रम वाली विमानन कंपनी एयर एशिया इंडिया में एयर एशिया समूह से 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए बात कर रहा है। 5 करोड़ डॉलर के अपने निकास मूल्य पर मलेशियाई विमानन समूह के रुख नरम होने के बाद टाटा समूह इस दिशा में आगे बढऩे पर विचार कर रहा है।
घटनाक्रम के जानकार सूत्र ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण एयर एशिया बरहाद एवं एयर एशिया इंडिया दोनों को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इससे विमानन कंपनी के मूल्यांकन पर भी असर पड़ा है और विदेशी साझेदार ने अपनी हिस्सेदारी के मूल्य में कमी की है।
सूत्र ने कहा, ‘एयर एशिया इंडिया और एयर एशिया के प्रवर्तक टोनी फर्नांडिस के खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई का डर भी एक वजह है, जिससे विदेशी साझेदार भारत से निकलना चाह रहा है।’
सूत्रों ने कहा कि एयर इंडिया के विनिवेश की समयसीमा (अगस्त मध्य) खत्म होने से पहले टाटा समूह घाटे वाली भारतीय विमानन कंपनी में एयर एशिया समूह की हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया में तेजी लाना चाहता है। सूत्रों ने कहा, ‘टाटा एयर इंडिया को बोली के लिए वित्तीय साझेदार से गठजोड़ करने का विकल्प भी तलाश सकता है। असल में संभावित वित्तीय साझेदार ने संकेत दिया है कि वह टाटा की 51 फीसदी हिस्सेदारी वाली एयर एशिया इंडिया में किसी तरह की अनिश्चितता नहीं चाहता है।’ टोनी की पेशकश पर बातचीत के बाद अंतिम निर्णय अगस्त में लिया जा सकता है। इस बारे में जानकारी के लिए टाटा संस को ईमेल भेजा गया लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने 24 मार्च से देश भर में लॉकडाउन लगाने का ऐलान किया था। इसके कारण कंपनी के 30 विमानों का परिचालन ठप हो गया और बाद में कुछ घरेलू उड़ानें संचालित की जाने लगीं। इन सब वजहों से भी कंपनी को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। मार्च 2020 तिमाही में एयर एशिया इंडिया को 330 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था जबकि आय 928 करोड़ रुपये रही थी। मार्च 2019 में कंपनी का घाटा 147 करोड़ रुपये था और आय 631 करोड़ रुपये थी।
सूत्रों ने कहा, ‘एयर एशिया इंडिया को प्रवर्तकों की ओर से तत्काल पूंजी की जरूरत है मगर एयर एशिया समूह कंपनी में और निवेश करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए उन्होंने कम मूल्यांकन पर अपना हिस्सा बेचने के लिए टाटा से संपर्क किया है। अब यह टाटा पर है कि वह क्या निर्णय करता है।’ कंपनी पर टाटा का पूर्ण स्वामित्व होने के बाद समूह इसके ब्रांड नाम सहित परिचालन के बारे में आगे निर्णय कर सकता है।
टाटा से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि फर्नांडिस द्वारा नियुक्त प्रबंधन के तहत विमानन कंपनी के परिचालन से भी टाटा समूह खुश नहीं था क्योंकि इसकी वजह से कई तरह की जांच का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए जितना जल्दी हो टाटा समूह यह साझेदारी खत्म करना चाहता है।
कुआलालंपुर स्टॉक एक्सचेेंज पर इस साल अब तक एयर एश्यिा समूह का शेयर 62 फीसदी नीचे चला गया है और समूह को अपने प्रमुख बाजार में कारोबार को सुधारने के लिए नकदी की तत्काल जरूरत है।

First Published - July 30, 2020 | 10:51 PM IST

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