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मुंबई में महंगी होगी बिजली

Last Updated- December 11, 2022 | 8:26 PM IST

पिछले एक साल के दौरान आयातित कोयले के दाम में तेज बढ़ोतरी को देखते हुए टाटा पावर और अदाणी इलेक्ट्रिसिटी जैसी बिजली उत्पादक और वितरण कंपनियां नए वित्त वर्ष से मुंबई के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में इजाफा करने की तैयारी कर रही हैं।
महाराष्ट्र विद्युत नियामक ने मार्च 2000 में मुंबई के उपभोक्ताओं के लिए पांच साल के लिए बिजली की दरें तय की थीं जब रिचर्ड बे कोयले का दाम 64 से 72 डॉलर प्रति टन के बीच था। उसके बाद से कोयले का दाम 300 फीसदी तक बढ़ चुका है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कोयले के दाम में बढ़ोतरी के मद्देनजर टाटा पावर प्रति यूनिट शुल्क 1.10 रुपये तक बढ़ा सकती है वहीं अदाणी के उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट 15 पैसे से 25 पैसे का भार बढ़ेगा। शुल्क दरों में इजाफा 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष से प्रभावी होगा।
टाटा पावर की ट्रॉम्बे इकाई अपनी जरूरत का पूरा कोयला विदेश से आयात करती है। अदाणी की दहानु इकाई घरेलू कोयले की आपूर्ति की कमी होने पर ही कोयला आयात करती है। टाटा पावर अपने वितरण क्षेत्र के उपभोक्ताओं और बेस्ट (दक्षिण मुंबई) को बिजली की आपूर्ति करती है जबकि अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई उपनगरीय इलाकों में बिजली की आपूर्ति करती है।
महाराष्ट्र में बिजली की कीमतों में किसी तरह का बदलाव ग्राहकों के मासिक बिजली बिल में ईंधन समायोजन शुल्क के तौर पर किया जाता है। लेकिन महामारी की वजह से महाराष्ट्र विद्युत नियामक ने दोनों कंपनियों को ईंधन समायोजन शुल्क कोष बनाने और बाद में इसकी वसूली उपभोक्ताओं से वसूली करने के लिए कहा था। दोनों कंपनियों को यह कोष वित्त वर्ष 2021 में अधिशेष में था लेकिन आयातित कोयला के महंगा होने से वित्त वर्ष 2022 में अधिशेष राशि खत्म हो गई। घटनाक्रम के जानकार सूत्र ने बताया कि दोनों कंपनियां अगले वित्त वर्ष से मासिक बिल में ईंधन समायोजन शुल्क वसूलना शुरू कर देगी। अगर यह शुल्क वसूलने में देरी हुई तो शुल्क में बढ़ोतरी जुड़ती जाएगी और उपभोक्ताओं को अचानक भारी-भरकम बिजली बिल का झटका लग सकता है।
इस बारे में संपर्क करने पर टाटा पावर के प्रवक्ता ने कहा कि अप्रत्याशि परिस्थितियों जैसे युद्घ के कारण अंतरराष्ट्रीय ईंधन के दाम बढ़ गए हैं जिसका असर बिजली खरीद लागत पर पड़ रहा है। हालांकि टाटा पावर अधिकांश कोयले की आपूर्ति लंबी अवधि के आपूर्ति अनुबंध के तहत इंडोनेशिया से करती है। इस वजह से कोयले की आपूर्ति की लागत काफी अनुकूल है। इसके साथ ही मुंबई के उपभोक्ताओं को 180 मेगावाट गैस और 440 मेगावाट पनबिजली संयंत्रों की बिजली मिश्रित कर आपूर्ति की जाती है, जिससे बिजली शुल्क की दर कम हो जाती है। टाटा पावर करीब 350 मेगावाट अक्षय ऊर्जा की खरीद बेहद प्रतिस्पर्धी दरों पर करती है। इससे टाटा पावर को बिजली की आपूर्ति लगात को कम करने में मदद मिलती है। प्रवक्ता ने कहा कि पूल की गई बिजली की लागत पिछले एक साल के दौरान 4 से 4.10 रुपये प्रति यूनिट रही जो मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य सभी आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में कम है।
अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने उपभोक्ताओं को दीर्घावधि शुल्क व्यवहार्यता के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दहानु टीपीपी को 100 फीसदी घरेलू कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित होने से आयातित कोयले के दाम में तेज बढ़ोतरी का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

First Published - March 29, 2022 | 11:37 PM IST

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