facebookmetapixel
दावोस में ट्रंप ने ग्रीनलैंड अधिग्रहण की मांग दोहराई, बल प्रयोग से इनकार कियाटाटा कम्युनिकेशंस ने गणेश लक्ष्मीनारायणन को MD और CEO नियुक्त किया; Q3 में लाभ 54% बढ़ाQ3 Results: जिंदल स्टेनलेस का लाभ 26.6% बढ़ा, जानें डॉ. रेड्डीज, एचपीसीएल समेत अन्य कंंपनियों का कैसा रहा रिजल्टEternal Q3 results: क्विक कॉमर्स की रफ्तार से मुनाफा 73% उछला, ब्लिंकइट ने पहली बार एबिटा लाभ कमायाएआई रेगुलेशन में जोखिम आधारित मॉडल अपनाएगा TRAI, कम जोखिम वाले उपयोग पर होगा स्व-विनियमनCAFE-3 नियमों में बड़ा बदलाव संभव: छोटी पेट्रोल कारों की विशेष छूट हटाने की तैयारी में BEE5 साल में सबसे कमजोर कमाई सत्र: सेंसेक्स कंपनियों की EPS ग्रोथ सुस्तIMF का अलर्ट: AI बना ग्लोबल ग्रोथ का नया इंजन, लेकिन ‘डॉट-कॉम’ जैसे बुलबुले का खतरा भीजिसकी कामना करें, सोच-समझकर करें: ‘नियम-आधारित व्यवस्था’ से परे की दुनियाटैक्स संधियों पर संदेह भारत की ग्रोथ स्टोरी को कमजोर कर सकता है

Hyundai की घरेलू बिक्री में गिरावट, चीन में घटा बाजार, भारत पर बढ़ रहा ध्यान!

Hyundai sales in India: Hyundai मोटर का पहली तिमाही का मुनाफा 2.4% गिरा, कमजोर घरेलू बिक्री से नुकसान

Last Updated- April 25, 2024 | 3:51 PM IST
Hyundai Motor India IPO opens: GMP shows slight uptick; Should you apply? जीएमपी में मामूली बढ़त; दांव लगाएं या नहीं, जानें एक्सपर्ट्स की राय

दक्षिण कोरियाई वाहन निर्माता Hyundai मोटर की इस तिमाही में घरेलू बिक्री में गिरावट देखने को मिली है, जिसके चलते कंपनी के तिमाही लाभ में 2.4% की कमी आई है। कंपनी का कहना है कि बढ़ता कंपटीशन और ग्लोबल अर्थव्यवस्था की अनिश्चित स्थिति इसके पीछे मुख्य कारण हैं।

जहां Hyundai सतर्क रुख अपना रही है और कमजोर प्रदर्शन कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनरल मोटर्स और फोर्ड जैसी अमेरिकी कंपनियों ने मजबूत लाभ वृद्धि दर्ज की है। इसकी वजह स्थिर मूल्य और गैसोलीन गाड़ियों की मजबूत मांग बताई जा रही है।

गौरतलब है कि एक दशक से भी ज्यादा समय पहले वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान Hyundai अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकल गई थी, लेकिन अब चीन में घटते बाजार और दक्षिण कोरिया में कमजोर मांग के कारण कंपनी को निकट भविष्य में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

Hyundai का मानना है कि आने वाले समय में कार बनाने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ने वाली है। इससे बाज़ार में ज़्यादा प्रतिस्पर्धा पैदा होगी। नतीजा ये हो सकता है कि गाड़ियों की कीमतें बढ़ जाएं। साथ ही, Hyundai को लगता है कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्था अभी भी अनिश्चित दौर से गुजर रही है।

इसका मतलब है कि गाड़ियों की बिक्री कम रह सकती है और कंपनियों को मुनाफा कमाना मुश्किल हो सकता है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, Hyundai आने वाले महीनों में भी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

पहली तिमाही में, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमेकर कंपनी Hyundai मोटर ने अपनी सहयोगी कंपनी Kia कॉर्प के साथ मिलकर 1.007 मिलियन वाहन बेचे, जो पहले की तुलना में 1.5 मिलियन कम है। बढ़ती मुद्रास्फीति और सुस्त अर्थव्यवस्था के कारण दक्षिण कोरिया में बिक्री में 16% की गिरावट आई।

Hyundai ने कहा उसके आसन प्लांट में उत्पादन का अस्थायी रूप से रुक जाना भी उसकी घरेलू सेल्स को प्रभावित करने वाला कारण रहा। इस प्लांट को इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के निर्माण के लिए तैयार किया जा रहा है.

अमेरिकी बाजार में गाड़ियों की बिक्री में 10% की बढ़ोतरी हुई है, जो पारंपरिक कंपनियों के लिए अच्छी खबर है। वहीं, दुनियाभर में हाइब्रिड गाड़ियों की बिक्री 17% बढ़ी है, ये दर्शाता है कि लोग महंगी इलेक्ट्रिक कारों के बजाय किफायती हाइब्रिड विकल्प चुन रहे हैं। इस बदलाव का असर टेस्ला पर भी पड़ा है, जिसने हाल ही में पहली बार बिक्री में गिरावट दर्ज की। Hyundai इस ट्रेंड का फायदा उठाते हुए ज्यादा हाइब्रिड मॉडल लाने और नया IONIQ EV मॉडल पेश करने वाली है।

Hyundai अपने इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाने वाले कारखाने में ही हाइब्रिड गाड़ियां भी बनाएगी। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर ने बताया कि इस साल की दूसरी छमाही में जॉर्जिया स्थित प्लांट में हाइब्रिड गाड़ियों का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

हालांकि, एक विश्लेषक का कहना है कि Hyundai को सावधानी से सोचना चाहिए कि हाइब्रिड गाड़ियों की यह मांग कितने समय तक बनी रहेगी, खासकर जब टोयोटा जैसी कंपनियां पहले से ही मजबूत हैं।

गौर करें, टोयोटा अपनी बिक्री का बड़ा हिस्सा हाइब्रिड गाड़ियों से ही करती है और इस साल उसके शेयरों में 35 प्रतिशत की उछाल आई है। तो आने वाले महीनों में टोयोटा मजबूत तिमाही नतीजे पेश कर सकती है।

फॉक्सवैगन की अमेरिकी फैक्ट्री में यूनियन बनाने की खबर के बाद यह सवाल उठाया गया कि क्या Hyundai के अमेरिकी कारखानों में भी ऐसा ही होगा। Hyundai का कहना है कि फिलहाल उन्हें यूनियन बनने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है।

हालांकि, विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि अमेरिका में विदेशी कार कंपनियों के कारखानों में यूनियन बनाने का दबाव बढ़ सकता है। इसका मतलब ये हो सकता है कि Hyundai को अपने कर्मचारियों को यूनियन में शामिल होने से रोकने के लिए वेतन बढ़ाना पड़े।

भारत पर फोकस

चीन में करारी हार के बाद Hyundai अब भारत पर दोगुना ध्यान दे रही है। 2009 में चीन में किआ के साथ मिलकर तीसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी रही Hyundai पिछले साल वहां सिर्फ 2,200 गाड़ियां ही बेच पाई। गौर करें कि ये उनकी कुल सालाना बिक्री (42 लाख) का एक छोटा सा हिस्सा है।

दुनिया के सबसे बड़े कार बाजार चीन में यह कंपनी पिछड़ गई है। इसी वजह से Hyundai अब तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार पर अपना फोकस बढ़ा रही है। कंपनी ने गुरुवार को घोषणा की कि वो 2025 तक भारत में ही अपनी पहली इलेक्ट्रिक गाड़ी लॉन्च करेगी। ये कदम भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में टाटा मोटर्स के दबदबे को कम करने की उनकी कोशिश है।

Hyundai मोटर ग्रुप के कार्यकारी अध्यक्ष यूइसुन चुंग ने इस हफ्ते भारत का दौरा किया। भारत में Hyundai दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता है और अपनी भारतीय इकाई के लिए आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) लाने पर विचार कर रही है। इस दौरे के दौरान चुंग ने कंपनी की मध्यम और दीर्घकालिक रणनीतियों पर चर्चा की।

हालांकि जनवरी-मार्च तिमाही में Hyundai का शुद्ध लाभ एक साल पहले के 3.3 ट्रिलियन वॉन से कम होकर 3.2 ट्रिलियन वॉन रहा, लेकिन यह विश्लेषकों के औसत अनुमान 3 ट्रिलियन वॉन से अधिक है।

कंपनी का राजस्व 7.6% बढ़कर 41 ट्रिलियन वॉन हो गया, जिसमें मजबूत विदेशी बिक्री और कमजोर स्थानीय मुद्रा से बढ़ी हुई प्रत्यावर्तित (repatriated) आय का योगदान रहा। कुल मिलाकर, बाजार में गिरावट के बावजूद Hyundai मोटर के शेयरों में मामूली गिरावट आई। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

First Published - April 25, 2024 | 3:51 PM IST

संबंधित पोस्ट