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एमेजॉन-फ्यूचर पर फैसला जल्द

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Last Updated- December 14, 2022 | 10:25 PM IST

अमेरिका की दिग्गज कंपनी एमेजॉन और किशोर बियाणी के नियंत्रण वाले फ्यूचर समूह के बीच पैदा हुए विवाद पर सिंगापुर में मध्यस्थता पंचाट में सुनवाई शुरू हो चुकी है। एमेजॉन और खुदरा कारोबार से जुड़ी इकाई फ्यूचर समूह के बीच पिछले सप्ताह सिंगापुर में आपात मध्यस्थता सुनवाई शुरू हो गई। सूत्रों के अनुसार अगले कुछ दिनों में इस मामले में निर्णय आ सकता है।
दोनों कंपनियों के बीच यह विवाद मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को फ्यूचर समूह का खुदरा कारोबार बेचे जाने के बाद शुरू हुआ है। एमेजॉन ने आरोप लगाया था कि उसने फ्यूचर समूह के साथ एक गैर-प्रतिस्पद्र्धी समझौता कर रखा था, इसलिए आरआईएल के साथ सौदा अनुचित था। एमेजॉन ने फ्यूचर समूह को भेजे कानूनी नोटिस में कहा था कि आरआईएल को 24,713 करोड़ रुपये में खुदरा कारोबार बेचने का सौदा गैर-प्रतिस्पद्र्धी समझौते का उल्लंघन था। विवाद खड़ा होने के बाद सिंगापुर इंटरनैशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (एसआईएसी) में इस मामले पर सुनवाई शुरू हो गई।
सूत्रों के अनुसार वी के राजा ने 16 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई की। वह एमेजॉन और फ्यूचर के बीच चल रही कानूनी लड़ाई में प्रमुख मध्यस्थ हैं। राजा सिंगापुर के न्यायिक अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने सिंगापुर के महाधिवक्ता के अलावा वहां के उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के तौर पर काम किया है। समझा जा रहा है कि मामले पर करीब 5 घंटे तक सुनवाई हुई। ऐसी खबरें आ रही थीं कि भारत के पूर्व सोलीसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यन ने एमेजॉन का पक्ष रखा। सिंगापुर में रहने वाले देविंदर सिंह ने फ्यूचर की गैर-सूचीबद्ध इकाई फ्यूचर कूपन्स का पक्ष रखा। हरीश साल्वे आरआईएल द्वारा अधिग्रहीत कंपनी फ्यूचर रिटेल की तरफ से पेश हुए।
इस पूरे मामले में भेजे सवाल पर एमेजॉन ने कोई जवाब नहीं दिया। एमेजॉन ने कहा था कि आरआईएल के साथ सौदा करने से पहले फ्चूचर ने उससे अनुमति नहीं मांगी थी। विशेषज्ञों ने कहा कि फ्यूचर-आरआईएल सौदा एमेजॉन के लिए चुनौती साबित हो सकती है क्योंकि यह देश के खुदरा (ऑफलाइन) कारोबार में अपनी पैठ बढ़ाना चाह रही है। भारत में खुदरा बाजार 1.2 लाख करोड़ रुपये का है, जिसका केवल 7 प्रतिशत कारोबार ही ऑनलाइन माध्यम से होता है। विश्लेषकों के अनुसार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से संबंधित दिशानिर्देशों के कारण एमेजॉन सीधे खुदरा कंपनियों का अधिग्रहण नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि एमेजॉन शॉपर्स स्टॉप और फ्चूयर जैसी कंपनियों के साथ छोटे सौदे कर रही है और एक साझेदार के तौर पर काम करती है।
फॉरेस्टर रिसर्च में सीनियर फोरकास्ट एनालिस्ट सतीश मीणा ने कहा, ‘एमेजॉन यह सोचकर अधिक से अधिक ऑफलाइन कारोबार खरीद रही है ताकि एफडीआई नियमों में बदलाव के बाद वह ये परिसंपत्तियां खरीदने की बेहतर स्थिति में रहे। फ्यूचर के साथ सौदा करने के बाद रिलायंस की किराना कारोबार में हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है।’

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First Published - October 20, 2020 | 11:39 PM IST

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