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एलआईसी आईपीओ नहीं आएगा इस वर्ष!

Last Updated- December 15, 2022 | 1:58 AM IST

शुरुआत में काफी उत्साह जताने के बाद अब सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को अहसास हो गया है कि उसका बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गंम (आईपीओ) शायद चालू वित्त वर्ष में नहीं आ सकता है। बीमा दिग्गज के मूल्यांंकन प्रक्रिया में देरी होने की वजह से आईपीओ लाने की योजना भी आगे खिसक सकती है।
मामले के जानकार एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि संपत्ति के मूल्यांकनकर्ता की नियुक्ति अभी होनी है और इस वक्त नियुक्ति हो जाती है तो भी मूल्ल्यांकन प्रक्रिया में 6 से 8 महीने लग सकते हैं क्योंकि एलआईसी की परिसंपत्ति काफी ज्यादा है।
सरकार के वरिष्ठ नीति निर्माताओं को भी पता है कि कोविड महामारी की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 का 2.1 लाख करोड़ रुपये का महत्त्वाकांक्षी विनिवेश लक्ष्य हासिल नहीं हो पाएगा। हालांकि कुछ बड़ी हिस्सेदारी बेचकर इस लक्ष्य को हासिल करने के पक्ष में हैं। एलआईसी का आईपीओ इसी योजना का हिस्सा है।
लेेकिन चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही करीब-करीब निकल चुकी है, ऐसे में एलआईसी जैसी बड़ी कंपनी का आईपीओ लाना इतने कम समय में सरकार के लिए संभव नहीं होगा।
एक अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘एलआईसी जैसी कंपनी के कारोबारी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कम समय में किया जा सकता है। लेकिन भूखंड तथा अन्य परिसंपत्तियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।’ उन्होंने कहा कि परिसंपत्ति के मूल्यांकनकर्ता की नियुक्ति में अभी महीने और लग सकते हैं।
निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने एललआईसी के लिए आईपीओ-पूर्व लेेनदेन सलाहकार के तौर पर एसबीआई कैप्स और डेलॉयट को नियुक्त किया है। लेेकिन संपत्ति मूल्यांकनकर्ता और कानूनी सलाहकार को नियुक्त करने के लिए आशय पत्र भी जारी नहीं किया गया है। मूल्यांकनकर्ता कंपनी के उत्पादों, संपत्तियों, निवेश तथा भूखंड आदि के आधार पर कंपनी के निहित मूल्य का निर्धारण करता है।
आईपीओ लाने के लिए सरकार को एलआईसी अअधिनियम, 1956 में भी कुछ संशोधन करने होंगे। हालांकि अधिनियम में संशोधन को मॉॅनसून सत्र में पेश किया जा सकता है लेकिन पहले से ही कई विधायी एजेंडे के बीच देखना होगा कि यह पारित हो पाता है या नहीं।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘कानून में संशोधन के बिना आईपीओ लाना संभव नहीं होगा। एलआईसी अधिनियम, 1956 में 6 संशोधन के प्रस्ताव हैं। इसमें एलआईसी को सांविधिक निकाय  बताने वाले खंड को भी बदलकर उसे कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कंपनी के तौर पर परिभाषित करना होगा।’ इसके अलावा बोर्ड की संरचना एवं पुनर्गठन, मुनाफा साझेदारी, लाभांश वितरण, चुकता पूंजी के विस्तार, आरिक्षत कोष आदि से जुड़े प्रावधानों में भी संशोधन करना होगा।

First Published - September 14, 2020 | 11:38 PM IST

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