सरकार दो खास अनुसंधान संगठनों- बायोटेक्नॉलजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआईआरएसी) और टेक्नॉलजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी)- को प्रस्तावित 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) फंड के लिए दूसरे स्तर के फंड मैनेजर नियुक्त कर सकती है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
एक सूत्र ने बताया, ‘बीआईआरएसी और टीडीबी ने सरकार के समक्ष सफलतापूर्वक अपनी प्रस्तुतियां दी हैं। उन्हें मौखिक मंजूरी मिल गई है, मगर औपचारिक पुष्टि का इंतजार है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।’
दोनों संगठन दूसरे स्तर के कस्टोडियन के तौर पर अलग-अलग निवेश समितियां बनाएंगे जिनमें वेंचर कैपिटलिस्ट और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे और जो स्टार्टअप में निवेश करेंगे। उनकी भूमिका प्रस्ताव का आकलन करने और जबरदस्त प्रभाव वाली परियोजनाओं में पूंजी लगाने की होगी। बीआईआरएसी बायोटेक स्टार्टअप में निवेश करेगा जबकि टीडीबी की नजर अलग-अलग क्षेत्रों की डीप-टेक कंपनियों पर होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए पिछले महीने आरडीआई फंड को लॉन्च किया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल के बजट में इस फंड की कुल रकम में से 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन वित्त वर्ष 2025-26 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के लिए किया था। उन्होंने अपने बजट भाषण में पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान एवं विकास फंड स्थापित करने की घोषणा की थी।
जहां तक फंड के ढांचे की बात है तो एक अन्य सूत्र ने बताया कि यह रकम भारत की समेकित निधि से स्पेशल पर्पस फंड (एसपीएफ) में 1 फीसदी ब्याज दर पर 50 वर्षों के लिए हस्तांतरित की जाएगी। एसपीएफ को अनुसंधान नैशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अंतर्गत बनाया जा रहा है। उसके बाद रकम दूसरे स्तर के कस्टोडियन के पास 3 से 4 फीसदी ब्याज दर पर हस्तांतरित होगी और आखिर में स्टार्टअप तक पहुंचेगी।
सूत्र ने कहा, ‘भारत सरकार एएनआरएफ को ऋण देगी और वह 1 फीसदी ब्याज दर पर 50 साल का कर्ज होगा। यह दीर्घावधि पूंजी है। उसके बाद एएनआरएफ दूसरे स्तर के फंड मैनेजरों को 3 या 4 फीसदी ब्याज दर पर ऋण देगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ब्याज दर 3 फीसदी होगी या 4 फीसदी लेकिन इतना तो तय है कि वह 4 फीसदी से अधिक नहीं होगी। यह भी लंबी अवधि की पूंजी है और इसकी समय-सीमा करीब 20 साल हो सकती है।’
जब दूसरे स्तर के फंड मैनेजर अपनी निवेश समितियों के जरिये स्टार्टअप में निवेश करेंगे तो वे ऑप्शनली कन्वर्टेड डिबेंचर (ओसीडी) और कंपल्सरी कन्वर्टिबल डिबेंचर (सीसीडी) के रूप में पैसा लगा सकते हैं। खास बात यह है कि ओसीडी और सीसीडी ऋण प्रतिभूतियां हैं जिनकी शुरुआत डेट के रूप में होती है लेकिन ये इक्विटी में भी बदली जा सकती हैं। सूत्र ने कहा, ‘बुनियादी तौर पर ये ऋण हैं लेकिन इन्हें कभी भी इक्विटी में बदला जा सकता है। इस प्रकार दूसरे स्तर के फंड मैनेजर भी अपनी रकम बढ़ा सकते हैं।’
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में कुल 20,000 करोड़ रुपये में से बीआईआरएसी को 2,000 करोड़ रुपये और टीडीबी को भी इतनी ही रकम देने की योजना बनाई है। फंडिंग का यही पैटर्न अगले 5 साल तक जारी रहेगा। इस प्रकार दोनों संगठनों को कुल मिलाकर 10,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने कहा कि बीआईआरएसी की योजना 20 से 25 कंपनियों का पोर्टफोलियो बनाने की है। साथ ही वह परियोजना के चरण और जरूरत के हिसाब से 25 से 250 करोड़ रुपये तक निवेश करेगा। मगर ध्यान देने वाली बात यह कि यह फाइनेंसिंग केवल टेक्नॉलजी रेडीनेस लेवल (टीआरएल) 4 और इससे ऊपर की परियोजनाओं के लिए परियोजना की अनुमानित लागत का 50 फीसदी तक ही कवर करती है। इसका मतलब यह हुआ कि स्टार्टअप को बाकी 50 फीसदी रकम की व्यवस्था निजी कंपनियों से करनी होगी।
सूत्र ने कहा, ‘अगर स्टार्टअप ने उद्योग से 50 फीसदी रकम पहले ही जुटा ली है तो वह बाकी रकम जुटाने के लिए दूसरे स्तर के फंड मैनेजर से संपर्क कर सकती है। स्टार्टअप पहले बीआईआरएसी से भी संपर्क कर आवंटन पत्र ले सकती है। उसके बाद बाकी 50 फीसदी रकम जुटाने के लिए लगभग छह महीने का समय होगा।’
सरकार दूसरे स्तर के फंड मैनेजर को रकम देने के अलावा वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) में भी योगदान करेगी। फंड के लॉन्च होते समय वेंचर कैपिटलिस्ट और मौजूदा नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियों से आवेदन आमंत्रित करने की योजना है। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 15 दिसंबर से बढ़ाकर 15 जनवरी कर दी गई है।