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बढ़ती ब्याज दर और लागत है सबसे बड़ी चिंता: संजीव गोयनका

Last Updated- December 07, 2022 | 2:47 PM IST

कोलकाता में बिजली उत्पादन और वितरण क्षेत्र की कंपनी सीईएससी अपनी उत्पादन क्षमता और वितरण नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बना रही है।


आरपीजी समूह की इस निजी बिजली उत्पादन इकाई के उपाध्यक्ष संजीव गोयनका महानगरों में बिजली की बढ़ती मांग के कारण इसकी कीमत में कमी होने की संभावना को लेकर आश्वस्त हैं। संजीव गोयनका ने कंपनी की विस्तार योजनाओं के बारे में बात की हमारे संवाददाता प्रदीप गुप्तु से। मुख्य अंश:

बढ़ते ब्याज दर और कच्चे माल की बढ़ती कीमत का सीईएससी पर क्या असर पड़ रहा है?

बढ़ी ब्याज दर हमारे और हमारे ग्राहकों के लिए चिंता का कारण है। क्योंकि इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी भी चिंता का कारण है। इसमें इजाफा होने से लागत में भी जबरदस्त इजाफा होता है और फिर बिजली के बढ़ती कीमतों के रूप में इसका असर उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है। कंपनी के बिजली उत्पादन संयंत्र पूरी तरह से कोयला आधारित हैं, इसीलिए कोयले की बढ़ती कीमत हमारे लिए काफी चिंताजनक है। कोयले की कीमत धीरे धीरे बढ़ रही है जिस कारण कीमतों में कमी आने की भी कोई उम्मीद नहीं है। वैश्विक स्तर पर भी कोयले की कीमत बढ़ ही रही है। 

बिजली की कीमत तय करने के लिए कंपनी को कितनी छूट है?

पश्चिम बंगाल बिजली नियामक आयोग (डब्ल्यूबीईआरसी) के नियमों के मुताबिक हमें बिजली की कीमत तय करने की पूरी आजादी है। एक कंपनी होने के नाते हम खुश हैं कि हमारे आंकड़े नियामक द्वारा तय किए जाते हैं। दरअसल इससे हमारे आंकड़ों को विश्वसनीयता मिलती है। इससे हमारे घरेलू और औद्योगिक ग्राहकों का भी हम पर विश्वास बना रहता है कि हमारे आंकड़े सही होते हैं।

हाल ही में बिजली लाइसेंस के मामले में दिए गए कोलकाता उच्च न्यायालय के फैसले का क्या असर होगा?

न्यायालय के इस फैसले का सभी हालिया बिजली लाइसेंस उत्पादन कंपनियों पर पड़ेगा। लेकिन सीईएससी पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि  हमारे पास साल 2019 तक बिजली के वितरण के एक्सक्लूसिव अधिकार हैं। हमारे लाइसेंस में यह सब बातें बिल्कुल साफ हैं। हमने अभी तक अपने वितरण क्षेत्र के विस्तार को लेकर कोई आवेदन नहीं किया है।

भविष्य की संभावनाओं के बारे में क्या कहेंगे?

फिलहाल तो हम काफी अच्छा कर रहे हैं। इस साल की पहली तिमाही में कंपनी की कार्यक्षमता और मांग में भी काफी इजाफा हुआ है। हमें उम्मीद है कि हम इसे साल भर बनाए रखेंगे। कंपनी को ट्रांसमिशन और वितरण के दौरान होने वाला नुकसान 15 फीसदी से कम है और हमारी इकाइयों का लोड फैक्टर 97 फीसदी है। इसी कारण ही हम इतने समय से कम कीमतों पर बिजली मुहैया कराने में सफल रहे हैं।

देश में बिजली की मांग के बारे में आपका क्या कहना है?

जिन इलाकों में हम बिजली की आपूर्ति करते हैं उन इलाकों में हाई- टेंशन उपभोक्ताओं की संख्या घटने और लो- टेंशन के उपभोक्ताओं की संख्या में लगातार इजाफा होने के कारण वहां बदलाव कार्य जारी है। हम बिजली की मांग में 8 फीसदी से भी ज्यादा इजाफे की उम्मीद कर रहे हैं। कोलकाता के जूट उद्योग समेत सभी उद्योग अच्छा कर रहे हैं। इसके अलावा शहर में बड़े स्तर पर मॉल खुल रहे हैं। लोगों के जीवन स्तर में काफी बदलाव आया है। बड़ी तादाद में एयरकंडीशनर और वाशिंग मशीन जैसे बिजली उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के  कारण बिजली की मांग में काफी इजाफा होने वाला है।

बिजली उद्योग के सामने क्या चुनौतियां हैं?

सीईएससी अपनी इकाइयों की क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है। क्योंकि खरीदी हुई बिजली काफी महंगी पड़ती है। 2009-10 तक हम कोलकाता के नजदीक बजबज में 250 मेगावाट का संयत्र भी लगाने वाले हैं।  लेकिन पश्चिम बंगाल में हल्दिया, झारखंड और उड़ीसा के संयंत्रों की क्षमता के विस्तार में काफी समय लगेगा। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है कम से कम निवेश कर अपनी क्षमता में हजारों वाट का इजाफा करना।

कोयले की आपूर्ति के बारे में क्या करेंगे?

फिलहाल तो कंपनी की आधी कोयला जरूरत को कंपनी की कोयला खदान ही पूरा कर रही हैं। लेकिन हम चाहते हैं कि हमारे संयंत्रों को हमारी कोयला खदानों से ही सारी आपूर्ति की जाए। इसके लिए हमने निजी कोयला खदानों के लिए आवेदन भी कर दिया है।

अब तो सीईएससी की रिटेल इकाई भी है। इसका क्या योगदान है?

हमारे रिटेल कारोबार में प्रति वर्ग फीट बिक्री की मार्जिन में इजाफा हो रहा है। इससे हमारी पहुंच और कारोबार दोनों ही बढ़ रहा है। हालांकि शुरुआत में होने वाला घाटा अगले एक साल तक होता ही रहेगा।

First Published - August 4, 2008 | 2:18 AM IST

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