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एयर इंडिया से ईवाई की पहचान बढ़ी

Last Updated- December 12, 2022 | 12:21 AM IST

वर्ष 2017 में, जब सरकार ने एयर इंडिया और उसकी सहायक इकाइयों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी तो दो समझौता सलाहकार नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था। कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण था और ऐसा नहीं लग रहा था कि एक सलाहकार यह कार्य कर सकेगा। लेकिन समस्या पैदा हो गई थी। ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय बैंक रॉशचाइल्ड ऐंड कंपनी ने कुल सौदे की वैल्यू के 0.2 प्रतिशत शुल्क के खिलाफ निर्णय लिया और उसने इसे ‘ऐसी जटिल प्रक्रिया के लिए इसे काफी कम’ करार दिया था।
बोली प्रक्रिया के दिशा-निर्देश के अनुसार, ईवाई द्वारा निर्धारित शुल्क (बोलीदाता सूची में सर्वाधिक) इस सौदे के लिए मानक के तौर पर समझा गया था। ईवाई ने यह कुल विनिवेश रकम के 0.4 प्रतिशत निर्धारित किया था।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘हम एक बैंकर को लेकर शुरू में आशंकित थे। लेकिन ईवाई टीम के शानदार रिकॉर्ड को देखते हुए हमने आगे बढऩे का निर्णय लिया। ईवाई को कई विमानन विलय एवं अधिग्रहण सौदों के प्रबंधन का अनुभव था।’
ईवाई की टीम वर्ष 2007 में जेट एयरवेज के एयर सहारा अधिग्रहण प्रबंधन में भी शामिल थी। उसके बाद 2010 में उसने सन गु्रप द्वारा स्पाइसजेट के अधिग्रहण में भी अपनी दक्षता साबित की थी, और इसके अलावा अरबपति विल्बर रॉस ने 2008 में स्पाइसजेट में 8 करोड़ डॉलर के निवेश सौदे में भी उसना अपना योगदान दिया था।
चार साल बाद, 50 लोगों की टीम इस सौदे को पूरा करने में सक्षम रही है, जिससे सरकार को नुकसान में चल रही एयरलाइन में रोजाना करीब 20 करोड़ रुपये की सरकारी बचत में मदद मिलेगी।
ईवाई टीम ने एयर इंडिया को मुख्य तौर पर विभिन्न रोडशो में एक अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के तौर पर पेश किया था। एक अधिकारी ने कहा, ‘ईवाई टीम ने शुरू से ही इच्छुक बोलीदाता रहे टाटा समूह को विस्तार के जरिये होने हासिल होने वाले लागत लाभ के बारे में अवगत कराया। एयर इंडिया के पास प्रशिक्षित मानव प्रतिभा, विभिन्न वैश्विक हवाई अड्डों पर विभिन्न स्लॉट, और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के अधिकार हैं।’
फिर भी, बोलीदाताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता अनिश्चिताओं को लेकर थी। वे इस सौदे की अनजान खामियों को लेकर आशंकित थे।
ईवाई ने सरकार को एयर इंडिया के विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ता अनुबंधों, उसकी कानूनी प्रक्रिया और मानव संसाधन संबंधित समस्याओं की स्वतंत्र समीक्षा करने और पात्र बोलीदाताओं के लिए यथास्थिति रिपोर्ट बनाए जाने के लिए राजी किया। इसके अलावा, सरकारी सौदा होने की वजह से, सब कुछ निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए था। यह उन दो निजी कंपनियों से काफी अलग था, जिन्होंने विलय की सहमति जताई थी।
जुलाई में जब देश लॉकडाउन के बाद हालात सामान्य होने के लिए संघर्ष कर रहा था, ईवाई ने गृह मंत्री अमित शाह और उनके पांच सहयोगियों के लिए एक प्रजेंटेशन पेश किया। दो घंटे लंबे इस प्रजेंटेशन में उसने कहा कि यदि मंत्री इस प्रक्रिया को रोकते हैं और महामारी के बाद पुन: शुरू करते हैं तो इससे 15,435 करोड़ रुपये (हर महीने 620 करोड़ रुपये) का नुकसान होगा।
ईवाई टीम का कहना था कि इसके बजाय सरकार को किसी पूर्व निर्धारित कर्ज से बचना चाहिए और बोलीदाताओं को संयुक्त डेट-प्लस-इक्विटी वैल्यू (ऐसा मॉडल, जिसे सरकार के निजीकरण प्रयासों के इतिहास में कभी नहीं आजमाया गया) पर आधारित उद्यम वैल्यू पर बोली लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए। टीम का तर्क था कि इससे बाजार को वास्तविक अनुमानों के आधार पर वैल्यू तलाशने में मदद मिलेगी।
एक निवेश बैंकर ने कहा, ‘यह ईवाई के लिए मौद्रिक रूप से आकर्षक सौदा नहीं होगा, लेकिन ऐसे जटिल और चुनौतीपूर्ण सौदे के जरिये उसकी छवि सुधरी है।’

First Published - October 11, 2021 | 11:29 PM IST

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