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डिक्सन का भारती संग करार

Last Updated- December 12, 2022 | 6:11 AM IST

इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवा (ईएमएस) कंपनी डिक्सन ग्रुप ने दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पादों के विनिर्माण के लिए भारती एंटरप्राइजेज के साथ एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए आज एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। प्रस्तावित संयुक्त उद्यम में डिक्सन की हिस्सेदारी 74 फीसदी होगी जबकि शेष हिस्सेदारी भारती की होगी। यह संयुक्त उद्यम दूरसंचार क्षेत्र में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत आवश्यक प्रोत्साहन हासिल करने के लिए आवेदन करने वाली पहली कंपनी होगी।
इस योजना के तहत कि सरकार ने दूरसंचार गियर के विनिर्माताओं के लिए 12,195 करोड़ रुपये का व्यय निर्धारित किया है। इसके तहत प्रोत्साहन 5 वर्षों के लिए बिक्री में वृद्धि के आधार पर 4 से 6 फीसदी के दायरे में होगा। इस योजना की विस्तृत रूपरेखा को फिलहाल अंतिम रूप दिया जा रहा है। दोनों कंपनियां फिलहाल संयुक्त उद्यम की योजना को अंतिम रूप देने में लगी हैं। इसके तहत संयुक्त उद्यम ने पांच वर्षों के दौरान 6,600 करोड़ रुपये के एकीकृत राजस्व तक पहुंचने और 100 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है जो पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन हासिल करने के लिए आवश्यक है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस संयुक्त उद्यम के तहत लक्ष्य रखा गया है कि 80 से 85 फीसदी बिक्री खुद भारती समूह से आएगी। इसमें इंटरनेट सेट टॉप बॉक्स, मोडेम एवं राउटर और आईओटी उपकरणों का विनिर्माण शामिल है। हालांकि भारती समूह उसका एक निश्चित खरीदार होगा लेकिन संयुक्त उद्यम अन्य कंपनियों को भी अपने उत्पादों की बिक्री करेगी जैसे टाटा स्काई को इंटरनेट सेट टॉप बॉक्स और संभवत: रिलायंस जियो को भी अपने उत्पादों की बिक्री करेगी।
सूचीबद्ध कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजिज के सीएफओ सौरभ गुप्ता ने कहा, ‘हमें विश्वास है कि हम पीएलआई योजना के तहत निर्धारित राजस्व से करीब 15 फीसदी अधिक राजस्व दर्ज करेंगे क्योंकि हमने पीएलआई के पहले वर्ष में ही 1,000 करोड़ रुपये के राजस्व (600 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले) को पार करने की योजना बनाई है।’ हालांकि यदि कंपनी पीएलआई लक्ष्य तक भी पहुंचती है तो उसे पांच साल की अवधि में करीब 322 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा जो उसके वृद्धिशील निवेश के मुकाबले तीन गुना है।
गुप्ता ने यह भी कहा कि बाद में कंपनी अन्य नेटवर्क वायरलेस उत्पादों, रेडियो आदि को भी अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में शामिल करते हुए विस्तार कर सकती है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में यह संयुक्त उद्यम केवल आयात का विकल्प उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करेगा और लंबी अवधि में उसकी नजर भारत से निर्यात करने पर भी होगी।
डिक्सन के अनुसार, भुनाने के लिए एक बड़ा बाजार पहले से ही मौजूद है। उदाहरण के लिए, पीएलआई योजना के तहत पहचान किए गए उत्पादों का कुल बाजार करीब 7,000 करोड़ सालाना है जिसमें आयात की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है और उमें तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

First Published - April 7, 2021 | 11:49 PM IST

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