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हर्षवर्धन लोढ़ा को अदालती झटका

Last Updated- December 15, 2022 | 1:39 AM IST

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को हर्षवर्धन लोढ़ा को एमपी बिड़ला समूह की कंपनियों से हटाने का निर्देश दिया। अदालत के इस आदेश से एक ओर जहां लोढ़ा को झटका लगा है, वहीं बिड़ला को प्रियंवदा बिड़ला की वसीयत के मामले में 16 साल पुराने संघर्ष में अहम जीत हासिल हुई है।
बिड़ला ने कहा कि उच्च न्यायालय ने एमपी बिड़ला समूह में लोढ़ा को किसी पद पर रहने से रोक दिया। अदालत ने प्रशासकों की समिति के फैसले के क्रियान्वयन का आदेश दिया है। इन निर्देशों का मतलब यह है कि हर्षवर्धन लोढ़ा से एमपी बिड़ला समूह में सभी पद तत्काल छिन गए, जिनमें विभिन्न कंपनियों में निदेशक का पद और समूह के ट्रस्टों व सोसायटी में अन्य पद शामिल हैं। बिड़ला की तरफ से जारी बयान में ये बातें कही गई है।
लोढ़ा, एमपी बिड़ला समूह की कंपनियों के चेयरमैन हैं। अदालत ने लोढ़ा को एपीएल कमेटी (प्रियंवदा बिड़ला एस्टेट की प्रशासकों की समिति) के फैसले में हस्तक्षेप करने से भी रोक दिया है, जो बहुमत से लिया गया है। बिड़ला के बयान में ये बातें कही गई है। हालांकि अदालत ने कहा है, चूंकि कंपनियां इस वसीयत से जुड़ी कार्यवाही में पक्षकार नहीं थीं, लिहाजा उनके खिलाफ निर्देश जारी नहीं किए जा सकते लेकिन एपीएल समिति के फैसले को लोढ़ा लागू करेंगे, जो इस कार्यवाही में शिकायत करने वाले हैं।
लोढ़ा के वकील फॉक्स ऐंड मंडल के पार्टनर देवांजन मंडल ने कहा, विंध्य टेलीलिंक्स लिमिटेड, बिड़ला केबल लिमिटेड और बिड़ला कॉरपोरेशन में हर्ष वर्धन लोढ़ा की दोबारा नियुक्ति पर न्यायमूर्ति एस मुंशी कै फैसला विधि-सम्मत नजर नहीं आ रहा। तात्कालिक व लंबी अवधि के राहत के लिए मेरे क्लाइंट इस फैसले को चुनौती देंगे।
लोढ़ा के वकील ने कहा, लोढ़ा अपील अदालत का रुख करेंगे। उपरोक्त दो कंपनियों (वंध्य टेलीलिंक्स लिमिटेड, बिड़ला केबल) में निदेशक के तौर पर लोढ़ा की दोबारा नियुक्ति की समीक्षा सर्वोच्च न्यायालय समेत दो उच्च अदालतों ने की है और कंपनियों को पिछले साल एजीएम में हुए मतदान के नतीजे प्रकाशित करने पर रोक लगाने के फैसले को दरकिनार कर दिया गया। आदेश में इसका जिक्र नहीं है और इस आधार पर फैसले को चुनौती दी जाएगी।
लोढ़ा पक्ष ने कहा, इसके अतिरिक्त प्रोबेट कोर्ट का न्यायाधिकार क्षेत्र और ऐसे आदेशों को स्वीकार न किया जाना निदेशक/चेयरमैन के पद पर दोबारा नियुक्ति के शेयरधारकों के फैसले को प्रभावित करता है, जिसे अपील अदालत में उठाया जाएगा। अदालत ने भारतीय उत्तराधिकार कानून की धारा 247 के तहत लोढ़ा के खिलाफ निर्देश जारी किए।
एक अलग बयान में बिड़ला कॉर्प के प्रवक्ता ने कहा, कंपनी इस फैसले पर नजर डालेगी और जरूरी कदम उठाएगी, जिसमें अपील करना शामिल है क्योंंकि इस फैसले में शेयरधारकों के लोकतंत्र और कंपनी के निदेशक चुनने में उनकी वोटिंग के अधिकार को नजरअंदाज किया गया है। प्रवक्ता ने कहा, शेयरधारकों ने हर्ष वर्धन लोढ़ा को 98 फीसदी बहुमत के साथ बिड़ला कॉर्प का निदेशक नियुक्ति किया था। लोढ़ा को निदेशक का पद संभालने का अपात्र घोषित नहीं किया गया है, ऐसे में शेयरधारकों के फैसले का सम्मान नहीं करने का कोई कारण नहीं बनता।
प्रियंवदा बिड़ला की परिसंपत्तियों के प्रशासन व प्रबंधन के लिए साल 2012 में उच्च न्यायालय की तरफ से गठित एपीएल समिति पिछले एक साल से केंद्र में है क्योंकि समिति एमपी बिड़ला समूह की कंपनियों में लोढ़ा की दोबारा नियुक्ति का विरोध कर रही है। जुलाई 2019 में उसने बहुमत के फैसले से लोढ़ा को विंध्य टेलीलिंक्स व बिड़ला केबल के निदेशक मंडल से हटाने का निर्देश दिया था।

First Published - September 18, 2020 | 11:48 PM IST

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