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उड़ानों से बंदिश हटाना चाहे सरकार मगर कंपनियां नहीं तैयार

Last Updated- December 12, 2022 | 9:31 AM IST

महामारी की वजह से विमानन कंपनियों की उड़ानों पर लगी बंदिशें हटाने और उन्हें पूरी क्षमता के साथ उड़ान भरने की अनुमति देने का सरकार का इरादा दिखने लगा है। सूत्रों ने बताया कि सरकार इस मामले पर चर्चा कर रही है। मगर विमानन कंपनियां सरकार से फिलहाल ऐसा नहीं करने के लिए कह रही हैं यात्रियों की संख्या बढ़ती नहीं दिख रही है, इसलिए पूरी क्षमता से उड़ान भरना कंपनियों के लिए मुनाफे का सौदा नहीं होगा।
इस समय विमानन कंपनियों को कोविड से पहले की परिचालन क्षमता के मुकाबले 80 फीसदी क्षमता पर काम करने की इजाजत दी गई है। मगर इंडिगो को छोड़कर कोई भी विमानन कंपनी 70 फीसदी क्षमता तक भी काम नहीं कर पा रही है। लॉकडाउन की वजह से करीब दो महीने तक विमानों का परिचालन बंद रहने के बाद 25 मई से घरेलू उड़ानों के लिए अनुमति दी गई है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सरकार सामान्य स्थिति बहाल करना चाहती है और यही वजह है कि जनवरी के मध्य से उड़ानों की क्षमता पर लगी बंदिश हटाने के लिए सुझाव मांगे जा रहे हैं। इस बारे में जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।’ मगर इंडिगो के अलावा सभी विमानन कंपनियों का कहना है कि क्षमता बढ़ाने का फैसला मार्च तक टाल दिया जाना चाहिए क्योंकि अगले तीन महीने के लिए टिकटों की अग्रिम बुकिंग बहुत कम है।
इंडिगो के पास 265 विमान हैं और वह क्षमता बढ़ाना चाहती है। वह सरकार से लगातार मांग कर रही है कि उड़ानों की क्षमता और किराये से बंदिश हटाई जाए। सामान्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पाबंदी की वजह से विमानन कंपनियों को देसी परिचालन बढ़ाने की जरूरत है। ऐसा नहीं हुआ तो विमान खड़े रहने के कारण लागत बढऩे का जोखिम है। दिसंबर में इंडिगो ने कोविड से पहले की उड़ानों की तुलना में करीब 78 फीसदी विमानों को परिचालन में लगाया है।
इंडिगो के मुख्य कार्याधिकारी रणजय दत्ता ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था, ‘हम कई तरह की बंदिशों के साथ काम कर रहे हैं। हमें जल्द से जल्द खुली और आजाद दुनिया में लौटना चाहिए।’
लेकिन प्रतिस्पर्धी कंपनियों स्पाइसजेट, गोएयर और एयर एशिया इंडिया ने सरकार से कहा है कि किराया और उड़ान क्षमता की सीमा हटाए जाने से इंडिगो का कारोबार बढ़ेगा और उनका घाटा भी बढ़ जाएगा। एक मुख्य कार्याधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि विमानन कंपनी के दिवालिया होने की नौबत भी आ सकती है। एक विमानन कंपनी के प्रमुख ने कहा, ‘विमानन कंपनियों के लिए चौथी तिमाही कमजोर रहने वाली है क्योंकि जनवरी से मार्च के बीच छुट्टियां कम होने से यात्राएं भी कम होती हैं। यह साल सबसे खराब रहा है और आगे की बुकिंग भी मुश्किल से ही हो रही है। ऐसे में क्षमता बढ़ाने से मुनाफा कमाना काफी कठिन हो जाएगा।’
नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी लगातार उम्मीद जताते आए थे कि देसी विमानन कंपनियां दिसंबर अंत तक कोविड से पहले की क्षमता हासिल कर लेंगी। मगर कुछ दिन पहले ही मंत्रालय के सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने कहा था कि घरेलू विमानन कंपनियों को सामान्य स्तर तक आने में अभी दो से तीन महीने लग सकते हैं। खरोला ने कहा था, ‘मुझे नहीं लगता कि बुरा दौर खत्म हो गया है। सामान्य स्थिति  आने में अभी दो-तीन महीने और लगेंगे।’
विमानन क्षेत्र पर नजर रखने वाले विश्लेषक बिजनेस श्रेणी के यात्रियों के नहीं आने से चिंतित हैं। इस श्रेणी के टिकटों को विमानन कंपनियां महंगे दामों में बेच लेती हैं, जिससे उन्हें छुट्टियों के दौरान टिकट के दाम कम रखने में मदद मिलती है।

First Published - January 20, 2021 | 11:11 PM IST

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