facebookmetapixel
Advertisement
RCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुखसंघर्ष बढ़ने के भय से कच्चे तेल में 4% की उछाल, कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर के पारGold Rate: तेल महंगा होने से सोना 2% फिसला, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोरEditorial: दिवालिया समाधान से CSR और ऑडिट सुधार तक बड़े बदलावसरकारी बैंकों में प्रमोशन के पीछे की कहानी और सुधार की बढ़ती जरूरत​युद्ध और उभरती भू-राजनीतिक दरारें: पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दियापीएम मोदी 28 मार्च को करेंगे जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन; यूपी में पर्यटन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स को नई उड़ान

ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियां 28% GST से नाखुश, फैसले को खामियों से भरा और गैरकानूनी बताया

Advertisement

ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों ने तर्क दिया कि यह कर मूल रूप से खामियों से भरा है और कानूनी व्यवस्था के विपरीत है।

Last Updated- July 16, 2025 | 9:44 AM IST
GST

ऑनलाइन रियल-मनी Gaming Conpanies ने मंगलवार को अपनी सेवाओं पर 28 फीसदी वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगाने का विरोध किया और तर्क दिया कि यह कर मूल रूप से खामियों से भरा है और कानूनी व्यवस्था के विपरीत है।

ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों (याचिकाकर्ताओं) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. श्रीधरन ने तर्क दिया कि अधिकारियों ने जिस तरह से कोशिश की, उस हिसाब से अक्टूबर 2023 से पहले के जीएसटी प्रावधान ऑनलाइन गेमिंग ऑपरेटरों पर 28 फीसदी कर लगाने के लिए अपर्याप्त थे। 2018 में लागू किए गए जीएसटी नियमों के नियम 31ए (लॉटरी, सट्टा, जुआ और घुड़दौड़ के मामले में आपूर्ति का मूल्य) पर सरकार के आधार को चुनौती दी गई क्योंकि इस नियम में केंद्रीय जीएसटी अधिनियम के तहत सांविधिक अधिकार का अभाव था।

श्रीधरन ने तर्क दिया कि नियम 31ए, (जो सट्टेबाजी और जुए के मूल्यांकन तरीके निर्धारित करता है) सीजीएसटी अधिनियम की धारा 15(5) के तहत अनिवार्य दो चरण वाली प्रक्रिया का अनुपालन नहीं करता। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से यह नियम कार्रवाई योग्य दावों को कर योग्य आपूर्ति के रूप में पहले ही अधिसूचित किए बिना जारी किया गया था, जिससे यह अप्रभावी और अमान्य हो गया।

उन्होंने तर्क दिया कि वस्तु दर अधिसूचना में संशोधन करके सट्टेबाजी और जुए जैसे कार्रवाई योग्य दावों पर वस्तु के रूप में कर लगाने के प्रयास भी त्रुटिपूर्ण थे। 1 अक्टूबर, 2023 तक सीमा शुल्क टैरिफ अनुसूची में कार्रवाई योग्य दावों के लिए कोई प्रविष्टि नहीं थी, जिससे जीएसटी के तहत उन्हें वस्तु के रूप में वर्गीकृत करना अव्यावहारिक हो गया।

Advertisement
First Published - July 16, 2025 | 9:44 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement