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वित्त वर्ष 2022 में आय में 25 प्रतिशत सुधार के आसार

Last Updated- December 12, 2022 | 7:51 AM IST

बीएस बातचीत
बाजारों के नई ऊंचाइयों पर पहुंचने से कई विश्लेषक अब आय में सुधार की उमीद कर रहे हैं, क्योंकि आर्थिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं। बीएनपी पारिबा इंडिया के इक्विटी प्रमुख अभिराम इलेश्वरप ने पुनीत वाधवा के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि वे आर्थिक सुधार के संदर्भ में एशिया एक्सजापान पोर्टफोलियो में भारत पर ‘ओवरवेट’ बने हुए हैं। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

भारतीय इक्विटी बाजारों पर आपका क्या नजरिया है?
हम वर्ष की दूसरी छमाही तक कोविड टीके की उपलब्धता, लगातार पुन:मुद्रास्फीति के रुझानों और ईएम की मुद्राओं के खिलाफ अमेरिकी डॉलर में नरमी की अपनी उम्मीद आदि के आधार पर 2021 के लिए उभरते बाजारों (ईएम) पर आशान्वित बने हुए हैं। हम चीन जैसे अन्य बाजारों के मुकाबले रिकवरी के लिए एशिया एक्स-जापान क्षेत्र में भारत पर ओवरवेट हैं। दरअसल, भारतीय आय में लगातार संशोधन किया गया है, क्योंकि हमने लगातार दो आय सत्र उम्मीद से बेहतर देखे। बाजार में अच्छी तेजी आई और सेंसेक्स के लिए हमारा पिछला लक्ष्य 50,000 (यह लक्ष्य पिछले साल के अंत में तय किया गया था) हासिल हुआ और इसलिए कुछ दबाव को देखना आश्चर्यजनक नहीं होगा।

आपके ओवरवेट और अंडरवेट सेक्टर कौन से हैं?
हम जिन क्षेत्रों को पसंद कर रहे हैं वे हैं वित्त, खासकर निजी बैंक, बीमा और आवास वित्त कंपनियां, कुछ कम वैल्यू के पीएसयू, संपत्ति, आईटी सेवा और ऊर्जा तथा उपभोक्ता क्षेत्रों में कुछ चुनिंदा नाम।

क्या बजट ने निवेशकों को इक्विटी पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया है?
हमारा मानना है कि भारत निवेश के नजरिये से ईएम में अच्छी स्थिति में है। भारत ने महामारी का अच्छी तरह से मुकाबला किया है, कंपनिां ज्यादा सक्षम बन गई हैं और चक्रीयता संबंधित सुधार देखा जा रहा है। बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर पूंजीगत खर्च वृद्घि, बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता सुधारने, स्वास्थ्य खर्च और विदेशी तथा घरेलू निवेश के लिए प्रोत्साहन पर जोर दिया गया। हालांकि बजट में इक्विटी निवेशकों के लिए किसी खास प्रोत्साहन पर जोर नहीं दिया गया, लेकिन इसमें स्थायित्व और पूर्वानुमेयता पर बल दिया गया जिससे बाजार कारोबारिायों का उत्साह बढ़ा है।

कया निवेशक पूंजीगत खर्च केंद्रित दांव के लिए खपत-आधारित क्षेत्रों से बाहर निकलेंगे?
हां, मैं इस पर सहमत हूं। अक्सर निवेशक आवास, वित्त और पूंजीगत खर्च केंद्रित क्षेत्रों के जरिये मुद्रास्फीति थीम पार दांव लगाना पसंद करते हैं। बजट ने बड़े पूंजीगत खर्च चक्र का स्पष्ट संकेत दिया है। 2023 से पहले शुरू होने वाली कुछ निर्माण परियोजनाओं और उत्पादन आधारित प्रोत्साहित (पीएलआई) के जरिये भी प्रोत्साहन हैं। वाणिज्यिक वाहन सेगमेंट संभावित लाभार्थी का अच्छा उदाहरण है और इसका जीडीपी वृद्घि से मजबूत सह-संबंध है। मुद्रास्फीति पर, एफएमसीजी कंपनियों ने सकल मार्जिन पर दबाव महसूस किया है, क्योंकि कच्चे माल और कच्चे तेल की कीमतें चढ़ रही हैं, हालांकि उनमें से कुछ कीमत वृद्घि का प्रभाव ग्राहकों पर डालने में सक्षम हैं। दूसरी तरफ, वाहन कंपनियां ने भारती उत्पादन लागत वृद्घि दर्ज की है और अब तक वे इसका प्रभाव ग्राहकों पर डालने में सतर्कता बरत रही हैं।

बाजार की तेजी के लिए मुख्य जोखिम क्या हैं?
जोखिम हैं संभावित टीका वितरण में विलंब या उसके दुष्प्रभाव, और अनुमानों को लेकर आय विपरीत आय वृद्घि। मूल्यांकन भी चिंताजनक हैं, लेकिन बड़ी चिंता आय सुधार की रफ्तार पर विराम लगना हो सकती है।

कॉरपोरेट आय से आपको क्या उम्मीदें हैं?
वित्त वर्ष 2022 में वित्त वर्ष 2021 के निचले स्तरों से सालाना आधार पर करीब 25 प्रतिशत का आय सुधार देखा जा सकता है। वित्त वर्ष 2023 में हम परिचालन आय वृद्घि के सामान्य स्तरों पर लौट सकते हैं। वित्त और चक्रीयता संबंधित क्षेत्र इस सुधार का नेतृत्व कर सकते हैं।

First Published - February 24, 2021 | 11:25 PM IST

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