एयर इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने शुक्रवार को कहा कि कंपनी ने बैठक बुलाकर उड़ानों में समय परिवर्तन करने का फैसला लिया है। साथ ही कंपनी ने निर्धारित समय पर उड़ान न होने और उसमें देरी के लिए कारण बताने का निर्देश दिया है ताकि सही समय पर उड़ानों का परिचालन किया
जा सके। इस साल के मार्च में विमानन नियामक डीजीसीए ने एयर इंडिया को अपने समर शेड्यूल में प्रति सप्ताह 2,456 उड़ान भरने की अनुमति दी थी। 27 मार्च से शुरू हुआ यह शेड्यूल 22 अक्टूबर को समाप्त होगा।
विल्सन ने कर्मचारियों को बताया कि विमानन कंपनी बेहतर कस्टमर फेसिंग सिस्टम को अपना रही है ताकि यात्रियों को समय-सारणी में बदलाव और देरी के बारे में पहले से ही सचेत किया जा सके। इससे उन्हें अपनी सुविधानुसार विमान बदलने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि अपने एयर इंडिया के साथियों और ग्राहकों से बातचीत के दौरान मैंने यह पाया कि ज्यादातर लोग हमसे समय की पाबंदी और विश्वसनीयता के साथ किसी भी तरह की परेशानी की स्थिति में बेहतर ढंग से निपटने की अपेक्षा कर रहे हैं।
डीजीसीए के मुताबिक, जुलाई में एयर इंडिया की चार महानगरों के हवाईअड्डों (बेंगलूरु, दिल्ली, हैदराबाद और मुंबई) से समय पर उड़ान का प्रदर्शन 83 फीसदी था जो कि एयरएशिया इंडिया, विस्तारा और गो फर्स्ट से कम है।
विल्सन ने कहा कि प्रदर्शन में सुधार के लिए विमानन कंपनी की विभिन्न परिचालन टीम, नेटवर्क प्लानिंग, इंजीनियरिंग, ग्राउंड सर्विसेज और इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (आईओसीसी) जैसे विभिन्न विभागों के कर्मचारी ने विंटर शेड्यूल के लिए आगामी उड़ान कार्यक्रम का व्यापक मूल्यांकन किया। विंटर शेड्यूल इस साल 22 अक्टूबर से अगले साल 23 मार्च तक रहेगा।
आईओसीसी विमानन कंपनी का मुख्य भाग है जो साल भर की उड़ानों का प्रबंधन करता है। जुलाई में घरेलू बाजार में 8.4 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली एयरलाइन हवाईअड्डे से संबंधित मुद्दों को बेहतर तरीके से समझने के लिये एक हवाईअड्डा/ केंद्र नियंत्रण/ क्षेत्रीय नियंत्रण समन्वय टीम भी स्थापित करेगी।