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भारत में धमाका मचाने के लिए तैयार Elon Musk की Starlink, जल्द मिल सकता है लाइसेंस; Jio से होगी टक्कर

रिपोर्ट के अनुसार, स्टारलिंक अब भारतीय लाइसेंस रखने के लिए स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले डेटा स्टोरेज के मानदंडों का पालन करने पर सहमत हो गई है।

Last Updated- November 08, 2023 | 7:29 PM IST
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दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी भारत में धमाका मचाने के लिए तैयार है। दरअसल मोदी सरकार जल्द ही एलन मस्क की एयरोस्पेस कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को वॉइस और डेटा कम्युनिकेशन सर्विस का लाइसेंस मंजूरी कर सकती है।

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार डेटा स्टोरेज और ट्रांसफर नियमों के संबंध में स्टारलिंक (Starlink License) के जवाब से संतुष्ट है। सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद कंपनी को सेवाएं देने के लिए सैटेलाइट सर्विसेज (जीएमपीसीएस) द्वारा वैश्विक मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन लाइसेंस दिया जाएगा।

लाइंसेंस मिलने के बाद सेवाएं शुरू कर सकती है स्टारलिंक 

एक बार मंजूरी मिलने के बाद स्पेसएक्स (SpaceX) की सब्सिडयरी कंपनी स्टारलिंक कंपनियों और व्यक्तियों दोनों को सैटेलाइट ब्रॉडबैंड, वॉयस और मैसेजिंग सर्विस प्रदान कर सकती है।

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने शुरुआत में अपनी ग्लोबल उपस्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने का इरादा जताया था। लेकिन मोदी सरकार ने स्थानीय यानी भारत के डेटा स्टोरेज नियमों के अनुपालन पर जोर दिया था। हालांकि, अब स्टारलिंक भारतीय नियमों का पालन करने के लिए सहमत हो गयी है।

पहले अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने पर अड़ी थी स्टारलिंक 

बता दें कि पहले ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई थी स्टारलिंक ने अपनी ग्लोबल पोजीशन को देखते हुए भारत सरकार से डेटा ट्रांसफर और स्टोरेज को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की बात कही थी। लेकिन कंपनी की इस मांग को भारत के अधिकारियों ने खारिज कर दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, स्टारलिंक अब भारतीय लाइसेंस रखने के लिए स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले डेटा स्टोरेज के मानदंडों का पालन करने पर सहमत हो गई है।

जियो की सैटकॉम से होगी एलन मस्क की टक्कर

वनवेब और रिलायंस जियो की सैटकॉम (Satcom) के बाद स्टारलिंक भारत में जीएमपीसीएस लाइसेंस (GMPCS license) प्राप्त करने वाली तीसरी कंपनी बन जाएगी।

यह स्पेसएक्स (SpaceX) का भारतीय सैटकॉम बाजार में एंट्री करने का दूसरा प्रयास है। इससे पहले कंपनी को भारतीय आवेदकों से प्री-बुकिंग के रूप में फंड स्वीकार करने से पहले रेगुलेटरी मंजूरी लेने के लिए कहा गया था।

First Published - November 8, 2023 | 7:20 PM IST

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