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4 साल की वीजा सख्ती से ₹1 लाख करोड़ का नुकसान, चीनी इंजीनियरों के लिए भारत ने आसान किए नियम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर को राहत; बिजनेस वीजा प्रक्रिया आसान, विदेशी तकनीकी विशेषज्ञों की एंट्री तेज होगी

Last Updated- December 18, 2025 | 3:30 PM IST
China India

भारत सरकार ने बिजनेस वीजा के नियमों को आसान कर दिया है, जिससे अब विदेशी इंजीनियर और तकनीशियन भारत में काम करना जल्दी शुरू कर सकेंगे। इस फैसले से उन भारतीय कंपनियों को राहत मिलेगी जो चीनी इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों पर निर्भर हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने यह जानकारी दी है।

सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद वीजा् प्रक्रिया में हो रही देरी को कम करना और कागजी कामकाज को आसान बनाना है, क्योंकि पिछले कुछ सालों में वीजा मंजूरी में काफी समय लगने लगा था।

वीजा प्रक्रिया तेज करने के लिए नया डिजिटल सिस्टम

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने पिछले महीने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है। इसके जरिए अब कंपनियां ऑनलाइन ही विदेशी पेशेवरों को बुलाने के लिए स्पॉन्सरशिप लेटर बना सकती हैं। इसके अलावा वीजा आवेदन फॉर्म को भी आसान कर दिया गया है और कई मंत्रालयों से अलग-अलग मंजूरी लेने की जरूरत को खत्म कर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि इन कदमों से वीजा प्रक्रिया अब ज्यादा तेज, आसान और पारदर्शी होगी।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा फायदा

नए नियम खासतौर पर फैक्ट्री से जुड़े कामों पर लागू होंगे, जैसे मशीनों की इंस्टॉलेशन, कमीशनिंग, मेंटेनेंस और प्रोडक्शन। भारत की कई कंपनियां, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर, इन कामों के लिए चीनी इंजीनियरों पर निर्भर रहती हैं, क्योंकि मशीनें चीन से आती हैं। ये विदेशी विशेषज्ञ भारतीय कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

गलवान के बाद सख्त हुए थे नियम

साल 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत ने चीनी नागरिकों के लिए एंट्री नियम सख्त कर दिए थे। इसके बाद बिजनेस वीजा को लेकर कई मंत्रालयों की जांच बढ़ गई थी, जिससे मंजूरी में कई-कई महीने लगने लगे। इसका असर खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर जैसे सेक्टर पर पड़ा, जहां चीन से आने वाली तकनीक और विशेषज्ञों की जरूरत ज्यादा होती है।

भारत-चीन रिश्तों में सुधार के संकेत

पिछले हफ्ते रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया था कि भारत ने चीनी पेशेवरों के लिए वीजा प्रक्रिया आसान की है, जिसे भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस साल चीन का दौरा किया, जो सात साल बाद उनकी पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने पर बातचीत हुई।

वीजा सख्ती से हुआ था बड़ा नुकसान

थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के अनुमान के मुताबिक, सख्त वीजा जांच के कारण पिछले चार साल में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को करीब 15 अरब डॉलर (लगभग ₹1.37 लाख करोड़) का नुकसान हुआ। बड़ी चीनी कंपनियों, जैसे शाओमी, को भी अपने कर्मचारियों के लिए वीजा मिलने में दिक्कत आई, जिससे भारत में उनके विस्तार की रफ्तार धीमी पड़ी। सोलर सेक्टर में भी कुशल कर्मचारियों की कमी देखी गई।

22 दिसंबर से भारतीयों को वीजा देगा चीन

इस बीच चीन ने भी भारत के लिए वीजा प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का ऐलान किया है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि 22 दिसंबर से भारतीय नागरिकों के लिए वीजा आवेदन फिर शुरू होंगे और इसके लिए ऑनलाइन सिस्टम लाया जाएगा।

भारत के विदेश मंत्रालय ने भी बताया है कि चीनी नागरिकों को अब फिर से पर्यटन और बिजनेस वीजा दिए जा रहे हैं और वीजा व्यवस्था पूरी तरह से चालू है।

First Published - December 18, 2025 | 3:14 PM IST

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