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Green Hydrogen: लार्सन ऐंड टुब्रो की रणनीति से अलग कदम

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पिछले सप्ताह एलऐंडटी ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और रिन्यू के साथ जीएच4इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक संयुक्त उद्यम का गठन किया था।

Last Updated- August 31, 2023 | 10:25 PM IST
L&T

इंजीनियरिंग समूह लार्सन ऐंड टुब्रो परिसंपत्ति स्वामित्व प्रारूप के तहत भारत में हरित हाइड्रोजन की संभावनाओं का पता लगाएगा, जो परिसंप​त्ति कम रखने की इसकी घोषित नीति से अलग कदम है। कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला उस खंड में निर्माण-स्वामित्व-परिचालन की संभावनाओं को अनुमति देने के लिए है।

हरित हाइड्रोजन खंड में प्रवेश करने के लिए एलऐंडटी ने दो तरह से अपनी सामान्य रणनीति से ध्यान हटाया है। एक तो यह कि इसने परिसंपत्ति स्वामित्व और परिचालन प्रारूप का विकल्प चुना है और दूसरा इसने अपनी सभी हरित ऊर्जा गतिवि​धियों को एक सहायक कंपनी के तहत रखने का निर्णय लिया है।

कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि ये दो कदम निर्माण-स्वामित्व-परिचालन की संभावनाओं पर ध्यान देने के लिए और अगर जरूरत पड़ती है, तो बाद के चरण में वित्तीय भागीदारों के लिए गुंजाइश की अनुमति के लिए हैं।

पिछले सप्ताह एलऐंडटी ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और रिन्यू के साथ जीएच4इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक संयुक्त उद्यम का गठन किया था। अपनी घोषणा में एलऐंडटी ने कहा था कि इस संयुक्त उद्यम का मकसद स्वामित्व और परिचाल वाले किसी प्रारूप के जरिये हरित हाइड्रोजन और उसके उत्पादों, उत्पादन परिसंपत्तियों और संबंधित नवीकरणीय परिसंपत्तियों का विकास है।

आसान शब्दों में कहें तो, एलऐंडटी हरित हाइड्रोजन की बिक्री करने पर विचार कर रही है, न कि केवल इसके विनिर्माण से संबंधित उपकरण पर।

एलऐंडटी में हरित विनिर्माण और विकास क्षेत्र की इकाई एलऐंडटी एनर्जी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख डेरेक एम शाह ने कहा कि एलऐंडटी परिसंप​​त्ति कम रखने वाले दृष्टिकोण की अपनी रणनीति बनाए रखे हुए है। हालांकि उन्होंने कहा कि हम ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में बढ़ने के मौजूद अवसरों की भी पहचान कर रहे हैं।

ग्रीन हाइड्रोजन वास्तव में हमारे लिए ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्व की अपनी स्थिति तथा विनिर्माण और ईपीसी परियोजनाओं में विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए उभरते अवसर क्षेत्रों में से एक है।

शाह ने कहा कि जीएच4इंडिया से कंपनी हरित हाइड्रोजन और डेरिवेटिव क्षेत्र में निर्माण-स्वामित्व-परिचालन (बीओओ) की संभावनाओं पर ध्यान दे सकेगी। उन्होंने कहा कि यह इस ढंग से होगा कि इससे एलऐंडटी को नुकसान न हो। इससे पहले एलऐंडटी के शीर्ष अधिकारियों ने कहा था कि तीनों साझेदार संयुक्त रूप से अगले तीन से पांच साल के दौरान तकरीबन तीन से चार अरब डॉलर का निवेश करेंगे।

विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में परिसंपत्ति स्वामित्व वाले प्रारूप के तहत निवेश करने के बाद एलऐंडटी एक दशक से भी अधिक समय पहले परिसंपत्ति कम करने वाले प्रारूप में चली गई थी, जिसके मिश्रित परिणाम मिले हैं।

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First Published - August 31, 2023 | 10:25 PM IST

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