केंद्र सरकार ने निजी इस्तेमाल वाली कैप्टिव खदानों से उत्पादित कोयले और लिग्नाइट की बिक्री पर मौजूदा 50 फीसदी की सीमा को हटाने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम का मकसद जमा स्टॉक को खत्म करना और बाजार में खनिज की उपलब्धता बढ़ाना है।
यह कोयला मंत्रालय द्वारा खान और खनिज विकास एवं विनियमन (एमएमडीआर) अधिनियम में संशोधनों के माध्यम से सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदम का हिस्सा है।
मौजूदा प्रावधानों के तहत निजी जरूरत वाले खदान संचालकों को अपने संयंत्रों में इस्तेमाल की जरूरतों को पूरा करने के बाद अपने वार्षिक कोयले या लिग्नाइट के उत्पादन का केवल 50 फीसदी तक बेचने की अनुमति है।
घरेलू उद्योग और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने बताया है कि निकाले गए खनिज का आधे से ज्यादा हिस्सा इस्तेमाल नहीं हो पाता है, जिससे खदान स्थलों पर बड़े पैमाने पर पुराना माल जमा हो जाता है। इस स्टॉक से पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा होते हैं। साथ ही खासकर छोटी खदानों में इस स्टॉक की वजह से जगह फंसी रहती है।
मंत्रालय ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत ऐसे पुराने स्टॉक को खुले बाजार में बेचने की अनुमति देने के लिए सीमा हटाने का प्रस्ताव दिया है। गैर कोयला खनिजों के मामले में यह नियम पहले से लागू है, उसी के अनुरूप संशोधन का प्रस्ताव है। प्रस्तावित संशोधनों का मकसद सरकारी कंपनियों और निगमों को लचीलापन प्रदान करना है, जहां लॉजिस्टिक्स या बुनियादी ढांचे की कमी के कारण कैप्टिव खदानों से उत्पादित कोयला या लिग्नाइट इनसे जुड़े अंतिम उपयोग वाले संयंत्र को आपूर्ति नहीं की जा सकती है।
मंत्रालय ने कहा, ‘ऐसे खनिजों की बिक्री से जिला खनिज फाउंडेशन और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट को मिलने वाली रॉयल्टी आनुपातिक रूप से बढ़ सकती है। इससे खनिज वाले राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है।’
इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित संशोधन से न केवल आपूर्ति बढ़ेगी और किल्लत दूर होगी, बल्कि कीमतों को स्थिर करने और औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है। इससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।
मंत्रालय ने एमएमडीआर अधिनियम के तहत कोयला गैसीकरण को खनन कार्य के हिस्से के रूप में मान्यता देने का भी प्रस्ताव दिया है। यह संशोधन खनन कार्यों की परिभाषा में कोयला या लिग्नाइट को गैस में बदलने को स्पष्ट रूप से शामिल करेगा, जिससे कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए नियामकीय स्पष्टता बेहतर होगी।
एक अन्य प्रस्ताव में इस अधिनियम की धारा 6 के तहत संभावित लाइसेंस एवं खनन पट्टों के लिए अधिकतम क्षेत्र सीमाओं की समीक्षा करना शामिल है। इस कानून का मौजूदा प्रावधान संभावित लाइसेंस के लिए 25 वर्ग किलोमीटर और खनन पट्टों के लिए 10 वर्ग किलोमीटर की सीमा तय करता है।