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Pre-budget Meet: विकसित भारत के लिए राज्यों का जोर, फंडिंग में समानता और निवेश बढ़ाने की अपील

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पूर्व-बजट 2026 बैठक में राज्यों ने समान वित्तीय हिस्सेदारी और अतिरिक्त संसाधनों की मांग की, गोवा और तेलंगाना ने विकास, अवसंरचना और राजस्व संरक्षण पर जोर दिया।

Last Updated- January 11, 2026 | 5:09 PM IST
Mutual Fund
Representative Image

Pre-budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित पूर्व-बजट बैठक में राज्यों ने केंद्रीय वित्तीय नीतियों में अधिक समानता और राज्यों के लिए अतिरिक्त संसाधनों की मांग की। बैठक में विभिन्न राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बैठक में गोवा की विशेष आवश्यकताओं और विकासात्मक मांगों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गोवा ने केंद्रीय योजनाओं में अधिक समान वित्तीय हिस्सेदारी की मांग की है, जिसमें राज्य के तटीय क्षेत्र, पश्चिमी घाट की पारिस्थितिकी और राष्ट्रीय पर्यटन जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा जाए।

सावंत ने कहा कि गोवा की प्राथमिकताओं में सामाजिक कल्याण योजनाओं को सुदृढ़ करना, महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं को गति देना, रेल और लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी बढ़ाना और तटीय व पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए जलवायु-सहिष्णु अवसंरचना का विकास शामिल है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, कचरा प्रबंधन, पर्यटन विविधीकरण, कौशल विकास और नवीकरणीय ऊर्जा पर भी जोर दिया।

वहीं, तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री मल्लू भाट्टी विक्रमार्क ने केंद्र से जीएसडीपी के कम से कम 4 प्रतिशत तक राज्य घाटे की सीमा बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था कि भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए राज्यों को अधिक संसाधनों की आवश्यकता है।

भाट्टी ने कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार का कुल खर्च 20 प्रतिशत से अधिक राज्य और संयुक्त विषयों पर होता है। यदि केंद्र का यह खर्च 25 प्रतिशत घटा दिया जाए तो सालाना 2.21 लाख करोड़ रुपये राज्यों को हस्तांतरित किए जा सकते हैं। इसके अलावा, राज्यों को 50 साल के ब्याज मुक्त ऋण को अनुदान में बदलने और सहायता राशि को दोगुना करने की भी मांग की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी दरों में कटौती से मांग बढ़ सकती है, लेकिन इसे दीर्घकाल तक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके लिए राज्यों के राजस्व हानि की भरपाई का उपयुक्त तंत्र बनाना आवश्यक है। भाट्टी ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र ने 15वीं वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्य-विशेष और क्षेत्र-विशेष अनुदान स्वीकार नहीं किए, जिससे तेलंगाना को कुल 5,386 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने 16वीं वित्त आयोग की सभी सिफारिशों को मान्यता देने की अपील की।

मुख्यमंत्री सावंत ने बैठक को राज्य और केंद्र के विकास लक्ष्यों को एकीकृत करने का एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि गोवा ‘विकसित गोवा 2037’ के अपने लक्ष्य की दिशा में, ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।

-भाषा इनपुट के साथ

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First Published - January 11, 2026 | 5:09 PM IST

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