facebookmetapixel
₹90 से ₹103 तक? Modern Diagnostic IPO की लिस्टिंग को लेकर ग्रे मार्केट में दिखा बड़ा संकेतCCI रिपोर्ट में खुुलासा: TATA-JSW-SAIL समेत 28 कंपनियों ने स्टील की कीमतें तय करने में सांठगांठ की2026 का IPO कैलेंडर: Jio से Coca-Cola तक, 9 बड़े नाम बाजार में एंट्री को तैयारSBI की उड़ान जारी: मार्केट कैप ₹10 लाख करोड़ के करीब, ब्रोकरेज ने कहा- ₹1,120 तक जा सकता है भाववेनेजुएला को तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए 2040 तक 183 अरब डॉलर निवेश की जरूरतBudget 2026: चावल निर्यातकों ने बजट में कर, ब्याज और ढुलाई में राहत की मांग कीरूसी तेल की अफवाहों पर Reliance का पलटवार, कहा- खबरें ‘पूरी तरह से झूठी हैं’LIC Scheme: 10वीं पास महिलाओं के लिए खास स्कीम, हर महीने ₹7,000 तक की कमाई का मौकासीमेंट कंपनियों की बल्ले-बल्ले! दिसंबर तिमाही में मुनाफा 65% तक बढ़ने की उम्मीद, ब्रोकरेज ने चुने 3 स्टॉक्सनया साल, नया मनी प्लान! निवेश, बचत और वेल्थ बनाने की रणनीति, याद रखें एक्सपर्ट के 4 टिप्स

एवरेडी मामले को निपटाए पंचाट

Last Updated- December 11, 2022 | 8:16 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यस्थता पंचाट को केकेआर इंडिया फाइनैंशियल सर्विसेज के साथ मामले में एवरेडी इंडस्ट्रीज द्वारा दी गई न्यायिक चुनौती के आवेदन का निपटान करने का निर्देश दिया है।
1 अप्रैल के आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने एवरेडी से यह भी कहा था कि वह व्यवसाय की सामान्य प्रक्रिया को छोड़कर अपनी परिसंपत्तियों का निपटान नहीं करे। आदेश में कहा गया कि याची (एवरेडी) को चार सप्ताह की अवधि तक (मध्यस्थता पंचाट का अगला आदेश आने तक) अपनी गैर-भारग्रस्त परिसंपत्तियों से किसी तरह के बचाव से प्रतिबंधित किया गया है।
एवरेडी ने स्टॉक एक्सचेंजों को शनिवार को आए आदेश के बारे में जानकारी दी और कहा कि कंपनी अपने कानूनी सलाहकार की सलाह के आधार पर जरूरी कदम उठाने की प्रक्रिया में है।
कंपनी के अधिकारियों ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश कुछ हद तक राहत लेकर आया था क्योंकि इससे सामान्य व्यवसाय की परिसंपत्तियां बेचने या उनकी जिम्मेदारी संभालने की अनुमति मिली थी, जबकि पहले इसकी अनुमहित नहीं थी।  
अधिकारियों का यह भी कहना है कि चार सप्ताहों में मध्यस्थता पंचाट को यह निर्णय लेना होगा कि क्या एवरेडी मध्यस्थता सुनवाई के लिए पक्ष बन सकती है या नहीं।
फरवरी में, दिल्ली उच्च न्यायालय के खंडपीठ ने एकल पीठ द्वारा जारी किए गए निषेधाज्ञा आदेश को बरकरार रखा था, जिससे विलियमसन मेजर समूह की इकाई के तौर पर एवरेडी अपनी किसी तरह की परिसंपत्तियां बेचने, स्थानांतरित करने, निपटान करने, सौदा करने, या थर्ड पार्टी अधिकारी बनाने से रोक दिया गया।
एवरेडी ने इस निषेधाज्ञा के खिलाफ आवाज उठाई थी और इंटरनैशनल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के मध्यस्थता पंचाट के समक्ष मध्यस्थता प्रक्रिया के तहत आर्बीट्रेशन ऐंड कॉन्सिलिएशन ऐक्ट, 1996 के तहत इस आधार पर न्यायिक चुनौती दी कि उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकेगी, क्योंकि वह केकेआर (याचिकाकर्ता) के साथ समझौते से जुड़ी हुई नहीं थी।
खंडपीठ आदेश के खिलाफ एवरेडी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में स्पेशल लीव पेटीशन (एसएलपी) दायर की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अप्रैल को इसे लेकर आदेश जारी किया था।
कानूनी विवाद तब पैदा हुआ था जब केकेआर ने विलियमसन मेजर ऐंड कंपनी और विलियमसन फाइनैंशियल सर्विसेज के लिए दिए गए 200 करोड़ रुपये की वसूलने की कोशिश की थी।
एवरेडी ने व्यावसायिक रणनीति तैयार करने के लिए कंसल्टेंसी फर्म बेन ऐंड कंपनी को नियुक्त किया है।

First Published - April 3, 2022 | 11:19 PM IST

संबंधित पोस्ट